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स्मार्टफोन से सेकंडों में रुक रहीं ई-रिक्शा, वजह जानकर उड़ जाएंगे होशऑटो
2 जुल॰ 2026, 12:53 pm (45 दिन पहले)· 3

स्मार्टफोन से सेकंडों में रुक रहीं ई-रिक्शा, वजह जानकर उड़ जाएंगे होश

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग एक मोबाइल ऐप से चलती ई-रिक्शा को सेकंडों में बंद कर दे रहे हैं, जानिए यह तकनीकी खामी कैसे काम करती है और क्या आपकी इलेक्ट्रिक कार पर भी खतरा है.

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक अजीब ट्रेंड तेजी से फैल रहा है, जिसमें राह चलते लोग अपने स्मार्टफोन की मदद से सड़क पर दौड़ रही ई-रिक्शा को अचानक बीच रास्ते में रोक दे रहे हैं. यह कोई जादू या हाई-टेक हैकिंग नहीं, बल्कि ‘बीएटी-बीएमएस’ नाम के एक मोबाइल ऐप की देन है, जो चंद सेकंड में ही चलती गाड़ी की बिजली गुल कर देता है. देखने में यह मजेदार रील लग सकती है, लेकिन असल में यह भारतीय सड़कों की सुरक्षा में छिपी एक गंभीर खामी को उजागर करती है.

ऐप का असली मकसद और रिक्शा रुकने के पीछे की टेक्निकल वजह

बीएटी-बीएमएस यानी बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम कोई हैकिंग टूल या गैरकानूनी सॉफ्टवेयर नहीं है. इसे चीनी कंपनी शेन्ज़ेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी ने बनाया है और यह गूगल प्ले स्टोर पर पूरी तरह वैध तरीके से मौजूद है. इसे बनाने का मकसद यह था कि लिथियम-आयन बैटरी रखने वाले लोग ब्लूटूथ के जरिए अपनी बैटरी की सेहत, वोल्टेज, तापमान, चार्जिंग साइकिल और करंट जैसी जानकारी आसानी से देख सकें. इसी में एक सुरक्षा फीचर भी दिया गया है, जिससे यूजर चाहें तो बैटरी की डिस्चार्ज यानी पावर सप्लाई को ऑन या ऑफ कर सकते हैं. दिक्कत तब शुरू होती है जब यही फीचर गलत हाथों में पहुंच जाता है. भारत में बिकने वाली कई सस्ती ई-रिक्शा और लो-स्पीड स्कूटर्स में लगी ब्लूटूथ-इनेबल्ड बीएमएस यूनिट्स में कंपनियां कोई पासवर्ड या सिक्योरिटी लॉक ही नहीं लगातीं. नतीजा यह होता है कि जब कोई प्रैंक करने वाला शख्स यह ऐप खोलता है, तो उसे अपने आसपास 10 से 15 मीटर के दायरे में मौजूद ऐसी सारी असुरक्षित गाड़ियां दिख जाती हैं. वह बस ऐप से उस रिक्शा की बैटरी से कनेक्ट होता है, डिस्चार्ज बटन बंद करता है, और अगले ही पल मोटर को मिलने वाली बिजली कट जाती है. गाड़ी बीच सड़क पर ही रुक जाती है.

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यह महज मजाक नहीं, कानूनन गंभीर मामला है

सोशल मीडिया पर भले ही इसे मजेदार प्रैंक या रील बनाने का जरिया समझा जा रहा हो, लेकिन असल में यह पूरी तरह अनैतिक और कानूनन गैरकानूनी हरकत है. जरा सोचिए, अगर कोई ई-रिक्शा या स्कूटर किसी व्यस्त चौराहे, फ्लाईओवर या तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच अचानक बंद हो जाए, तो पीछे से आ रहे वाहन उससे सीधे टकरा सकते हैं. इससे चालक, उसमें बैठी सवारियों और आसपास मौजूद अन्य लोगों की जान को सीधा खतरा पैदा हो जाता है. किसी की गाड़ी या संपत्ति को उसकी मर्जी के बिना दूर बैठे-बैठे कंट्रोल कर लेना कानूनी नजरिए से साइबर क्राइम की श्रेणी में आता है.

क्या इलेक्ट्रिक कार को भी इसी तरह रोका जा सकता है?

आम लोगों और खासकर इलेक्ट्रिक कार मालिकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इसी तरीके से उनकी महंगी इलेक्ट्रिक कार को भी बीच सड़क पर रोका जा सकता है? इसका सीधा जवाब है नहीं, ऐसा बिल्कुल संभव नहीं है. इलेक्ट्रिक कारों में सुरक्षा व्यवस्था कहीं ज्यादा मजबूत होती है. इनके इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम यानी ईसीयू और बैटरी पैक तक पहुंचने के लिए ऑटोमोटिव-ग्रेड साइबर सिक्योरिटी और फायरवॉल लगे होते हैं. इसी वजह से किसी साधारण ब्लूटूथ ऐप के जरिए कार को हैक करना या उसे बंद करना नामुमकिन है.

