सिनेमाई पर्दे पर जब कोई सस्पेंस थ्रिलर गढ़ा जाता है, तो उसमें दिखने वाली हर छोटी-बड़ी चीज कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करती है। लोकप्रिय थ्रिलर फ्रेंचाइजी में भी वाहनों को केवल पृष्ठभूमि में खड़ा रखने के बजाय कथा के महत्वपूर्ण मोड़, पारिवारिक रुतबे और किरदारों के मानसिक द्वंद्व को दर्शाने का जरिया बनाया गया। जांच अधिकारियों के दबदबे से लेकर विजय सलगांवकर के बदलते सामाजिक कद तक, कई गाड़ियों ने परदे पर खास भूमिका निभाई है।
पीली हुंडई गेट्ज़ बनी जांच की अहम कड़ी
फ्रेंचाइजी की पहली कड़ी में पीले रंग की हुंडई गेट्ज़ हैचबैक पूरी छानबीन का मुख्य केंद्र बनकर उभरी। यह वाहन आईजी मीरा देशमुख के लापता पुत्र सैम से जुड़ा था। खदान के गहरे पानी के भीतर से जब यह लावारिस कार बरामद की जाती है, तब खाकी वर्दी वालों को नौजवान के गायब होने से जुड़ा सबसे ठोस आधार मिलता है। इस साधारण सी दिखने वाली गाड़ी ने पूरी जांच की दिशा तय कर दी थी।
महिंद्रा कमांडर में छिपा गहरा राज
कच्चे-पक्के रास्तों पर दौड़ने वाली महिंद्रा कमांडर जीप एक खामोश राजदार की तरह सामने आई। अपने परिवार को कानूनी शिकंजे से बचाने की जद्दोजहद में जुटे विजय सालगांवकर ने सैम के अवशेषों को निर्माणाधीन थाने तक पहुंचाने के लिए इसी पुरानी रफ-एंड-टफ जीप का सहारा लिया था। कानून के रखवालों से सदैव एक कदम आगे निकलने की चतुर चाल में यह वाहन बेहद मददगार साबित हुआ।
बीएमडब्ल्यू 5 सीरीज और रसूख की नुमाइश
काबो डी रामा के तटीय इलाके में समुद्र किनारे चट्टानों पर विजय जब सैम के माता-पिता से मिलने पहुंचता है, तब पृष्ठभूमि में खड़ी बीएमडब्ल्यू 5 सीरीज सेडान ध्यान खींचती है। हालांकि यह आलीशान सेडान सीधे तौर पर किसी सुराग का हिस्सा नहीं बनती, परंतु यह सैम के परिवार के ऊंचे रुतबे, अकूत संपत्ति और मजबूत सामाजिक पहुंच को स्पष्ट रूप से उजागर करती है।
किआ सेल्टोस से झलकी विजय की आर्थिक तरक्की
फ्रेंचाइजी के दूसरे भाग में कहानी जब सात वर्षों का फासला तय करती है, तो विजय सालगांवकर का जीवन भी नई करवट लेता है। मामूली केबल ऑपरेटर से आगे बढ़कर वह एक सिनेमा हॉल का स्वामी बन चुका है और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम बढ़ा रहा है। इस बदली हुई माली हालत और बढ़े हुए रसूख को दर्शाने के लिए पहली पीढ़ी की किआ सेल्टोस को चुना गया, जो परिवार की संपन्नता की गवाही देती है।
सरकारी बेड़े की पहचान बनी टाटा सूमो
पहली फिल्म में गोवा पुलिस के वाहनों के तौर पर टाटा सूमो बार-बार गश्त लगाती और थानों के परिसर में खड़ी नजर आती है। यद्यपि इसका कहानी के किसी सूत्र से सीधा वास्ता नहीं रहा, लेकिन इसका चौकोर बॉक्सी डिजाइन स्क्रीन पर असरदार दिखता है। वर्ष 2015 के समय में सरकारी दफ्तरों और पुलिस महकमों के आधिकारिक काफिले में इस गाड़ी की धाक होना बेहद सामान्य बात थी।
थाने के बाहर तैनात महिंद्रा बोलेरो
भारतीय कस्बों और देहाती इलाकों के थानों की पहचान मानी जाने वाली महिंद्रा बोलेरो हर उस मौके पर मौजूद दिखी, जब सालगांवकर परिवार को पूछताछ के सिलसिले में तलब किया गया। इस मजबूत एसयूवी की मौजूदगी ने पर्दे पर चल रहे ड्रामे को एक यथार्थवादी पुलिसिया तफ्तीश का पुख्ता माहौल प्रदान किया।
महिंद्रा थार रॉक्स के साथ आधुनिक दौर में जांच
द कन्क्लूजन वाले अध्याय में समय का बदलाव साफ नजर आता है, जहां पुरानी जीपों की जगह नई महिंद्रा थार रॉक्स ले लेती है। नए जांच अधिकारी के किरदार में जयदीप अहलावत पांच दरवाजों वाली इस आधुनिक एसयूवी में सफर करते नजर आते हैं, जो बदलती तकनीक और आधुनिक पुलिसिया तेवर को दर्शाती है।
टाटा हैरियर डार्क एडिशन में दिखा रहस्यमयी व्यक्तित्व
फ्रेंचाइजी के तीसरे हिस्से में विजय सालगांवकर के बदले हुए रसूख और परिपक्व अंदाज को टाटा हैरियर का ऑल-ब्लैक डार्क एडिशन सामने लाता है। यह भारी-भरकम और आकर्षक एसयूवी विजय की नई सवारी के रूप में चुनी गई है। इसका गहरा काला बाहरी रंग और भीतरी केबिन न केवल देखने में शानदार है, बल्कि विजय के भीतर छिपे रहस्यमयी और गूढ़ स्वभाव से भी पूरी तरह मेल खाता है।


















