सैन डिएगो की पब्लिक रिलेशंस कंसलटेंट सियो अपनी सुबह की शुरुआत एक अनूठे तरीके से करती हैं। उनका निजी बॉट 'चैटियाना' उनके ईमेल न्यूज़लेटर्स की सुर्खियों से ज़रूरी मुद्दों को चुनता है, उनके दिनभर के एजेंडा और टू-डू लिस्ट को तैयार करता है और खबरों के सीधे लिंक उनके सामने पेश कर देता है। एक अंतर्मुखी पेशेवर के तौर पर सियो जूम कॉल्स के दौरान असहज सन्नाटे को तोड़ने और रोज़मर्रा की बातचीत शुरू करने के लिए इस एआई ब्रीफिंग का सहारा लेती हैं। सियो अकेली पाठक नहीं हैं जो खबरों को पढ़ने के लिए किसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाले टूल का उपयोग कर रही हैं। सूचना पाने की यह आदत इतनी तेजी से आम हो चुकी है कि डिजिटल मीडिया कंपनियों ने अब अपनी पूरी रणनीति ही पलट दी है। कई प्रकाशक अब ऐसी सामग्री लिख रहे हैं जिसका सीधा लक्षित पाठक कोई इंसान नहीं, बल्कि एआई एजेंट है।
मीडिया उद्योग में यह बदलाव ओपन वेब के कमजोर पड़ने और पारंपरिक सर्च इंजनों के सिमटने की वजह से आया है। पाठक अब किसी वेबसाइट के होमपेज पर जाने के बजाय चैटबॉट्स और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (एलएलएम) के जरिए अपनी पसंद के मुताबिक तैयार की गई सूचनाएं हासिल कर रहे हैं। एक्सियोस की चीफ रेवेन्यू ऑफिसर जैकलिन कैमरन का कहना है कि मीडिया का पूरा इकोसिस्टम तेजी से बदल रहा है। उनके मुताबिक सर्च का दायरा सिकुड़ रहा है, ओपन वेब की स्थिति बिगड़ रही है और हाइपरपर्सनलाइजेशन की मांग में भारी उछाल आया है। लोग किस तरह खबरें हासिल करते हैं, उसमें लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स अब केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं।
प्रकाशकों की रणनीति: लाइसेंसिंग समझौते से लेकर अदालती लड़ाई तक
इस नई तकनीकी लहर ने पूरी वैश्विक मीडिया बिरादरी को दो अलग-अलग खेमों में बांट दिया है। एक तरफ कॉन्डे नास्ट जैसी बड़ी पब्लिशिंग कंपनियों ने तकनीकी प्लेटफॉर्मों के साथ सीधे लाइसेंसिंग समझौते किए हैं, ताकि एआई सिस्टम कानूनी रूप से उनकी सामग्री को अपने जवाबों में दिखा सकें। इसके साथ ही प्रकाशक अब 'जेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन' यानी जीईओ की तकनीकों पर माथापच्ची कर रहे हैं, जिससे एआई प्रॉम्प्ट्स के उत्तर में उनके लेख प्रमुखता से दिखाई दें। पिछले साल वर्डप्रेस साइट्स के मशहूर एसईओ प्लग-इन एआईओएसईओ ने एलएलएम.टीएक्सटी (LLM.txt) फाइलों की सुविधा भी पेश की, जिससे एआई बॉट्स किसी वेबसाइट के पूरे कंटेंट को आसानी से समझ और व्यवस्थित कर सकें।
दूसरी तरफ कुछ प्रतिष्ठित संस्थान इस बदलाव का कड़ा अदालती विरोध कर रहे हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने साल 2023 में ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट पर कॉपीराइट उल्लंघन का बड़ा मुकदमा दायर किया था। अखबार का आरोप है कि तकनीकी कंपनियों ने अपने मॉडल्स को प्रशिक्षित करने के लिए उनकी खोजी पत्रकारिता और खबरों का अवैध रूप से इस्तेमाल किया। यह मुकदमा आज भी अदालत में चल रहा है। लेकिन इन दोनों रास्तों से अलग, एक्सियोस और एवरी जैसी कंपनियां एक बुनियादी बदलाव पर काम कर रही हैं, जहां लेखों का ढांचा ही बदल दिया गया है ताकि मशीनें उन्हें सीधे पढ़ सकें।
एक्सियोस डायरेक्ट: मशीनों के लिए ब्लूमबर्ग टर्मिनल जैसा डेटा
