बीकानेर नगर निगम के मेयर चुनाव में कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह और बगावत का मामला आखिरकार सुलझ गया है। कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करने वाले नवरतन डागा ने अपना पर्चा वापस ले लिया है। इस अहम कदम के बाद अब बीकानेर मेयर पद के लिए चुनावी रण पूरी तरह से साफ हो गया है। अब इस मुकाबले में कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार अनिल कल्ला और भाजपा के डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत के बीच आमने-सामने की सीधी टक्कर देखने को मिलेगी।
नामांकन के दिन खड़ा हुआ था विवाद
बीकानेर नगर निगम चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही कांग्रेस के भीतर अंतर्विरोध खुलकर सामने आ गए थे। नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन पार्टी में उस समय हड़कंप मच गया था, जब आधिकारिक प्रत्याशी अनिल कल्ला के सामने नवरतन डागा ने भी अपना पर्चा दाखिल कर दिया था। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर कांग्रेस में गुटबाजी और नेताओं के बीच मतभेदों को लेकर तीखी चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी के रणनीतिकारों को डर था कि वोट बंटने की स्थिति में भाजपा को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
वरिष्ठ नेतृत्व के हस्तक्षेप से सुलझा संकट
इस संकट को टालने और पार्टी में बगावत को शांत करने के लिए वरिष्ठ नेताओं ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया था। नवरतन डागा को मनाने और उन्हें मुख्य धारा में वापस लाने के लिए बातचीत के प्रयास तेज किए गए। आखिरकार, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से एक महत्वपूर्ण मुलाकात और सकारात्मक चर्चा के बाद नवरतन डागा ने अपना नामांकन वापस लेने पर सहमति जताई। अपना पर्चा वापस लेने के बाद डागा ने स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस के एक वफादार सिपाही हैं। उन्होंने कहा कि उनका मकसद केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अपनी बात को सबके सामने रखना था। अब जब पार्टी ने अनिल कल्ला को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, तो वे भी उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेशाध्यक्ष ने उनके इस लोकतांत्रिक कदम की सराहना की है।
परिवारवाद के आरोपों पर प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने राहत व्यक्त की और नवरतन डागा का आभार जताया। उन्होंने कहा कि डागा ने पार्टी के हित में अपना नामांकन वापस लेकर एक परिपक्व राजनीतिक सूझबूझ का परिचय दिया है। वहीं, स्थानीय स्तर पर लग रहे परिवारवाद के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. बीडी कल्ला ने कहा कि उन्हें सक्रिय राजनीति में काम करते हुए लगभग 50 साल पूरे हो चुके हैं। इस लंबी अवधि के दौरान उनके परिवार से कोई भी व्यक्ति चुनावी राजनीति में आगे नहीं आया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि परिवार का कोई योग्य सदस्य अपनी मेहनत के दम पर चुनाव लड़ता है, तो उसे परिवारवाद कहना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने विपक्षी दल का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा में भी कई ऐसे परिवार हैं जिनके सदस्य सक्रिय रूप से चुनाव लड़ते हैं।
वार्डों का गणित और जीत के दावे
बीकानेर नगर निगम में बहुमत के समीकरणों को लेकर भी राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। देहात कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बिसनाराम सिहाग ने पार्टी की एकजुटता पर पूरा भरोसा जताया है। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम में कांग्रेस एकजुट होकर मुकाबला कर रही है और पार्टी का मेयर लगभग 50 वोटों के अंतर से अपनी जीत दर्ज कराएगा। अगर बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो कांग्रेस ने कुल 42 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा के खाते में 27 सीटें आई हैं। इसके अलावा निगम में 10 निर्दलीय पार्षद और एक आरएलपी पार्षद भी मौजूद हैं। बहुमत के इस गणित के बीच दोनों ही दल निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करने और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं के सहारे अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। भाजपा भी पूरा जोर लगा रही है और उसे बीकानेर में अपना बोर्ड बनाने की पूरी उम्मीद है। मेयर पद के लिए मतदान की प्रक्रिया 21 सितंबर को आयोजित की जाएगी और उसी दिन शाम तक चुनावी नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे, जिससे स्पष्ट हो जाएगा कि बीकानेर का अगला मेयर कौन होगा।