लो-स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर भी बन रहे हैं आसान निशाना

ई-रिक्शा की तरह ही बाजार में मौजूद कई लो-स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर भी इस प्रैंक की चपेट में आ रहे हैं. वजह साफ है, लागत कम रखने के लिए इनमें बेहद सस्ते और जेनेरिक चीनी लिथियम बैटरी पैक इस्तेमाल किए जाते हैं. इन बैटरियों के स्मार्ट बीएमएस में ब्लूटूथ तो जोड़ दिया जाता है, लेकिन सेफ्टी सेटिंग्स को खुला ही छोड़ दिया जाता है. प्रैंक करने वाले लोग इन स्कूटर्स के पीछे या बगल में आकर आसानी से ऐप के जरिए उनके बीएमएस से जुड़ जाते हैं और चलते-चलते ही उनकी पावर सप्लाई बंद कर देते हैं.

इस डिजिटल प्रैंक और हैकिंग से खुद को कैसे बचाएं

अगर आप खुद ई-रिक्शा चालक हैं या आपके पास ब्लूटूथ वाली लिथियम बैटरी से चलने वाला स्कूटर है, तो कुछ आसान तरीकों से खुद को इस खतरे से बचाया जा सकता है.

  • सबसे पहला और सबसे जरूरी काम है अपनी बैटरी का ऑफिशियल ऐप डाउनलोड करना और उसकी ब्लूटूथ सेटिंग्स में जाकर डिफॉल्ट पासवर्ड, जैसे 1234 या 0000, को बदलकर एक मजबूत पासवर्ड सेट करना.
  • अगर बीएमएस ऐप में विकल्प मौजूद हो, तो बैटरी के ब्लूटूथ ब्रॉडकास्ट या विजिबिलिटी को हिडेन मोड पर डाल देना चाहिए, ताकि वह किसी अनजान फोन को दिखाई ही न दे.
  • अगर वाहन बार-बार अचानक बंद हो रहा हो, तो किसी भरोसेमंद मैकेनिक या डीलर के पास जाकर बैटरी के ब्लूटूथ मॉड्यूल को तब तक बंद करवा देना चाहिए, जब तक कंपनी कोई सिक्योरिटी अपडेट जारी नहीं कर देती.
  • अगर कोई शख्स सड़क पर ऐसा करता हुआ पकड़ा जाए, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में इसकी शिकायत दर्ज करानी चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा से जुड़ा मामला है.

सवाल-जवाब

बीएटी-बीएमएस ऐप आखिर है क्या?
यह लिथियम-आयन बैटरी की हेल्थ, वोल्टेज, तापमान और चार्जिंग साइकिल ट्रैक करने वाला एक वैध ऐप है, जिसे चीनी कंपनी शेन्ज़ेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी ने बनाया है और यह गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद है.
क्या यह ऐप हैकिंग टूल है?
नहीं, यह हैकिंग टूल नहीं बल्कि बैटरी मैनेजमेंट के लिए बना वैध ऐप है, लेकिन असुरक्षित बीएमएस यूनिट्स की वजह से इसका गलत इस्तेमाल हो रहा है.
क्या मेरी इलेक्ट्रिक कार को भी इसी तरह रोका जा सकता है?
नहीं, इलेक्ट्रिक कारों में ऑटोमोटिव-ग्रेड साइबर सिक्योरिटी और फायरवॉल होते हैं, इसलिए इस ऐप से कार को हैक करना संभव नहीं है.
प्रैंक करने वाले शख्स की रेंज कितनी होती है?
ऐप खोलने पर 10 से 15 मीटर के दायरे में मौजूद असुरक्षित गाड़ियां दिखाई देने लगती हैं.
गाड़ी अचानक क्यों बंद हो जाती है?
प्रैंक करने वाला ऐप से रिक्शा या स्कूटर की बैटरी से कनेक्ट होकर डिस्चार्ज बटन बंद कर देता है, जिससे मोटर को मिलने वाली बिजली तुरंत कट जाती है.
इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?
बैटरी के ऑफिशियल ऐप में जाकर डिफॉल्ट पासवर्ड बदलें, ब्लूटूथ विजिबिलिटी हिडेन करें, और जरूरत पड़ने पर मैकेनिक से ब्लूटूथ मॉड्यूल डिसेबल कराएं.
क्या यह कानूनन अपराध है?
हां, किसी की गाड़ी को उसकी मर्जी के बिना रिमोटली कंट्रोल करना साइबर क्राइम माना जा सकता है, और इसकी शिकायत पुलिस या साइबर सेल में दर्ज कराई जा सकती है.
किन गाड़ियों को सबसे ज्यादा खतरा है?
सस्ती ई-रिक्शा और लो-स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर, जिनमें बिना पासवर्ड वाली ब्लूटूथ-इनेबल्ड बीएमएस यूनिट्स और सस्ते जेनेरिक चीनी लिथियम बैटरी पैक लगे होते हैं, सबसे ज्यादा जोखिम में हैं.
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