एक्सियोस का मानना है कि भविष्य में समाचारों की खपत का एक बहुत बड़ा हिस्सा एआई सिस्टम, एलएलएम और स्मार्ट डिवाइसेज के जरिए होगा। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार उनका लक्ष्य वहीं मौजूद रहना है जहां पाठक समय बिता रहे हैं। इसी सोच के तहत कंपनी ने 'एक्सियोस डायरेक्ट' नाम से विशेष डेटा फीड्स तैयार की हैं। ये फीड्स किसी आम इंसान के पढ़ने लायक सुंदर डिजाइन वाली वेबसाइट जैसी नहीं दिखतीं, बल्कि पुराने आरएसएस फीड्स की तरह केवल संरचित टेक्स्ट लाइनों के रूप में दिखाई देती हैं। इसका मकसद किसी कहानी को भावुक अंदाज में पेश करने के बजाय मशीनों को त्वरित और सटीक डेटा सौंपना है, बिल्कुल वैसे ही जैसे वित्तीय बाज़ार में ब्लूमबर्ग टर्मिनल काम करता है।
एक्सियोस ने अपनी पहली दो फीड्स सीधे तौर पर कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए तैयार की हैं। इनमें से पहली फीड इसी पतझड़ में शुरू की गई है, जो एक्सियोस प्रो डील्स के कॉर्पोरेट सब्सक्राइबर्स के एआई एजेंट्स को विलय और अधिग्रहण (एम एंड ए) से जुड़ी ताजातरीन सामग्री पढ़ने की सीधी सुविधा देती है। कॉर्पोरेट कंपनियां ऐसे प्रयोगों के लिए बजट खर्च करने में हिचकिचाती नहीं हैं, क्योंकि थोड़ी सी भी व्यावसायिक बढ़त उनके लिए लाखों डॉलर का मुनाफा ला सकती है। दूसरी फीड अगले साल शुरू होगी, जो कंपनियों के अपने इन-हाउस लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स को प्रशिक्षित करने के लिए डेटा स्रोत का काम करेगी। इसके बाद कंपनी एक तीसरी फीड पर काम करने की योजना बना रही है, जो सीधे आम उपभोक्ताओं के लिए होगी ताकि उनके निजी एजेंट्स एक्सियोस की खबरों को सीधे हासिल कर सकें।
एवरी का 'एक्सटेंडेबल' मॉडल: एआई को पाठक का विस्तार बनाना
एक्सियोस जहां एआई के लिए अपनी सामग्री को छोटा और डेटा-केंद्रित बना रहा है, वहीं छह साल पुराना टेक मीडिया स्टार्टअप एवरी बिल्कुल अलग दिशा में आगे बढ़ रहा है। लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन सहित कई निवेशकों से पिछले साल 20 लाख डॉलर (2 मिलियन डॉलर) की फंडिंग जुटाने वाली इस कंपनी का मानना है कि पाठक एआई को अपने दिमाग के एक विस्तार की तरह इस्तेमाल करते हैं। एवरी के संस्थापक डैन शिपर बताते हैं कि उनके पत्रकार अपने लेखों में बीच-बीच में ऐसे प्रॉम्प्ट्स शामिल करते हैं जिन्हें पाठक सीधे कॉपी करके किसी भी एआई चैटबॉट में पेस्ट कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब किसी नए मॉडल पर रिपोर्ट लिखी जाती है, तो उसमें यह जांचने के प्रॉम्प्ट्स दिए जाते हैं कि वह मॉडल सवालों के जवाब कैसे देता है।
इसके अलावा एवरी की गाइड्स में 'रीड विद क्लॉड' और 'रीड विद चैटजीपीटी' जैसे बटन दिए जाते हैं। इन बटनों पर क्लिक करते ही एक प्रॉम्प्ट खुल जाता है जो एआई को निर्देश देता है कि वह पहले एक पैराग्राफ का बुलेट-पॉइंटेड संक्षिप्त विवरण तैयार करे और फिर पाठक के पूछने पर गहराई में जाए। दो साल पहले एवरी ने अपना पहला 'एक्सटेंडेबल' आर्टिकल पेश किया था। इसमें एक लंबी फीचर रिपोर्ट के साथ पूरे इंटरव्यू की रिकॉर्डिंग्स, संबंधित खबरें और यूट्यूब वीडियो का एक पूरा डेटाबेस जोड़ दिया गया था। पाठक चैटबॉट से सवाल पूछकर उस डेटाबेस से कोई भी बारीकी तुरंत निकाल सकते थे।
