स्पेन के जंगलों में लगी भीषण आग: गहरी खाई में जिंदगी और मौत से जूझते मिले दो ब्रिटिश नागरिक, आपातकालीन अलर्ट सिस्टम पर भड़का लोगों का गुस्सायूरोप
3 घंटे पहले· 2

स्पेन के जंगलों में लगी भीषण आग: गहरी खाई में जिंदगी और मौत से जूझते मिले दो ब्रिटिश नागरिक, आपातकालीन अलर्ट सिस्टम पर भड़का लोगों का गुस्सा

स्पेन के अलमेरिया प्रांत में भीषण जंगलों की आग के बीच एक ब्रिटिश जोड़े को गंभीर रूप से झुलसी हुई हालत में एक गहरी खाई से बचाया गया है, जबकि इस आपदा में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है।

स्पेन के अलमेरिया प्रांत में जंगलों में लगी बेहद भीषण आग की चपेट में आने के बाद एक ब्रिटिश जोड़े को बेहद नाजुक हालत में एक गहरी खाई से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों और बचाव दलों के अनुसार, जब यह भयानक आग तेजी से फैली, तब यह जोड़ा पहाड़ी इलाकों में हाइकिंग यानी पैदल यात्रा के लिए निकला हुआ था। रेस्क्यू के समय दोनों अर्ध-बेहोश थे और उनके शरीर का एक बड़ा हिस्सा झुलस चुका था। उन्हें तुरंत वहां से निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां फिलहाल वे गहन चिकित्सा इकाई यानी ICU में जीवन रक्षक प्रणालियों पर हैं। इस भयानक प्राकृतिक आपदा ने अब तक कम से कम 12 लोगों की जान ले ली है, जिनमें से चार लोगों के ब्रिटिश नागरिक होने की आशंका जताई जा रही है। इस आग ने करीब 6,600 हेक्टेयर (16,300 एकड़) भूमि को पूरी तरह से जलाकर राख कर दिया है, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई है।

गहरी खाई में सांसों की जंग और चमत्कारिक रेस्क्यू

इस ब्रिटिश जोड़े को सिविल गार्ड के अधिकारियों ने शुक्रवार तड़के बेडार गांव के पास खोज निकाला, जो इस आग से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक था। बचाव दल के सदस्य उस समय जीवित बचे लोगों की तलाश में घने धुएं और जलती हुई पहाड़ियों के बीच गश्त कर रहे थे। उसी दौरान उन्हें मदद के लिए बहुत धीमी और कमजोर आवाजें सुनाई दीं, जो काफी दूरी से आ रही थीं। बचाव दल में शामिल सार्जेंट पेड्रो बैरे ने बताया कि पहाड़ों पर काम करने के अनुभव ने उन्हें रुकने और एक बार फिर से जांच करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे आपको इस काम का अनुभव होता जाता है, आपके भीतर से एक आवाज आती है जो कहती है कि एक बार फिर देखो और एक आखिरी कोशिश करो। इसी सहज ज्ञान के सहारे पूरी टीम आवाज की दिशा में आगे बढ़ी।

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बचाव दल ने आवाज का पीछा करते हुए बेहद कठिन और ढलान वाली पहाड़ी से नीचे उतरना शुरू किया। नीचे पहुंचने पर उन्हें यह जोड़ा बेहद नाजुक स्थिति में मिला। दोनों के शरीर का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा बुरी तरह झुलस चुका था और वे अर्ध-बेहोश अवस्था में पड़े थे। सिविल गार्ड के एक अन्य अधिकारी राफेल ज़िया ने इस रेस्क्यू को याद करते हुए बताया कि वे जिस शारीरिक और मानसिक हालत में थे, वैसी स्थिति में चिल्लाकर मदद के लिए आवाज लगाना भी उनके लिए एक बहुत बड़ा और असाधारण प्रयास रहा होगा। सार्जेंट पेड्रो बैरे ने भावुक होते हुए कहा कि जब उन दोनों ने हमें अपने सामने देखा, तो उनके चेहरों पर जो हैरानी और राहत के मिले-जुले भाव थे, उसे हमारी पूरी टीम जिंदगी भर कभी नहीं भूल पाएगी।

