ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, सूर्य ग्रहण लगने से करीब 12 घंटे पहले सूतक काल प्रभावी हो जाता है, जो ग्रहण के पूरी तरह संपन्न होने तक जारी रहता है। इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, जिसके चलते देश में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। जिन क्षेत्रों में ग्रहण साफ तौर पर नजर आएगा, केवल वहीं पर नियमानुसार 12 घंटे पूर्व सूतक मान लिया जाएगा।
साल के दूसरे सूर्य ग्रहण की स्थिति और दृश्यता
इस वर्ष का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को एक पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में लगेगा। यह खगोलीय घटना उत्तर-पश्चिमी स्पेन के गलिशिया क्षेत्र से आरंभ होकर पूर्व दिशा में बालेयारिक द्वीप समूह तक अपनी यात्रा पूरी करेगी। इसके अतिरिक्त, यह अद्भुत नजारा ग्रीनलैंड और आइसलैंड के पश्चिमी छोर से भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। जिन देशों और क्षेत्रों में यह ग्रहण दिखाई देगा, केवल उन्हीं स्थानों पर ठीक 12 घंटे पहले सूतक काल का कड़ा नियम लागू हो जाएगा।
सूतक और ग्रहण के दौरान किन बातों का रखें ध्यान
धार्मिक परंपराओं और नियमों के अनुसार सूर्य ग्रहण के समय कई तरह की सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है ताकि नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सके। सूतक काल शुरू होने से पहले ही घर में रखे भोजन, खाने की अन्य सभी सामग्रियों और पीने के पानी में तुलसी की पवित्र पत्तियां जरूर डाल देनी चाहिए। इसके अलावा, सूतक काल के दौरान वृद्धजनों, गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों को छोड़कर बाकी सभी लोगों को खानपान से परहेज करना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानियां
ग्रहण काल के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इस अवधि में महिलाओं को चाकू, कैंची या किसी भी अन्य धारदार वस्तु से फल और सब्जियां आदि काटने से पूरी तरह बचना चाहिए। साथ ही, सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को सीधे तौर पर ग्रहण देखने से भी परहेज करना बेहद जरूरी बताया गया है। ग्रहण के शुरू होने से पहले गर्भवती महिलाओं पर, साथ ही अन्य जरूरी वस्तुओं और जीव-जंतुओं पर गेरू छिड़कने की परंपरा का भी पालन किया जाता है।
धार्मिक अनुष्ठान और दान-पुण्य के कार्य
ग्रहण के प्रभाव से बचने और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए धार्मिक उपायों का सहारा लिया जाता है। सूर्य ग्रहण लगने के दौरान भगवान हनुमान के पवित्र चालीसा का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, ग्रहण काल के पूरे समय के दौरान भगवान श्री कृष्ण के दिव्य नाम का निरंतर स्मरण करते रहना चाहिए। ग्रहण की अवधि पूरी होने और इसके समाप्त होने के बाद कायदे से स्नान आदि करके खुद को शुद्ध करना चाहिए तथा अपनी सामर्थ्य और यथाशक्ति के अनुसार जरूरतमंदों को दान देना चाहिए। ग्रहण काल के दौरान किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ करने या देवी-देवता की मूर्तियों व वस्तुओं को स्पर्श करने से भी बचना चाहिए।


