हाल ही में एवरी ने कोडेक्स पर 8,000 शब्दों का एक विस्तृत लेख प्रकाशित किया है, जिसे सब्सक्राइबर्स के एजेंट्स अपनी मर्जी के किसी भी रूप में ढाल सकते हैं। डेटाबेस का इस्तेमाल करके कोई पाठक बुलेट बिंदुओं में सारांश मांग सकता है, कोई दूसरा व्यक्ति पूरे विषय को एक पॉडकास्ट की शक्ल दे सकता है, तो कोई तीसरा इंटरव्यू के चुनिंदा हिस्सों की एक छोटी फिल्म तैयार करवा सकता है। डैन शिपर का कहना है कि एक लेखक के तौर पर पहले पत्रकारों को यह चुनना पड़ता था कि कहानी में क्या शामिल किया जाए और क्या छोड़ा जाए। लेकिन एआई एजेंट्स के आने के बाद पत्रकारों को यह तय करने की ज़रूरत नहीं रह गई है, क्योंकि अब पाठक और उनके बॉट्स अपनी सुविधा के अनुसार जानकारी का आकार तय करते हैं। उनका मानना है कि लोग इस तकनीक के साथ बेहद अनोखे प्रयोग करने वाले हैं।
सटीक विश्लेषण और प्रीमियम सब्सक्रिप्शन की आर्थिक चुनौतियां
एआई एजेंट्स के लिए सामग्री प्रकाशित करने का यह पूरा बाज़ार अभी बिल्कुल शुरुआती दौर में है। कोपेनहेगन विश्वविद्यालय में संचार के प्रोफेसर रासमस क्लीस नील्सन का कहना है कि एजेंट्स के लिए पब्लिशिंग का यह बाज़ार अभी उभर रहा है, लेकिन यह बेहद अपरिपक्व और पूरी तरह असमान है। सबसे बड़े सवाल इसकी कीमतों और भविष्य में सामग्री के साथ एआई एजेंट्स के जुड़ने के तौर-तरीकों को लेकर बने हुए हैं।
एक्सियोस की मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) एलिसन मर्फी और चीफ रेवेन्यू ऑफिसर जैकलिन कैमरन इस बदलाव को लेकर पूरी तरह आशान्वित हैं। अधिकारियों के मुताबिक एक्सियोस की संक्षिप्त और स्पष्ट लेखन शैली एआई वेब क्रॉलर्स की पसंदीदा बन चुकी है। एलिसन मर्फी बताती हैं कि वेब क्रॉलर्स के लिए समय ही पैसा है, वे मुख्य बात तक पहुंचने के लिए पेज के तीन-चौथाई हिस्से तक नीचे नहीं जाना चाहते, जिसका फायदा एक्सियोस को सीधे मिल रहा है। हालांकि, सवाल यह भी है कि क्या केवल वेब ट्रैफिक न आने पर भी कंपनियों की कमाई बढ़ेगी? प्रोफेसर नील्सन का मानना है कि भले ही पाठक सीधे वेबसाइट पर न आएं, लेकिन ब्रांड की पहचान बने रहना अपने आप में एक सकारात्मक पहलू है, ठीक वैसे ही जैसे टिकटॉक या इंस्टाग्राम पर पब्लिशर्स के वीडियो लोगों को उनकी मूल वेबसाइट तक नहीं लाते पर ब्रांड वैल्यू बढ़ाते हैं।
मौजूदा समय में मीडिया उद्योग सबसे ज्यादा इस बात से जूझ रहा है कि जब चैटबॉट्स थाली में सजाकर मुफ्त उत्तर दे रहे हैं, तो सामग्री से पैसे कैसे कमाए जाएं। पाठक अब केवल उसी अनूठी जानकारी के लिए पैसे चुकाना चाहते हैं जो आम सर्च या लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स के पास मौजूद नहीं है। एवरी के मामले में यह एआई के इस्तेमाल की बेहद सूक्ष्म तकनीकी इनसाइट्स हैं, जबकि एक्सियोस प्रो डील्स के लिए यह बाज़ार को हिला देने वाली त्वरित खबरें हैं। एक्सियोस प्रो डील्स का सालाना ऑल-एक्सेस सब्सक्रिप्शन 2,499 डॉलर का है, जबकि एवरी की वार्षिक सदस्यता 288 डॉलर में मिलती है।
डैन शिपर इस 288 डॉलर की सालाना फीस को केवल एक इंसान की नहीं, बल्कि उसके एआई एजेंट की साझा सदस्यता मानते हैं। उनका कहना है कि भले ही कोई व्यक्ति हर महीने उनकी लिखी हर बात न पढ़े, लेकिन उसका एआई एजेंट उस सामग्री को स्कैन करके यह बता सकता है कि उसके लिए कौन सी खबर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। एलिसन मर्फी का मानना है कि इस पूरे बदलाव की शुरुआत इस हकीकत को स्वीकार करने से होती है कि लोग अब खबरें पढ़ने के लिए एआई का सहारा ले रहे हैं। उनका कहना है कि मीडिया जगत में यह बदलाव पहली बार नहीं आया है, इससे पहले भी लोगों ने सोशल मीडिया, शॉर्ट वीडियो और पॉडकास्ट के जरिए सूचनाएं लेना शुरू किया था। उनके अनुसार असली बात यह नहीं है कि एआई पाठक बन गया है, बल्कि एआई एक ऐसा माध्यम है जो मीडिया को अपने असली पाठकों तक पहुंचने में मदद कर रहा है।















