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शिक्षा संस्थानों की तैयारी पर उठा सवाल, कार्यस्थल पर AI के बढ़ते असर से निपटने में पिछड़े विश्वविद्यालयएआई
8 जुल॰ 2026, 2:32 am (113 दिन पहले)· 3

शिक्षा संस्थानों की तैयारी पर उठा सवाल, कार्यस्थल पर AI के बढ़ते असर से निपटने में पिछड़े विश्वविद्यालय

हालिया शोध के अनुसार, विश्वविद्यालयों को अब छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युग के लिए तैयार करने हेतु अपने शिक्षण और मूल्यांकन के तरीके पूरी तरह बदलने की जरूरत है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जिस तरह से बड़ी कंपनियों के काम करने के तरीके को बदल रहा है, उसे देखते हुए विश्वविद्यालयों को अपने पाठ्यक्रम पर पुनर्विचार करने की सख्त आवश्यकता है। फ्रंटियर्स इन एजुकेशन में प्रकाशित एक नए अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है कि उच्च शिक्षण संस्थान छात्रों को उस कार्यस्थल के लिए तैयार करने में विफल हो रहे हैं जहां AI का बोलबाला होगा।

मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के ग्लोबल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के डॉक्टर केलेची एकुमा के अनुसार, जब तक शिक्षण पद्धति में बड़े बदलाव नहीं होंगे, तब तक छात्रों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में मुश्किल होगी। वर्ष 2022 में ChatGPT के आने के बाद से, विश्वविद्यालयों का मुख्य ध्यान सिर्फ AI के इस्तेमाल से होने वाली धोखाधड़ी और साहित्यिक चोरी को पकड़ने पर रहा है। शोध में कहा गया है कि यह दृष्टिकोण संकुचित है, क्योंकि यह उस कौशल को पूरी तरह नजरअंदाज करता है जिसकी जरूरत छात्रों को कार्यस्थल पर AI के साथ प्रतिस्पर्धा करते समय पड़ेगी।

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AI की व्यापक पहुंच और चुनौतियां

डॉक्टर केलेची एकुमा ने स्पष्ट किया कि AI और ऑटोमेशन अब उन सभी क्षेत्रों में घुस चुके हैं जो विकास और शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें सार्वजनिक प्रशासन, कल्याणकारी योजनाओं का लक्ष्य निर्धारण, कृषि, वित्त, स्वास्थ्य, पहचान प्रणालियों का प्रबंधन, मानवीय सहायता और श्रम प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं। इन क्षेत्रों में काम करने के तौर-तरीके पूरी तरह बदल रहे हैं, लेकिन उच्च शिक्षा का ढांचा अभी भी काफी हद तक पारंपरिक बना हुआ है।

क्रिटिकल AI लिटरेसी की जरूरत

अध्ययन में सिफारिश की गई है कि विश्वविद्यालयों को AI को केवल एक शैक्षणिक अखंडता या नकल के मुद्दे के रूप में नहीं देखना चाहिए। इसके बजाय, छात्रों को 'क्रिटिकल AI लिटरेसी' सिखानी चाहिए। इसका अर्थ है कि छात्रों को न केवल यह समझना होगा कि AI कैसे काम करता है और इसकी कमियां क्या हैं, बल्कि उन्हें जटिल स्थितियों में निर्णय लेना, नैतिक परिणामों का आकलन करना और तकनीकी बदलावों के साथ तेजी से तालमेल बिठाना भी सीखना होगा।

शोध के अनुसार, AI केवल शिक्षा प्रणाली में शामिल की गई एक नई तकनीक नहीं है, बल्कि यह उन शैक्षणिक और पेशेवर परिस्थितियों को फिर से गढ़ रहा है जिसमें विकास संबंधी अध्ययन किए जाते हैं। अध्ययन में उन जोखिमों को भी उजागर किया गया है जो AI अपनाने से उत्पन्न हो रहे हैं। इनमें तकनीकी त्रुटियां, डेटा में पक्षपात, AI पर अत्यधिक निर्भरता, संसाधनों तक असमान पहुंच और इन प्रणालियों को विकसित करने वाली प्रमुख टेक कंपनियों का बढ़ता प्रभाव शामिल है।

पाठ्यक्रम को कैसे बदला जाए?

डॉक्टर केलेची एकुमा का मानना है कि विश्वविद्यालयों को उन कौशलों को प्राथमिकता देनी चाहिए जिनकी नकल करना AI के लिए कठिन है। इसमें आलोचनात्मक सोच, नैतिक निर्णय लेने की क्षमता, संचार कौशल और जटिल सामाजिक मुद्दों की गहरी समझ शामिल है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर मॉड्यूल को AI आधारित बना दिया जाए, बल्कि मौजूदा विषयों में यह देखना आवश्यक है कि AI उन मुद्दों को कैसे नया रूप दे रहा है जिन्हें पहले से पढ़ाया जा रहा है।

यह समय शिक्षण संस्थानों के लिए बदलाव का है। अमेरिका के श्रम विभाग ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए एक AI अप्रेंटिसशिप पोर्टल शुरू किया है, जिसका लक्ष्य शिक्षा, वित्त, स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण का विस्तार करना है। इसी तरह की पहल करते हुए गूगल की परोपकारी शाखा ने सनडांस इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर 20 लाख डॉलर की योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य 10,000 से अधिक कलाकारों को AI उपकरणों का प्रशिक्षण देना है।

राजनीतिक स्तर पर भी इसे लेकर सक्रियता बढ़ी है। अप्रैल में डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें व्हाइट हाउस में AI शिक्षा टास्क फोर्स के गठन का निर्देश दिया गया ताकि छात्रों और शिक्षकों के लिए कार्यक्रमों का विस्तार हो सके। उसी महीने, मिसिसिपी कॉलेज स्कूल ऑफ लॉ ने प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए AI संबंधी कोर्स अनिवार्य कर दिया, ताकि वे तकनीक को समझ सकें और उसके परिणामों की सटीकता की जांच करना सीख सकें।

सवाल-जवाब

विश्वविद्यालयों को AI के प्रति अपना दृष्टिकोण क्यों बदलना चाहिए?
शोध के अनुसार, विश्वविद्यालय वर्तमान में AI को सिर्फ धोखाधड़ी और नकल के मुद्दे के रूप में देख रहे हैं, जबकि उन्हें इसे कार्यस्थल की एक अनिवार्य वास्तविकता मानकर छात्रों को उस प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना चाहिए।
डॉक्टर केलेची एकुमा ने कौन सा नया शब्द इस्तेमाल किया है?
उन्होंने छात्रों के लिए 'क्रिटिकल AI लिटरेसी' के महत्व पर जोर दिया है, जिसका अर्थ है तकनीक की समझ, निर्णय लेने की क्षमता और नैतिक परिणामों का आकलन करना।
AI को अपनाने से जुड़े प्रमुख जोखिम क्या बताए गए हैं?
अध्ययन में तकनीकी त्रुटियां, एल्गोरिदम में पक्षपात (bias), AI पर अत्यधिक निर्भरता, संसाधनों तक असमान पहुंच और बड़ी टेक कंपनियों का बढ़ता प्रभाव मुख्य जोखिम के रूप में गिनाए गए हैं।
क्या हर विषय को AI आधारित बनाना जरूरी है?
नहीं, शोध के अनुसार हर मॉड्यूल को AI मॉड्यूल बनाने की जरूरत नहीं है, बल्कि मौजूदा विषयों को इस तरह से फिर से डिजाइन करना चाहिए जिससे यह पता चले कि AI उन विषयों को कैसे बदल रहा है।
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