राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के गांवों में बड़ी तादाद में किसान परिवार खेती के साथ-साथ पशुपालन से भी अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। गाय, भैंस, बकरी और भेड़ पालकर दूध और अन्य पशु उत्पाद बेचना अब इन परिवारों की नियमित कमाई का जरिया बन गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हुई है। लेकिन पशुपालन में एक बड़ा खतरा भी छिपा रहता है, वह है पशु की अचानक मौत, जो पूरे परिवार की आमदनी को झटके में खत्म कर सकती है। ऐसी ही मुश्किल घड़ी में सरकार की मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना बड़ा सहारा बनकर सामने आई है।
योजना का मकसद क्या है
राज्य सरकार की इस योजना के तहत पशु की आकस्मिक मौत होने पर मालिक को आर्थिक भरपाई दी जाती है, ताकि पशुपालक अचानक आए नुकसान से टूटे नहीं और अपना कारोबार फिर से खड़ा कर सकें। इसका मकसद सिर्फ मुआवजा देना नहीं, बल्कि पशुपालन को एक भरोसेमंद और सुरक्षित रोजगार के रूप में बढ़ावा देना भी है।
कोटकासिम की उमेश देवी का अनुभव
यह योजना कैसे असल जिंदगी में काम आती है, इसकी मिसाल कोटकासिम तहसील के रामपुर गांव में देखने को मिली। यहां आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर बिलाहेड़ी में गांव की निवासी उमेश देवी, जो इन्द्रजीत सिंह की पत्नी हैं, पहुंचीं। उमेश देवी खेती के साथ-साथ भैंस पालन का काम भी करती हैं और उनके परिवार की कमाई का बड़ा हिस्सा इसी से आता था। कुछ समय पहले उनकी एक भैंस की असमय मौत हो गई, जिससे परिवार को तगड़ा आर्थिक झटका लगा।
समय पर बीमा कराना आया काम
राहत की बात यह रही कि उमेश देवी ने पहले ही सूझबूझ दिखाते हुए ग्रामीण सेवा शिविर में मौजूद अधिकारियों की मदद से अपनी भैंस का बीमा मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत करवा लिया था और जरूरी कागजी प्रक्रिया भी समय पर पूरी कर ली थी। भैंस की मौत के बाद जब उन्होंने दावा किया, तो वह स्वीकृत हो गया और उन्हें 40,000 रुपये की बीमा सहायता राशि मिली। इस रकम ने परिवार को संकट की घड़ी से बाहर निकाला और उन्हें दोबारा पशुपालन के काम को आगे बढ़ाने की हिम्मत दी।
उमेश देवी की अपील
उमेश देवी ने बताया कि मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना ने मुश्किल वक्त में उनके परिवार को बड़ा आर्थिक सहारा दिया। उन्होंने जिले के बाकी पशुपालकों से अपील की कि वे भी अपने पशुओं का बीमा जरूर करवाएं, ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में उन्हें भी आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
किन पशुओं का होता है बीमा
पशुपालन विभाग के मुताबिक इस योजना के तहत गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और ऊंट सहित अलग-अलग श्रेणी के पशुओं का बिल्कुल मुफ्त बीमा किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य पशुपालकों को वित्तीय सुरक्षा देना, पशुपालन कारोबार को बढ़ावा देना और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।











