अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में कैनेडियन डॉलर पर एक बार फिर मंदी का दबाव गहराता दिख रहा है। हालिया गिरावट के बाद कैनेडियन डॉलर पर शुद्ध शॉर्ट पोजीशन में दोबारा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कैनेडियन डॉलर लगातार दबाव में रहा है, जिससे यूएसडी/सीएडी जोड़ी हाल के निचले स्तरों से 2.77 प्रतिशत की बढ़त हासिल करते हुए 1.414 के स्तर तक पहुंच गई। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई इस समय ओवरबॉट स्थिति दर्शा रहा है, जिससे बाजार में निकट अवधि के दौरान एक संक्षिप्त गिरावट या रिवर्सल की संभावना बनी हुई है। हालांकि राबोबैंक की एफएक्स रणनीति टीम का अनुमान है कि यह पुलबैक बेहद अल्पकालिक रहेगा और अंततः यूएसडी/सीएडी जोड़ी साल के अंत तक 1.41 से 1.42 के बीच एक सीमित दायरे में ही कारोबार करती नजर आएगी। लाइव मार्केट आंकड़ों में भी यह जोड़ी 1.42 के स्तर पर दर्ज की गई है, जो पिछले बंद स्तर 1.42 से 0.21 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है, जबकि इसका 14-दिवसीय आरएसआई 75 के ओवरबॉट स्तर पर बना हुआ है।
मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर का दबदबा और प्रमुख जोड़ियों की स्थिति
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती का असर अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी साफ देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मोर्चे पर, एयूडी/यूएसडी सप्ताह की शुरुआत में 0.7000 के अहम स्तर की रक्षा करने की कोशिश कर रहा है। मंगलवार को रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी आरबीए के नीतिगत फैसलों की घोषणा से ठीक पहले यह जोड़ी 4 अगस्त के बाद के अपने सबसे निचले स्तर के करीब कारोबार कर रही है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के करीब मजबूती बनी हुई है, जिसे कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से उपजे मुद्रास्फीति के खतरों और अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं से समर्थन मिल रहा है। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने सेफ-हेवन के रूप में अमेरिकी मुद्रा की मांग को मजबूत बनाए रखा है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव लगातार गहरा रहा है।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान का नीतिगत रुख
यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी में भी गिरावट पर खरीदारी देखने को मिली है, जिससे शुक्रवार की उस गिरावट की भरपाई आंशिक रूप से हो गई जो जापानी अधिकारियों द्वारा येन को सहारा देने के लिए संभावित हस्तक्षेप की अटकलों के कारण आई थी। हालांकि बैंक ऑफ जापान के नीतिगत मिनट्स के नरम रुख ने जापानी येन की बढ़त को सीमित कर दिया है। इसी दौरान अमेरिका और ईरान के गतिरोध से कच्चे तेल की कीमतों को मिल रहे समर्थन ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से हवा दी है, जिससे अक्टूबर में अमेरिकी फेड द्वारा दर वृद्धि के दांव और पुख्ता हुए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने यूएसडी/जेपीवाई को नए सिरे से गति प्रदान की और यह जोड़ी दोबारा 158.00 के स्तर की ओर बढ़ती नजर आई है। दोनों प्रमुख केंद्रीय बैंकों, फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान ने पिछले सप्ताह एक समान कदम उठाते हुए ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी, दोनों ही मुद्रास्फीति के खतरों से जूझ रहे हैं और दोनों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य के नीतिगत निर्णय आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे।
सोने और कमोडिटी बाजार में मंदी का रुख
बुलियन मार्केट में भी सप्ताह की शुरुआत दबाव के साथ हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना बिकवाली के दबाव में आकर लगभग 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में फिसल गया, जो स्तर पिछली बार अगस्त की शुरुआत में देखा गया था। एक तरफ नए सिरे से उभरी भू-राजनीतिक चिंताएं हैं, तो दूसरी तरफ मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने सोमवार को पीली धातु पर भारी दबाव बनाए रखा है। कमोडिटी के अन्य मोर्चों पर, ब्रिटेन में डीजल की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे व्यापक आर्थिक चिंताएं और बढ़ गई हैं। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं कुछ हद तक शांत हुई हैं, लेकिन बाजार अब इस बात का आकलन कर रहा है कि क्या फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक दर वृद्धि चक्र वास्तव में आवश्यक है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार और संस्थागत निवेश का प्रवाह
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में बिटकॉइन सोमवार को 82,800 डॉलर के नीचे कारोबार करता नजर आया। पिछले सप्ताह बिटकॉइन में 4 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई थी, लेकिन हालिया उच्च स्तरों के करीब आकर इस तेजी की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग अब भी बाजार को आधार दे रही है, जिसमें स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ में होने वाला निरंतर पूंजी प्रवाह प्रमुख प्रेरक बना हुआ है। तकनीकी बाजार में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़े ट्रेड का अगला रुख किस दिशा में होगा। कुल मिलाकर, वैश्विक वित्तीय बाजारों में केंद्रीय बैंकों की दर नीतियों, तेल की कीमतों और मजबूत डॉलर का संयुक्त असर विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है।
















