ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल का विशेष महत्व माना जाता है और समय-समय पर ग्रहों का राशि परिवर्तन सभी बारह राशियों के जीवन को किसी न किसी रूप में प्रभावित करता है। इसी क्रम में अब सूर्य देव सिंह राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं, जो उनकी अपनी स्वराशि है। खास बात यह है कि इस राशि में पापी ग्रह माने जाने वाले केतु पहले से ही विराजमान हैं। जब सूर्य और केतु एक ही राशि में आएंगे, तब इन दोनों ग्रहों की युति का निर्माण होगा। सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है, जो हमारे भीतर के आत्मविश्वास, सरकारी लाभ, मान-सम्मान और उच्च पद के कारक माने जाते हैं। इसके विपरीत केतु को मोक्ष, आध्यात्मिकता और वैराग्य का कारक माना जाता है। जब ये दोनों विपरीत स्वभाव वाले ग्रह एक साथ एक ही स्थान पर मिलेंगे, तो इसके परिणाम भी मिश्रित और कुछ राशियों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। इस गोचर के प्रभाव से कई राशियों के जातकों को जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में शुभ फल मिलेंगे, तो वहीं कुछ खास राशियों के लिए यह समय मुसीबतों और परेशानियों का पहाड़ लेकर आ सकता है।
वैदिक ज्योतिष के नियमों के अनुसार यदि किसी जातक की कुंडली के लग्न में केतु स्थित हो, तो अठारवें भाव का स्वामी भी केतु ही बनता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार केतु का सीधा संबंध विघ्नहर्ता भगवान गणेश से जोड़ा गया है। इसके अलावा केतु को साधना, मुक्ति, आध्यात्मिक गहराई और पिछले जन्मों के संचित कर्मों का प्रतिनिधित्व करने वाला ग्रह माना जाता है। यदि किसी जातक की कुंडली में केतु नकारात्मक स्थिति में हो या पीड़ित हो, तो वह जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याओं का कारण बनता है। ऐसा ज्योतिषीय जानकारों का मानना है कि केतु जिस भी भाव या ग्रह के साथ बैठता है, उसकी शक्तियों और प्रभावों को कई गुना बढ़ा देता है। इसके माध्यम से ही व्यक्ति को अपने पूर्व जन्म के रहस्यों का आभास होता है। जब किसी व्यक्ति का केतु खराब चल रहा होता है, तो उसके शरीर और मन पर इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगते हैं। पीड़ित केतु के प्रभाव से मनुष्य की पर्सनालिटी डरी हुई सी महसूस होने लगती है, शरीर की ऊर्जा का स्तर बेहद कम हो जाता है, और कई बार व्यक्ति का साफ-सफाई से या रोज स्नान करने से भी मन उचटने लगता है। इसके अलावा कमजोर या अशुभ केतु के कारण नींद के दौरान डरावने और बुरे सपने भी आ सकते हैं। जिन लोगों का केतु नकारात्मक प्रभाव देता है, वे अक्सर बिना किसी स्पष्ट वजह के उदास और मायूस रहते हैं। ऐसी स्थिति से उबरने के लिए यदि कोई व्यक्ति हर दिन नियमित रूप से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करता है, तो केतु के नकारात्मक प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं और उसके सकारात्मक परिणाम जीवन में मिलने लगते हैं।
सूर्य और केतु की इस युति तथा ग्रहों की चाल के कारण कुछ विशेष राशियों के जातकों को इस अवधि के दौरान खास तौर पर सतर्क रहने की आवश्यकता है। सबसे पहले बात करते हैं मिथुन राशि के जातकों की, जिनके लिए यह समय पेशेवर जीवन में कई तरह की अड़चनें और व्यापार में भारी मंदी या गिरावट लेकर आ सकता है। यदि आप नौकरीपेशा हैं तो ऑफिस के कामकाज में किसी भी प्रकार का फैसला जल्दबाजी में लेने से बचना चाहिए, अन्यथा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा कार्यस्थल पर किसी भी तरह के वाद-विवाद या उलझन में पड़ने से खुद को दूर रखें, क्योंकि जरा सी लापरवाही आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकती है। धैर्य से काम लेना ही इस समय आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प होगा।
कन्या राशि के जातकों के लिए भी यह गोचर आसान नहीं रहने वाला है। इस अवधि के दौरान कन्या राशि के लोगों की आर्थिक स्थिति काफी डावांडोल हो सकती है, जिससे धन से जुड़ी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। आपको सलाह दी जाती है कि किसी भी तरह के विवादित मामलों में बिल्कुल न पड़ें और उनसे पूरी तरह दूर रहें। अपने धन से जुड़े मामलों और फैसलों पर बहुत बारीकी से ध्यान देने की जरूरत है। इस दौरान आपको केवल अपने काम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और दूसरों के मामलों में दखल देने या किसी से उलझने से बचना चाहिए, वरना आपका ही नुकसान तय है।
मीन राशि के जातकों को सूर्य और केतु की इस युति के प्रभाव काल में अपनी सेहत का विशेष रूप से ध्यान रखने की सख्त जरूरत है। इस दौरान छोटी-सी लापरवाही भी आपके स्वास्थ्य को बिगाड़ सकती है। यदि आप किसी यात्रा पर जा रहे हैं, तो रास्ते में अपनी सेहत के साथ-साथ अपने जरूरी कागजात और दस्तावेजों का बहुत अधिक ध्यान रखें, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी या कीमती सामान के खोने से बचा जा सके। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को नजरअंदाज बिल्कुल न करें और समय पर चिकित्सीय सलाह लें।


















