बरसात और हवा में नमी बढ़ने के साथ ही पशुपालकों के सामने मवेशियों को मक्खी, मच्छर और चिचड़ियों जैसे परजीवियों से सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है। इन कीटों के लगातार काटने से पशु दिन भर बेचैन और तनाव में रहते हैं, जिसका सीधा असर उनके दूध उत्पादन क्षमता पर पड़ता है। इतना ही नहीं, परजीवियों का हमला पशुओं में त्वचा के कई तरह के गंभीर संक्रमण (स्किन इन्फेक्शन) का कारण भी बन सकता है। अक्सर लोग इनसे राहत पाने के लिए बाजार में मिलने वाले रासायनिक कीटनाशक स्प्रे का सहारा लेते हैं। हालांकि यह केमिकल वाले उत्पाद काफी महंगे होते हैं और इनका छिड़काव पशुओं की त्वचा तथा समग्र स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इस समस्या के स्थाई और सुरक्षित समाधान के रूप में कृषि और पशुपालन विशेषज्ञों ने 100% प्राकृतिक और आयुर्वेदिक घरेलू उपाय अपनाने की सलाह दी है। यह देसी स्प्रे बिना किसी दुष्प्रभाव के कीटों को तुरंत दूर भगाता है और पशुओं की त्वचा को भी स्वस्थ रखता है।
देसी स्प्रे तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्री
इस बेहद असरदार और पूरी तरह से सुरक्षित प्राकृतिक स्प्रे को बनाने के लिए घर पर आसानी से उपलब्ध होने वाली चीजों की आवश्यकता होती है। इसे तैयार करने के लिए 100 से 200 ग्राम ताजे नीम के पत्ते ले लें। इसके साथ ही 10 से 20 ग्राम पिसा हुआ कपूर, 100 से 200 मिलीलीटर ताजा नींबू का रस और 1 लीटर साफ पानी की आवश्यकता होगी। इन सभी चीजों में पाए जाने वाले औषधीय गुण मिलकर कीटों के खिलाफ एक मजबूत रक्षा कवच तैयार करते हैं।
घोल बनाने की आसान विधि और छिड़काव के नियम
इस आयुर्वेदिक स्प्रे को बनाने की प्रक्रिया बहुत सरल है। सबसे पहले एक बर्तन में 1 लीटर पानी लेकर उसमें 100 से 200 ग्राम ताजे नीम के पत्ते डालें। इस मिश्रण को धीमी आंच पर तब तक उबालें जब तक कि पानी घटकर आधा यानी आधा लीटर न रह जाए और उसका रंग गहरा हरा न हो जाए। इसके बाद पानी को आंच से उतारकर पूरी तरह ठंडा होने दें और फिर किसी साफ कपड़े या छलनी से छान लें। अब इस छने हुए नीम के पानी में 10 से 20 ग्राम पिसा हुआ कपूर और 100 से 200 मिलीलीटर नींबू का रस मिलाएं। इस मिश्रण को अच्छी तरह घोलने के बाद एक स्प्रे बोतल में भर लें।
इस तैयार घोल का इस्तेमाल करते समय कुछ जरूरी सावधानियों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। इस स्प्रे का छिड़काव हमेशा सुबह या शाम के समय, जब तापमान ठंडा हो, तभी पशुओं के शरीर पर करें। तेज धूप या कड़कड़ाती गर्मी के दौरान इसका छिड़काव करने से बचें। छिड़काव करते वक्त इस बात का विशेष ध्यान रखें कि घोल पशुओं की आंखों, नाक या मुंह के अंदर न जाए। सही तरीके से किया गया छिड़काव पशुओं को कीटों के प्रकोप से तुरंत राहत दिलाता है।
नीम और मदार की धूनी से कीट भगाने का तरीका
स्प्रे के अलावा शाम के समय पशुओं के बाड़े को मक्खी और मच्छरों से मुक्त रखने के लिए पारंपरिक धूनी का तरीका भी बेहद असरदार साबित होता है। शाम ढलते ही बाड़े से थोड़ी सुरक्षित दूरी पर नीम की सूखी पत्तियां या लकड़ियां जलाकर धुआं पैदा करें। नीम के धुएं में मौजूद कड़वापन और प्राकृतिक तत्व मच्छरों तथा मक्खियों को तुरंत बाड़े से बाहर भागने पर मजबूर कर देते हैं। इस प्राकृतिक धुएं से पशुओं को सांस लेने में कोई परेशानी नहीं होती और पूरा बाड़ा कीटों से मुक्त हो जाता है।
पशुओं के रहने की जगह और बाड़े की सफाई
कीटों को पनपने से रोकने के लिए बाड़े की नियमित सफाई रखना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। पशुओं के बैठने और खड़े होने वाले स्थान पर कभी भी गंदा पानी या कीचड़ जमा न होने दें। जलभराव वाले स्थानों और नालियों के आसपास नियमित रूप से प्राकृतिक कीटनाशक या फिनाइल का छिड़काव करते रहें ताकि मच्छरों के लावे को नष्ट किया जा सके। इसके साथ ही मवेशियों को पीने के लिए हमेशा साफ और ताजा पानी ही उपलब्ध कराएं, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे और वे स्वस्थ रहें।


















