बेहतर ड्राइविंग अनुभव और शानदार माइलेज की चाहत में लोग अक्सर टर्बोचार्ज्ड इंजन वाली कारें खरीदते हैं। इस तकनीक की खूबी यह होती है कि कम क्षमता वाले इंजन से भी बेहतरीन पावर और टॉर्क मिल जाता है। लेकिन आम नैचुरली एस्पिरेटेड इंजनों के मुकाबले इन्हें विशेष देखभाल की जरूरत होती है। इस तकनीक का मुख्य हिस्सा यानी टर्बोचार्जर बेहद उच्च तापमान पर काम करता है और इसका टरबाइन एक मिनट में डेढ़ लाख से लेकर ढाई लाख से ज्यादा आरपीएम यानी चक्कर लगा सकता है।
टर्बोचार्जर पर क्यों पड़ता है भारी दबाव
लगातार तेज गति और अत्यधिक गर्मी की वजह से इसके अंदरूनी हिस्सों पर अत्यधिक दबाव रहता है। यदि वाहन चालक कुछ बुनियादी तकनीकी बातों और समय पर सर्विसिंग के नियमों को नजरअंदाज करते हैं, तो यह उपकरण समय से पहले ही खराब हो सकता है। इसे ठीक कराने या नया लगवाने में काफी ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। इसलिए गाड़ी की लंबी उम्र के लिए कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है, जिससे हजारों रुपये के नुकसान से बचा जा सके।
गाड़ी चालू करते ही तेज एक्सीलेटर न दबाएं
वाहन स्टार्ट करने के फौरन बाद उसे तेज रफ्तार में भगाना या अचानक से रेस देना नुकसानदायक हो सकता है। इंजन चालू होने के तुरंत बाद ऑयल पंप को पूरे ब्लॉक और टर्बोचार्जर की बेयरिंग तक लुब्रिकेंट ऑयल पहुंचाने में कुछ वक्त लगता है। इसलिए गाड़ी का स्विच ऑन करने के बाद करीब तीस से साठ सेकंड तक उसे न्यूट्रल या आइडल स्थिति में छोड़ देना चाहिए, ताकि तेल का दबाव और तापमान सामान्य हो सके।
लंबी ड्राइव के बाद तुरंत इंजन बंद न करें
हाई स्पीड ड्राइविंग या लंबी यात्रा के बाद घर पहुंचते ही इंजन की चाबी घुमाकर उसे तुरंत बंद करने से बचना चाहिए। ऐसा करने से टर्बो के अत्यधिक गर्म हिस्सों तक तेल का बहाव अचानक रुक जाता है, जिससे वहां जमा तेल जलकर कार्बन बन जाता है जिसे ऑयल कोकिंग कहते हैं। यह कार्बन बेयरिंग को स्थायी रूप से खराब कर देता है। यात्रा पूरी करने के बाद गाड़ी रोकने के बाद कम से कम एक मिनट तक इंजन को चालू रहने देना चाहिए।
सही ग्रेड के सिंथेटिक ऑयल का इस्तेमाल
इस तरह के इंजन के लिए लुब्रिकेशन ऑयल किसी जीवनरेखा से कम नहीं होता, जो लुब्रिकेशन के साथ ही तापमान को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है। हमेशा वाहन निर्माता कंपनी द्वारा बताए गए फुल सिंथेटिक ऑयल का ही उपयोग करें और तय समय सीमा पर उसे बदलवा लें। पुराना या खराब हो चुका तेल तेज घूमने वाली बेयरिंग को सुरक्षा नहीं दे पाता है।
एयर फिल्टर की सफाई और गियर का सही चयन
यह उपकरण बाहर से भारी मात्रा में हवा खींचकर दहन कक्ष में पहुंचाता है। यदि हवा का फिल्टर गंदा या बंद होगा, तो धूल के कण सीधे ब्लेड्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, कम गति में गाड़ी को ऊंचे गियर पर रखकर अचानक एक्सीलेटर दबाने से इंजन पर असामान्य दबाव पड़ता है, जिसे टर्बो लैग कहते हैं। जब भी तेजी से आगे बढ़ना हो, हमेशा गियर डाउनशिफ्ट करें।



















