वैदिक पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष शनि कुल 138 दिनों के लिए वक्री अवस्था में यानी उलटी चाल चल रहे हैं। शनि की इस वक्री गति का प्रभाव सभी बारह राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिल रहा है। पंचांग की गणना के मुताबिक, आगामी 44 दिनों की अवधि बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है क्योंकि इस दौरान शनि की चाल विशेष रूप से प्रभावी रहेगी। खगोल और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से शनि का अगला वक्री गोचर अब सीधे साल 2027 के अगस्त महीने में होगा, जिसके कारण इस मौजूदा वक्री कालखंड का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
किन राशियों पर रहेगा प्रभाव और क्या हैं उपाय
शनि की इस उलटी चाल के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए कुल 6 राशियों के जातकों को विशेष रूप से सतर्क और सावधान रहने की आवश्यकता बताई गई है। इस समयावधि में किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कुछ सरल और प्रभावी उपाय भी सुझाए गए हैं। इन उपायों को नियमित रूप से करने से शनि के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है और जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
प्रमुख ज्योतिषीय उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि के दुष्प्रभावों से बचने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष धार्मिक अनुष्ठान और उपाय करने का विधान है। इन उपायों को अपनी दैनिकचर्या में शामिल करके जातक लाभ उठा सकते हैं
- सरसों के तेल का दीपक: इस पूरी अवधि के दौरान नियमित रूप से या विशेष अवसरों पर शनि मंदिर जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के कष्ट दूर करते हैं।
- हनुमान चालीसा का पाठ: प्रत्येक शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी की पूजा करने से शनि के प्रकोप का भय समाप्त हो जाता है।
















