सड़क सुरक्षा और पर्यावरण नियमों के अनुपालन को ध्यान में रखते हुए ओडिशा सरकार ने बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र यानी पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफ़िकेट (PUCC) के सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों के लिए दंड की दरों में बड़ा संशोधन किया है। राज्य सरकार ने पुराने कड़े नियमों में ढील देते हुए अधिकतम जुर्माने की सीमा को ₹10,000 से घटाकर ₹6,000 निर्धारित कर दिया है। यह नई संशोधित जुर्माना व्यवस्था बुधवार से पूरे राज्य में प्रभावी रूप से लागू कर दी गई है। इस बड़े फैसले से उन लाखों वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जो अब तक प्रमाण पत्र की मियाद पूरी होने पर भारी-भरकम चालान का सामना कर रहे थे। हालांकि, राज्य प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि बिना वैध प्रमाण पत्र के गाड़ी चलाने पर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी, लेकिन अब चालान की राशि सीधे तौर पर वाहन के प्रकार और उल्लंघन की आवृत्ति पर आधारित होगी।
दोपहिया और तीन पहिया वाहनों के लिए नया चालान ढांचा
नियमों में किए गए बदलाव के तहत छोटे वाहनों के चालकों पर पड़ने वाले वित्तीय असर को काफी हद तक सीमित कर दिया गया है। यदि कोई दोपहिया वाहन चालक पहली बार बिना वैध PUCC के पकड़ा जाता है, तो उसे ₹1,000 का दंड देना होगा। वहीं, यदि यही उल्लंघन दूसरी बार दोहराया जाता है, तो चालान की राशि बढ़कर ₹2,000 हो जाएगी। तीन पहिया वाहनों को भी इसी श्रेणी में रखा गया है, जिसके तहत पहली बार नियम तोड़ने पर ₹1,000 और दूसरी बार नियम का उल्लंघन करने पर ₹2,000 का भुगतान करना तय किया गया है। इस कदम से रोजाना सफर करने वाले मध्यम वर्ग और छोटे ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को बड़ी सहूलियत मिलेगी।
कैब, जीप और कमर्शियल वाहनों के लिए निर्धारित दरें
व्यावसायिक एवं भारी वाहनों के मामले में सरकार ने जुर्माने को थोड़ा सख्त लेकिन श्रेणीबद्ध रखा है। मोटर कैब और जीप श्रेणी के वाहनों के लिए पहली बार वैध दस्तावेज़ न होने पर ₹2,000 का चालान काटा जाएगा, जबकि दूसरी बार यही गलती करने पर वाहन स्वामी को ₹5,000 देने होंगे। इसी तरह कृषि और निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टरों तथा ट्रेलरों के लिए भी पहली बार ₹2,000 और दूसरी बार ₹5,000 का जुर्माना तय किया गया है। अन्य सभी श्रेणियों के भारी या विशेष वाहनों के लिए पहली तथा दूसरी बार के उल्लंघन पर समान रूप से ₹3,000 की राशि निर्धारित की गई है।
2019 के नियमों में बदलाव की पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में संशोधित मोटर वाहन कानून लागू होने के बाद से बिना वैध PUCC के पाए जाने वाले हर वाहन पर एक समान ₹10,000 का भारी जुर्माना लगाया जा रहा था। इस एकसमान व्यवस्था की वजह से छोटे वाहन मालिकों पर असंतुलित आर्थिक बोझ पड़ रहा था। राज्य सरकार के नए रुख का मुख्य उद्देश्य दंड प्रक्रिया को अधिक तर्कसंगत और व्यावहारिक बनाना है। अधिकारियों का मानना है कि जुर्माने की रकम को तार्किक बनाने से लोग चालान के डर से बचने के बजाय समय पर अपना PUCC नवीनीकृत कराने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे सड़कों पर प्रदूषण नियंत्रण के लक्ष्यों को भी आसानी से हासिल किया जा सकेगा।



















