अमेरिका के जाने-माने रिपब्लिकन सीनेटर लिंड्से ग्राहम का 71 वर्ष की आयु में अचानक निधन हो गया है। दक्षिण कैरोलिना से आने वाले ग्राहम अमेरिकी राजनीति के सबसे प्रभावशाली और चर्चित चेहरों में से एक थे। भारत में भी उनकी खासी चर्चा रहती थी, जिसका मुख्य कारण हाल के वर्षों में भारत की विदेश नीति और विशेष रूप से रूस से तेल आयात को लेकर दिए गए उनके कड़े बयान थे। हालांकि, उनकी मृत्यु के सटीक कारणों का अभी तक आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया गया है। उनके कार्यालय द्वारा जारी किए गए एक बयान के अनुसार, 11 जुलाई की शाम को वह अचानक एक बीमारी की चपेट में आ गए, जिसके बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। इस दुखद घड़ी में उनके परिवार ने लोगों से प्रार्थना करने की अपील की है।
दक्षिण कैरोलिना से वॉशिंगटन तक का लंबा सफर
लिंड्से ग्राहम का अमेरिकी संसद में एक लंबा और बेहद प्रभावी करियर रहा। वह साल 2003 से लगातार अमेरिकी सीनेट के सदस्य के रूप में दक्षिण कैरोलिना का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। विदेशी मामलों, राष्ट्रीय सुरक्षा और न्यायिक निर्णयों के क्षेत्र में उन्हें रिपब्लिकन पार्टी की सबसे सशक्त आवाजों में गिना जाता था। सीनेट में कदम रखने से पहले, उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की थी। वह साल 1995 में पहली बार प्रतिनिधि सभा के सदस्य चुने गए थे और वहां उन्होंने लगातार चार कार्यकाल तक अपनी सेवाएं दी थीं। उनके इस लंबे अनुभव ने उन्हें अमेरिकी विदेश नीति के निर्णयों में एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान दिलाया था।
ट्रंप के तीखे आलोचक से सबसे भरोसेमंद सहयोगी बनने का सफर
ग्राहम के राजनीतिक जीवन का एक सबसे दिलचस्प पहलू डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके बदलते संबंध थे। एक समय था जब लिंड्से ग्राहम, डोनाल्ड ट्रंप के सबसे मुखर और कट्टर आलोचकों में शुमार किए जाते थे। लेकिन समय के साथ उनके इस दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव आया और वह ट्रंप के सबसे मजबूत समर्थकों में से एक बनकर उभरे। उनके निधन की खबर पर ट्रंप ने गहरा शोक व्यक्त किया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि सीनेटर लिंड्से ग्राहम उनके जीवन में जाने गए सबसे बेहतरीन लोगों और सांसदों में से एक थे। ट्रंप ने उन्हें एक समर्पित देशभक्त बताते हुए कहा कि वह हमेशा काम में जुटे रहते थे और उनकी कमी हमेशा महसूस होगी। उन्होंने यह भी बताया कि अंतिम संस्कार और अन्य प्रबंधों की जानकारी बाद में साझा की जाएगी।
भारत पर निशाना और 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी
हाल के महीनों में लिंड्से ग्राहम भारत के खिलाफ दिए गए बयानों को लेकर भारतीय मीडिया और गलियारों में काफी सुर्खियों में रहे थे। उन्होंने डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल के साथ मिलकर अमेरिकी सीनेट में सैंक्शनिंग रशिया एक्ट पेश किया था। इस प्रस्तावित विधेयक के तहत एक बेहद कड़ा प्रावधान रखा गया था, जिसके अनुसार रूस से कच्चे तेल और गैस की खरीद जारी रखने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाया जा सकता था। ग्राहम ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से भारत का नाम लेकर कहा था कि जब तक भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता, तब तक भारत और अमेरिका के संबंध पूरी तरह मजबूत नहीं हो सकते। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध के लिए रूसी खजाने को मजबूत करने में मदद कर रहा है।
पाकिस्तान को लेकर कड़ा रुख और अविश्वास
भले ही भारत की ऊर्जा नीतियों को लेकर ग्राहम का रुख काफी सख्त रहा हो, लेकिन पाकिस्तान के मामले में भी वह कभी नरम नहीं पड़े। इसी साल उन्होंने सार्वजनिक मंच से पाकिस्तान पर अपने गहरे अविश्वास को जाहिर किया था। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, जिसमें दावा किया गया था कि अमेरिकी कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान अपने सैन्य अड्डों पर ईरानी सैन्य विमानों को शरण दे रहा था। इस मुद्दे पर ग्राहम ने सीधे अमेरिकी रक्षा मंत्री से सवाल पूछा था कि क्या ऐसी परिस्थितियों में पाकिस्तान पर एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में भरोसा किया जा सकता है। पाकिस्तान के प्रति उनका यह सख्त रवैया उनके पूरे करियर में लगातार दिखाई देता रहा।











