साउथ चाइना सी से लेकर ताइवान के तटों तक, चीन की बढ़ती आक्रामक नीतियों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया है। फिलीपींस के बाद वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देश ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जो सीधे तौर पर चीन की दादागिरी के लिए एक बड़ी चुनौती है। ब्रह्मोस, जो अपनी बेजोड़ गति और मारक क्षमता के लिए जानी जाती है, ने वैश्विक स्तर पर अपनी साख बनाई है, जिसके चलते बीजिंग ने भारत और इंडोनेशिया के बीच हुए रक्षा समझौतों पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई थी। अब इसी फेहरिस्त में ताइवान (रिपब्लिक ऑफ चाइना) ने भी एक बड़ा रणनीतिक दांव खेला है, जिससे बीजिंग की मुश्किलें और बढ़ना तय है।
कोस्टल कॉम्बैट कमांड का गठन
ताइवान ने चीन के संभावित समुद्री हमलों और बढ़ते तनाव का जवाब देने के लिए अपनी तटवर्ती सुरक्षा को पूरी तरह से नया रूप दे दिया है। रिपब्लिक ऑफ चाइना नेवी (ROC Navy) ने आधिकारिक रूप से नए 'कोस्टल कॉम्बैट कमांड' का गठन किया है। इस नए कमांड का प्राथमिक उद्देश्य तटीय इलाकों की सुरक्षा को अभेद्य बनाना, एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम को आपस में एकीकृत करना और चीनी नौसेना की गतिविधियों का मुंहतोड़ जवाब देना है। इस ढांचे में फिलहाल 'हैफेंग ब्रिगेड' को शामिल किया गया है, जिसके पास मोबाइल और फिक्स्ड एंटी-शिप मिसाइल प्लेटफॉर्म मौजूद हैं। इसके अलावा, नेवल वैनगार्ड फ्लोटिला, मैरीटाइम सर्विलांस कमांड और 131वें नेवल फ्लीट के तहत आने वाले कुआंग हुआ-6 मिसाइल बोट स्क्वाड्रन को भी इस कमांड के तहत एकीकृत किया गया है।
हार्पून मिसाइलों की भूमिका
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस नए सैन्य ढांचे में मरीन कॉर्प्स की एयर डिफेंस गार्ड बटालियन को भी जोड़ा गया है, जो मोबाइल मिसाइल लॉन्चरों और रडार स्टेशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा 192वें नेवल फ्लीट के माइन-लेइंग स्क्वाड्रन को भी इस नेटवर्क का हिस्सा बनाया जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि बाकी है। ताइवान ने अमेरिका के साथ 100 लैंड बेस्ड हार्पून कोस्टल डिफेंस सिस्टम और 400 हार्पून मिसाइलों का बड़ा सौदा किया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रणालियों की तैनाती ताइवान की समुद्री प्रतिरक्षा में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। इन हार्पून मिसाइलों को ब्रह्मोस का 'छोटा भाई' माना जा रहा है, जो एंटी-एक्सेस और एरिया डिनायल (A2/AD) रणनीति का अहम हिस्सा होंगी।
डिलीवरी और तैनाती का शेड्यूल
हार्पून मिसाइल सिस्टम के मोबाइल लॉन्चरों की आपूर्ति इस साल फरवरी से शुरू हो चुकी है, जिसके प्रमाण के तौर पर रडार और कमांड यूनिट्स की तस्वीरें भी सामने आई थीं। हालांकि, पूरे सौदे को लेकर बजट संबंधी चर्चाएं भी ताइपे की संसद में हुई थीं, जहां सांसदों ने इसे लेकर कुछ सवाल भी उठाए। तय कार्यक्रम के मुताबिक, कुल 32 हार्पून सिस्टम 2026 के अंत तक और शेष 68 सिस्टम 2027 के दौरान चरणबद्ध तरीके से ताइवान को सौंपे जाएंगे। ताइवान को मिलने वाली ये मिसाइलें RGM-84L-4 Block II (U) वेरिएंट की होंगी, जो आधुनिक गाइडेंस और बेहतर सटीकता से लैस हैं।
रणनीतिक संतुलन और अमेरिका का सहयोग
हार्पून मिसाइलों की तैनाती के अलावा, अमेरिका लगातार ताइवान को HIMARS रॉकेट सिस्टम, ATACMS बैलिस्टिक मिसाइलें और लोइटरिंग म्यूनिशंस जैसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध करा रहा है। वाइस एडमिरल चिएन शिह-युआन को इस कोस्टल कॉम्बैट कमांड का पहला प्रमुख नियुक्त किया गया है, जो पूर्व में चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्य कर चुके हैं। यद्यपि यह कमांड अभी पूरी तरह से औपचारिक रूप में स्थापित नहीं हुआ है, लेकिन इसकी संगठनात्मक संरचना ने काम करना शुरू कर दिया है। ताइवान का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि वह चीनी नौसेना को अपने तटों से दूर रखने के लिए अपनी मारक क्षमता को हर संभव मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।