अंडालूसिया में आग पर काबू पाने की कोशिशें और स्थिति का आकलन

रविवार को अंडालूसिया की क्षेत्रीय सरकार के प्रमुख जुआन मैनुअल मोरेनो बोनिला ने सोशल मीडिया पर इस संकट के संबंध में एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जंगलों की आग को पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया गया है और इसके फैलाव वाले बाहरी दायरे को सुरक्षित कर लिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने पूरे क्षेत्र के लिए जारी आपातकालीन चेतावनी के स्तर को भी कम कर दिया है। शनिवार को मौसम के मिजाज में आए बदलाव, जैसे कि हवाओं की रफ्तार धीमी होने और हवा में नमी का स्तर बढ़ने से दमकलकर्मियों को आग पर काबू पाने में बहुत बड़ी सफलता मिली थी।

क्षेत्रीय आपातकालीन विभाग के प्रमुख एंटोनियो सान्ज़ ने बताया कि अलमेरिया प्रांत के प्रभावित इलाकों से सुरक्षित बाहर निकाले गए लगभग 1,500 लोगों में से करीब 600 लोगों को अब अपने घरों को वापस लौटने की अनुमति दे दी गई है। हालांकि, कई इलाकों में अभी भी पुलिस ने सुरक्षा कारणों से बैरिकेडिंग कर रखी है और बेडार जैसे गंभीर रूप से प्रभावित कस्बों में आम लोगों और वाहनों के प्रवेश को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया हुआ है, ताकि आपातकालीन सेवाएं अपना काम बिना किसी बाधा के पूरा कर सकें।

बेडार के गोलचक्कर पर अनिश्चितता के बीच इंतजार करते लोग

इस प्राकृतिक आपदा के बीच सबसे ज्यादा प्रभावित कस्बों में से एक लॉस गैलार्डोस का क्षेत्र है, जहां बहुत बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक और प्रवासी रहते हैं। रविवार को बेडार गांव के नीचे बने एक गोलचक्कर पर दर्जनों स्थानीय निवासी इकट्ठा हुए थे, जो पुलिस के घेरे के हटने का इंतजार कर रहे थे ताकि वे अपने घरों में वापस जाकर नुकसान का जायजा ले सकें। कई निवासियों को इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि उनका आशियाना इस भीषण आग में सुरक्षित बचा भी है या पूरी तरह से नष्ट हो चुका है। सिविल गार्ड के ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने नीले रंग की सुरक्षा टेप लगाकर उनके रास्ते को बंद किया हुआ था।

वहां बेहद चिंतित अवस्था में इंतजार कर रहे लोगों में ब्रिटेन के कॉर्नवाल से आए माइक और बेलिंडा लिथगो भी शामिल थे, जिनका इस पहाड़ी इलाके के पास एक हॉलिडे होम यानी छुट्टियां बिताने का घर है। आग की विभीषिका शुरू होने के बाद से ही वे अपने पालतू कुत्ते रॉकेट के साथ अपनी कैंपर वैन में सोने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि गांव के मेयर और आपातकालीन सेवाओं के अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक के बाद उन्हें अपने घर की स्थिति देखने के लिए रविवार को बाद में केवल एक घंटे की अनुमति दी जाएगी। बेलिंडा लिथगो ने उम्मीद जताते हुए कहा कि जब वे घर छोड़कर भाग रहे थे, तब धुएं का गुबार पहाड़ के दूसरी तरफ था, इसलिए शायद उनका घर बच गया हो। वहीं उनके पति माइक का कहना था कि पहाड़ों और खाइयों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए कुछ भी निश्चित तौर पर कहना मुश्किल है, लेकिन वे उम्मीद कर रहे हैं कि आग खाई के रास्ते से होकर गांव के दूसरी ओर निकल गई होगी।

सुरक्षा चेतावनियों और मोबाइल अलर्ट की कमी पर फूटा गुस्सा

गोलचक्कर के पास अपने पति के साथ इंतजार कर रही एक अन्य निवासी एम्मा मिशेल ने स्थानीय प्रशासन के उन बयानों पर गहरी आपत्ति जताई, जिनमें कहा गया था कि कुछ मृतकों ने सुरक्षित निकासी के लिए तय किए गए आधिकारिक रास्तों का पालन नहीं किया था। एम्मा ने गुस्से में कहा कि वे पिछले तीन वर्षों से यहां पूर्णकालिक तौर पर रह रही हैं और प्रशासन की तरफ से आज तक कभी भी ऐसी कोई जानकारी या नक्शा नहीं दिया गया कि आग लगने की स्थिति में किस रास्ते का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा, इस आपदा में अपनी जान गंवाने वाले एक बेल्जियम के नागरिक के बेटे ने भी प्रशासन के इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि पीड़ितों ने घरों के भीतर ही सुरक्षित रहने की सरकारी सलाह की अनदेखी की थी। उन्होंने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि आपातकालीन सेवाओं ने उन्हें किसी भी प्रकार का कोई निर्देश या मार्गदर्शन समय पर प्रदान नहीं किया था।

