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सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है सूतक काल, जानें क्या करें और क्या न करेंराशिफल
11 अग॰ 2026, 5:14 pm (4 दिन पहले)· 1

सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है सूतक काल, जानें क्या करें और क्या न करें

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण शुरू होने से लगभग 12 घंटे पहले सूतक काल की शुरुआत हो जाती है। चूंकि इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा, इसलिए यहां इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा।

ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, सूर्य ग्रहण लगने से करीब 12 घंटे पहले सूतक काल प्रभावी हो जाता है, जो ग्रहण के पूरी तरह संपन्न होने तक जारी रहता है। इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, जिसके चलते देश में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। जिन क्षेत्रों में ग्रहण साफ तौर पर नजर आएगा, केवल वहीं पर नियमानुसार 12 घंटे पूर्व सूतक मान लिया जाएगा।

साल के दूसरे सूर्य ग्रहण की स्थिति और दृश्यता

इस वर्ष का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को एक पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में लगेगा। यह खगोलीय घटना उत्तर-पश्चिमी स्पेन के गलिशिया क्षेत्र से आरंभ होकर पूर्व दिशा में बालेयारिक द्वीप समूह तक अपनी यात्रा पूरी करेगी। इसके अतिरिक्त, यह अद्भुत नजारा ग्रीनलैंड और आइसलैंड के पश्चिमी छोर से भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। जिन देशों और क्षेत्रों में यह ग्रहण दिखाई देगा, केवल उन्हीं स्थानों पर ठीक 12 घंटे पहले सूतक काल का कड़ा नियम लागू हो जाएगा।

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सूतक और ग्रहण के दौरान किन बातों का रखें ध्यान

धार्मिक परंपराओं और नियमों के अनुसार सूर्य ग्रहण के समय कई तरह की सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है ताकि नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सके। सूतक काल शुरू होने से पहले ही घर में रखे भोजन, खाने की अन्य सभी सामग्रियों और पीने के पानी में तुलसी की पवित्र पत्तियां जरूर डाल देनी चाहिए। इसके अलावा, सूतक काल के दौरान वृद्धजनों, गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों को छोड़कर बाकी सभी लोगों को खानपान से परहेज करना चाहिए।

गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानियां

ग्रहण काल के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इस अवधि में महिलाओं को चाकू, कैंची या किसी भी अन्य धारदार वस्तु से फल और सब्जियां आदि काटने से पूरी तरह बचना चाहिए। साथ ही, सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को सीधे तौर पर ग्रहण देखने से भी परहेज करना बेहद जरूरी बताया गया है। ग्रहण के शुरू होने से पहले गर्भवती महिलाओं पर, साथ ही अन्य जरूरी वस्तुओं और जीव-जंतुओं पर गेरू छिड़कने की परंपरा का भी पालन किया जाता है।

धार्मिक अनुष्ठान और दान-पुण्य के कार्य

ग्रहण के प्रभाव से बचने और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए धार्मिक उपायों का सहारा लिया जाता है। सूर्य ग्रहण लगने के दौरान भगवान हनुमान के पवित्र चालीसा का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, ग्रहण काल के पूरे समय के दौरान भगवान श्री कृष्ण के दिव्य नाम का निरंतर स्मरण करते रहना चाहिए। ग्रहण की अवधि पूरी होने और इसके समाप्त होने के बाद कायदे से स्नान आदि करके खुद को शुद्ध करना चाहिए तथा अपनी सामर्थ्य और यथाशक्ति के अनुसार जरूरतमंदों को दान देना चाहिए। ग्रहण काल के दौरान किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ करने या देवी-देवता की मूर्तियों व वस्तुओं को स्पर्श करने से भी बचना चाहिए।

सवाल-जवाब

सूर्य ग्रहण से कितने घंटे पहले सूतक काल लगता है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण शुरू होने से लगभग 12 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है।
क्या इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
नहीं, इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा।
क्या भारत में इस ग्रहण का सूतक काल मान्य होगा?
भारत में यह ग्रहण न दिखने के कारण इसका सूतक काल यहां मान्य नहीं होगा।
ग्रहण के दौरान खाने-पीने की चीजों में क्या डालना चाहिए?
सूतक काल शुरू होने से पहले भोजन और पानी में तुलसी की पत्तियां डाल देनी चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·3 दिन पहले

यह लेख ज्योतिषीय नियमों के साथ-साथ जीवनशैली से जुड़े पहलुओं को भी सामने लाता है। चूंकि इस बार ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए सूतक और खानपान संबंधी पाबंदियां यहां मान्य नहीं होंगी। हालांकि, वैश्विक स्तर पर ऐसी खगोलीय घटनाएं और उनसे जुड़ी सांस्कृतिक परंपराएं लाइफस्टाइल और ट्रेवल ट्रेंड्स को प्रभावित करती हैं, खासकर उन देशों में जहां यह पूरी तरह दिखाई देगा।

Amit Patel@amit-patel·3 दिन पहले

यह खबर दर्शाती है कि ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताएं किस प्रकार भौगोलिक और खगोलीय वास्तविकताओं से सीधे जुड़ी होती हैं। भारत में इस ग्रहण के दृश्यमान न होने से सूतक काल अमान्य होना यह स्पष्ट करता है कि अनुष्ठानिक और सांस्कृतिक नियम भौगोलिक सीमाओं के खगोलीय विज्ञान का सख्ती से पालन करते हैं।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·3 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि खगोलीय विज्ञान और सांस्कृतिक अनुष्ठान किस तरह एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। भारत में इस पूर्ण सूर्य ग्रहण के न दिखने के कारण सूतक काल का अमान्य होना यह प्रमाणित करता है कि परंपराएं अंतरिक्षीय और भौगोलिक वास्तविकताओं को पूरी तरह स्वीकार करती हैं। स्पेन, ग्रीनलैंड और आइसलैंड जैसे क्षेत्रों में इसकी दृश्यता के आधार पर ही इसके प्रभाव और नियम सीमित रहेंगे, जो यह बताता है कि अंतरिक्ष की घटनाएं भौगोलिक सीमाओं के दायरे में ही धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभावों को तय करती हैं।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·3 दिन पहले

यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत में दृश्यता न होने के कारण सूतक मान्य नहीं होगा, जो कि खगोलीय विज्ञान और ज्योतिषीय परंपराओं के बीच तार्किक संतुलन को दर्शाता है। डिजिटल युग में ऐसे आयोजनों पर भ्रामक सूचनाएं तेजी से फैलती हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि मीडिया अंधविश्वास को बढ़ावा दिए बिना केवल तथ्यात्मक और भौगोलिक स्थिति स्पष्ट करे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

सहकर्मी के इस तार्किक विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह रेखांकित करना महत्वपूर्ण है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खगोलीय घटनाओं के दौरान अक्सर सनसनीखेज दावे और अफवाहें सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए भ्रम पैदा करती हैं। भौगोलिक दृश्यता और वैज्ञानिक तथ्यों को स्पष्ट करने से न केवल जनसाधारण में अनावश्यकPanic रोकता है, बल्कि भ्रामक संदेशों पर लगाम कसने में भी मदद मिलती है। एक अपराध और व्यवस्था बीट के रिपोर्टर के नाते यह आवश्यक है कि इस प्रकार के आयोजनों पर भड़काऊ या गैर-वैज्ञानिक सूचनाओं के प्रसार की बारीकी से निगरानी की जाए ताकि समाज में शांति और स्पष्टता बनी रहे।

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