पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को थामने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। इसी सिलसिले में मक्का पैक्ट के तीन अहम देश अब ईरान की राजधानी तेहरान में एक उच्चस्तरीय बैठक कर रहे हैं। इस कूटनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर बढ़ाए जा रहे हमलों को रोकना और क्षेत्र में छिड़ने वाले बड़े संघर्ष को टालना है। हालिया घटनाक्रमों ने खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं, जिसके चलते क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर मध्यस्थता की कोशिशें तेज हुई हैं।
तेहरान में होगी मक्का पैक्ट के शीर्ष अधिकारियों की बैठक
ईरान की राजधानी तेहरान में होने जा रही इस महत्वपूर्ण बैठक में मक्का पैक्ट के तीनों प्रमुख सदस्य देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्किये के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन शामिल हैं। यह सभी अधिकारी ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर गंभीर चर्चा करेंगे। इस बैठक का सबसे बड़ा और तात्कालिक कारण सऊदी अरब के तेल ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए जा रहे हूती हमले हैं, जिनसे वहां भारी तबाही का खतरा मंडरा रहा है।
मक्का पैक्ट के गठन के बाद पहली बड़ी परीक्षा
अगस्त में अस्तित्व में आए इस रक्षा समझौते के तहत यह पहला मौका है जब इसके सभी सदस्य देश इस स्तर पर ईरान के साथ आमने-सामने की बातचीत कर रहे हैं। इस समझौते के नियमों के मुताबिक, यदि गठबंधन के किसी भी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे बाकी सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। इस महीने की शुरुआत में रियाद में मक्का पैक्ट के मंत्रियों की एक आपातकालीन बैठक भी हुई थी, जिसमें सऊदी अरब में सैन्य बलों और उनकी रक्षात्मक क्षमताओं की तैनाती को तेजी से बढ़ाने पर सहमति बनी थी। हालांकि इस समझौते की औपचारिक प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, क्योंकि पाकिस्तान इसे पिछले सप्ताह ही अपनी मंजूरी दे चुका है, जबकि तुर्किये की संसद में इस पर मुहर लगना अभी बाकी है।
कूटनीतिक मध्यस्थता और क्षेत्रीय समीकरण
इस पूरी बैठक की पहल पाकिस्तान की ओर से की गई थी, जिसके तहत फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पिछले सप्ताह तेहरान पहुंचे थे। तेहरान यात्रा के दौरान उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी। हालांकि उस समय ईरानी अधिकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा था कि जब तक तेहरान की सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं की जाएगी। इससे पहले जून के महीने में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से एक अंतरिम शांति समझौता कराया गया था, लेकिन वह कुछ ही हफ्तों बाद अमेरिका और ईरान के बीच फिर से भड़की शत्रुता के कारण टिक नहीं सका था। इसके अलावा कतर के राजनयिक भी इस तनाव को कम करने के लिए लगातार सक्रिय हैं और उनके मध्यस्थों ने भी तेहरान में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की है।
हूती हमलों से सऊदी अरब की बढ़ी मुश्किलें
यमन के हूती विद्रोहियों की आक्रामक कार्रवाइयों ने इस पूरे भू-राजनीतिक संकट को और अधिक जटिल बना दिया है। सऊदी अरब ने हाल ही में अपने ऊपर दागे गए कई मिसाइल और ड्रोन हमलों को हवा में नाकाम करने का दावा किया है। ये हमले ऐसे समय में हो रहे हैं जब अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ सैन्य नीतियां क्षेत्र को लगातार अस्थिर कर रही हैं, जिससे सऊदी अरब जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर भारी कूटनीतिक दबाव बन गया है। मक्का पैक्ट के तहत साझा सुरक्षा का यह कड़ा इम्तिहान है। सऊदी अरब के सार्वजनिक कूटनीति मामलों के उपमंत्री रायद क्रीमली ने इस बात पर जोर दिया है कि तेहरान की यह यात्रा मौजूदा संकट को कम करने और कतर तथा पाकिस्तान के शांति प्रयासों को समर्थन देने की दिशा में एक अहम कदम है।
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की आशंका
इस पूरे तनाव के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी और आगामी राजनीतिक घटनाक्रम भी बड़ी वजह हैं। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले वहां का नेतृत्व इस मोर्चे पर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ईरान के खिलाफ एक और बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। इस चेतावनी के जवाब में ईरानी नेतृत्व ने भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि अमेरिका ने फिर से कोई सैन्य दुस्साहस किया, तो उनका जवाब पहले से कहीं अधिक आक्रामक होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसी किसी भी सैन्य कार्रवाई की स्थिति में ईरानी सुरक्षा तंत्र ने खाड़ी क्षेत्र के समुद्र तल में बिछी अहम इंटरनेट केबल्स को काटने की चेतावनी तक दे रखी है।



