एम्मा मिशेल ने इस बात की भी कड़ी निंदा की कि संकट के समय इलाके के लोगों के मोबाइल फोन पर कोई आपातकालीन चेतावनी संदेश क्यों नहीं भेजा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस तरह भूकंप आने पर सभी के फोन पर तुरंत मोबाइल अलर्ट भेजा जाता है, वैसा ही कदम यहां भी उठाया जाना चाहिए था। उन्होंने इस तर्क को बकवास बताया कि यह तकनीक बहुत जटिल है, क्योंकि जमीनी हकीकत यह है कि बेडार जैसे दूरदराज के इलाकों में बेहद कम सरकारी कर्मचारी और सुरक्षा अधिकारी तैनात हैं। स्थानीय अधिकारियों ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने गुरुवार की रात को मोबाइल अलर्ट इसलिए जारी नहीं किया क्योंकि इससे प्रभावित क्षेत्र से बाहर के लोगों तक भी घबराहट फैल सकती थी, जिससे सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया और अधिक जटिल हो जाती। हालांकि, एम्मा ने व्यक्तिगत स्तर पर स्थानीय पुलिसकर्मियों और दमकलकर्मियों के असाधारण प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने जान जोखिम में डालकर घर-घर जाकर लोगों को आगाह किया।

अभूतपूर्व तबाही और मृतकों की पहचान का जटिल काम

लॉस गैलार्डोस के मेयर फ्रांसिस्को मिगुएल रेयेस ने स्पैनिश रेडियो स्टेशन कैडेना एसईआर से बात करते हुए इस तबाही की भयावहता की तुलना एक बम विस्फोट से की। उन्होंने अत्यंत दुखी मन से कहा कि ऐसा महसूस होता है जैसे हमारे खूबसूरत इलाके पर कोई बम गिरा दिया गया हो, क्योंकि उनके पूरे जीवनकाल में इस क्षेत्र ने कभी भी इतनी विनाशकारी आग का सामना नहीं किया था। वर्तमान में सैकड़ों दमकलकर्मी, सेना के जवान, पुलिस बल और लगभग 30 अग्निशामक विमान इस आपदा से निपटने और सुलगते कोयलों को पूरी तरह से बुझाने के काम में जुटे हुए हैं।

उधर मैड्रिड में मौजूद फॉरेंसिक वैज्ञानिक मृतकों के अवशेषों और लापता लोगों के परिवारों से डीएनए (DNA) के नमूने एकत्र कर शवों की पहचान करने की जटिल प्रक्रिया में लगे हुए हैं। इस प्रक्रिया में काफी समय लग रहा है क्योंकि कई पीड़ितों के परिजन विदेशों से स्पेन पहुंच रहे हैं, जिससे डीएनए नमूनों को मिलाकर मिलान करने के काम में देरी हो रही है। अब तक कम से कम 12 मौतों के साथ यह स्पेन के इतिहास की सबसे भीषण और घातक जंगलों की आग में से एक बन चुकी है। इससे पहले साल 1984 में ला गोमेरा के कैनरी द्वीप पर लगी आग में 20 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 1979 में उत्तर-पूर्वी स्पेन के लोरेट डी मार के पास जंगलों की आग में 9 बच्चों सहित 21 लोगों की जान चली गई थी।

जलवायु परिवर्तन और पूरे यूरोप पर मंडराता संकट

वैज्ञानिकों और कोपरनिकस जलवायु सेवा के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा तापमान इस तरह की विनाशकारी घटनाओं का मुख्य कारण है। यूरोप वर्तमान में दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है, जहां तापमान वैश्विक औसत की तुलना में दोगुनी गति से बढ़ रहा है। इस अत्यधिक गर्मी के कारण गर्मियों के महीनों में रिकॉर्ड तोड़ लू चल रही है, पानी की भारी किल्लत हो रही है और जंगलों की आग अत्यंत उग्र और अनियंत्रित होती जा रही है।

यह संकट केवल स्पेन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी देश फ्रांस भी इस गर्मी में जंगलों की आग से बुरी तरह जूझ रहा है। वहां सोमवार को फ्रांसीसी पाइरेनीज़ की पहाड़ियों से लगे इलाकों से 10,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया था। हालांकि, फ्रांस के अधिकारियों ने शनिवार को एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने जंगलों में जानबूझकर आग लगाने के संदेह में 32 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिससे इस मानवीय और प्राकृतिक संकट का एक और भयावह पहलू सामने आया है।

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