हंगरी की संसद ने राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए मतदान कियादुनिया
2 घंटे पहले· 2

हंगरी की संसद ने राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए मतदान किया

हंगरी की संसद में तीसा पार्टी ने बहुमत के साथ राष्ट्रपति तमाश सुलयोक को हटाने के लिए 17वां संवैधानिक संशोधन पारित किया है। इस कदम ने पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान की पार्टी के प्रभुत्व को एक बड़ा झटका दिया है।

हंगरी की संसद ने राष्ट्रपति तमाश सुलयोक को उनके पद से हटाने के पक्ष में मतदान किया है। तमाश सुलयोक को व्यापक रूप से पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान का वफादार माना जाता था, जिनकी पार्टी 16 साल तक सत्ता में रहने के बाद अप्रैल में हार गई थी। इस महत्वपूर्ण निर्णय को हंगरी के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

सत्ता का बड़ा फेरबदल

प्रधानमंत्री पीटर माद्यार की तीसा पार्टी ने अपने दो-तिहाई बहुमत का उपयोग करते हुए हंगरी के संविधान में 17वां संशोधन तेजी से पारित करवा लिया है। यह कानून न केवल तमाश सुलयोक का कार्यकाल समाप्त करता है, बल्कि संवैधानिक न्यायालय के प्रमुख पीटर पोल्ट को भी पद से हटा देता है। यह दिन मई की शुरुआत में नई सरकार के कार्यभार संभालने के बाद संसद के लिए सबसे नाटकीय घटनाक्रम रहा है। नई सरकार ने 12 अप्रैल को विक्टर ओरबान की फिदेस पार्टी के खिलाफ एक आश्चर्यजनक और भारी जीत हासिल की थी।

कानूनी स्थिति और आगामी कदम

अब तमाश सुलयोक के पास पांच दिन का समय है। इस अवधि के भीतर उन्हें या तो इस संशोधन पर हस्ताक्षर करने होंगे, जिसे उनका अपना राजनीतिक मृत्यु वारंट कहा जा रहा है, या फिर इसे संवैधानिक न्यायालय के पास भेजना होगा। यदि तमाश सुलयोक इस मामले को न्यायालय में ले जाते हैं, तो पीटर माद्यार ने महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है, जिसके चलते उन्हें स्वतः ही पद से निलंबित कर दिया जाएगा। देश में संवैधानिक संकट से बचने के लिए सरकार की ओर से यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि तमाश सुलयोक स्वेच्छा से अपने पद से इस्तीफा दे दें।

विपक्ष का कड़ा विरोध

संसद में सोमवार को हुए मतदान से पहले फिदेस पार्टी के सांसदों ने सदन का बहिष्कार किया। उन्होंने तीसा पार्टी पर तानाशाही स्थापित करने का आरोप लगाया है। फिदेस का तर्क है कि यह संवैधानिक संशोधन सरकार को मनमाने ढंग से किसी भी सरकारी अधिकारी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने की असीमित शक्ति प्रदान करता है।

सत्ता की विडंबना

पूर्व राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पीटर रोना ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह स्थिति अत्यंत विडंबनापूर्ण है कि फिदेस पार्टी खुद अपने द्वारा स्थापित सत्ता के सिद्धांतों का शिकार हो गई है। 2011 में विक्टर ओरबान की सरकार द्वारा लिखे गए संविधान में 'विजेता सब कुछ ले जाता है' के सिद्धांत को शामिल किया गया था। साल 2010 से 2026 तक सत्ता में रहने के दौरान, फिदेस ने हंगरी की राज्य व्यवस्था को अपनी इच्छा के अनुसार बदल दिया था और अपने दो-तिहाई बहुमत का उपयोग करके स्वतंत्र मानी जाने वाली सरकारी संस्थाओं को अपने ही वफादारों से भर दिया था।

संवैधानिक सुधारों का असर

संसद में जब मतदान के परिणाम घोषित किए गए, तो तीसा पार्टी के 141 सांसदों ने खड़े होकर तालियां बजाईं। 17वां संवैधानिक संशोधन वास्तव में कई कानूनों का एक पैकेज है, जिसका उद्देश्य अगले दो या तीन वर्षों में नए संविधान को अपनाए जाने तक देश का मार्गदर्शन करना है। इस पैकेज में 70 वर्ष से अधिक आयु के संवैधानिक न्यायालय के न्यायाधीशों को पद से हटाना और ऐसे सांसदों को दोबारा चुनाव लड़ने से रोकना शामिल है, जिन्होंने संसद में तीन कार्यकाल पूरे कर लिए हैं। यह नियम वर्तमान में फिदेस पार्टी के आधे से अधिक सांसदों पर लागू होता है।

अधिकारों पर बहस

पूर्व सुप्रीम कोर्ट प्रमुख अंद्रास बाका ने राष्ट्रपति को हटाने के फैसले का समर्थन किया है। उनका तर्क है कि 1989 से 2010 तक हंगरी कानून के शासन के तहत संचालित होता था, लेकिन उसके बाद फिदेस ने राज्य के संस्थानों पर कब्जा कर एक सत्तावादी राज्य का निर्माण किया। अंद्रास बाका ने कहा कि इस तरह के जटिल सत्तावादी शासन को तोड़ना बहुत मुश्किल है, जिसे चुनाव में हार के बाद भी जीवित रहने के लिए डिजाइन किया गया था। हालांकि, अंद्रास बाका ने इस पैकेज के उस हिस्से पर असहमति जताई है, जो सांसदों के दोबारा चुनाव लड़ने पर रोक लगाता है। उनका मानना है कि यह जनता के उस अधिकार को सीमित करता है कि वे जिसे चाहें उसे चुन सकें।

फिदेस पार्टी की कमजोर स्थिति

अप्रैल के चुनाव में मिली हार के बाद से विक्टर ओरबान की पार्टी फिदेस लगातार पतन की ओर है और पार्टी गहरे झटके से जूझ रही है। विक्टर ओरबान खुद चुनाव के बाद से सार्वजनिक रूप से बहुत कम दिखाई दिए हैं और उन्होंने संसद में अपना पद लेने से भी इनकार कर दिया है। सोमवार को वह हंगरी छोड़कर अमेरिका में फुटबॉल विश्व कप का फाइनल देखने चले गए। फिदेस पार्टी के भीतर भी विक्टर ओरबान के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है और कई लोग उनकी अनुपस्थिति को लेकर भ्रमित हैं। पार्टी के नंबर दो नेता गेरगेली गुलियास ने सोमवार को संसदीय समूह के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे पार्टी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

सवाल-जवाब

हंगरी की संसद ने किसे पद से हटाने के लिए मतदान किया है?
संसद ने राष्ट्रपति तमाश सुलयोक को पद से हटाने के लिए मतदान किया है।
कौन सा संवैधानिक संशोधन पारित किया गया है?
तीसा पार्टी के बहुमत के साथ 17वां संवैधानिक संशोधन पारित किया गया है।
क्या तमाश सुलयोक के पास कोई विकल्प है?
तमाश सुलयोक के पास पांच दिन हैं, जिसमें वे संशोधन पर हस्ताक्षर कर सकते हैं या उसे संवैधानिक न्यायालय में भेज सकते हैं।
फिदेस पार्टी ने सदन का बहिष्कार क्यों किया?
फिदेस पार्टी ने आरोप लगाया कि नया संशोधन सरकार को अधिकारियों को बर्खास्त करने की असीमित और मनमानी शक्ति देता है।

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