नई दिल्ली स्थित नौसेना भवन में आयोजित नौसेना कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और रणनीतिक तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों के बीच ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के कदमों पर शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने गहन विचार-विमर्श किया।
ऊर्जा आपूर्ति और परिचालन तत्परता की समीक्षा
सम्मेलन में भारतीय नौसेना के शीर्ष अधिकारियों ने महत्वपूर्ण व्यापारिक गलियारों और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की निरंतर निगरानी पर बल दिया। संकटग्रस्त समुद्री क्षेत्रों में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा तथा रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए संचालित अभियानों के प्रभाव का मूल्यांकन किया गया। समुद्री व्यापार की सुरक्षा के उद्देश्य से जारी 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा' के अंतर्गत नौसेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और उच्च पेशेवर मानकों की विशेष रूप से सराहना की गई।
राजनाथ सिंह का संबोधन
सम्मेलन को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के समुद्री हितों की सुरक्षा में नौसेना की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने समुद्री मार्गों की निरंतर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नौसैनिकों के समर्पण की प्रशंसा की। राजनाथ सिंह ने X पर लिखा कि मौजूदा अभियान ने ऊर्जा आपूर्ति लाइनों की सुरक्षा के लिए नौसेना की परिचालन तत्परता को सिद्ध किया है।
नई समुद्री रणनीति और आधुनिक तकनीक
इस सम्मेलन के दौरान एक व्यापक समुद्री सुरक्षा रणनीति का अनावरण किया गया, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटना है। रणनीतिक ढांचे को सशक्त करने के साथ-साथ भविष्य के युद्धक्षेत्र में आधुनिक तकनीकों, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के एकीकरण के लिए एक स्पष्ट रूपरेखा तय की गई। स्वदेशी क्षमताओं के विस्तार और बल के आधुनिकीकरण को आने वाले वर्षों के मुख्य लक्ष्यों में शामिल किया गया।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर नागरिकों ने इस उच्चस्तरीय बैठक पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने देश की समुद्री सुरक्षा और त्वरित नौसैनिक अभियानों की सराहना की, जबकि कुछ उपयोगकर्ताओं ने स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजनाओं, जैसे एएमसीए (AMCA) को शीघ्र मंजूरी देने और लागू करने का आग्रह किया।


























