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उत्तर प्रदेश कैबिनेट का फैसला: पशुओं की मौत पर परिवार को मिलेगा 75 हज़ार तक का मुआवजाबेनिफिट्स
6 जुल॰ 2026, 3:36 pm (45 दिन पहले)· 4

उत्तर प्रदेश कैबिनेट का फैसला: पशुओं की मौत पर परिवार को मिलेगा 75 हज़ार तक का मुआवजा

यूपी कैबिनेट ने मुख्यमंत्री जोखिम पशुधन बीमा प्रबंधन योजना को पूरे राज्य में लागू करने की मंजूरी दी, जिसके तहत मुर्रा भैंस पर 75 हज़ार, देसी गाय पर 40 हज़ार, बकरी-भेड़ पर 6.5 हज़ार और घोड़े पर 60 हज़ार रुपये तक का मुआवजा एक महीने के भीतर मिलेगा।

उत्तर प्रदेश के पशुपालकों और डेयरी किसानों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सोमवार को हुई यूपी कैबिनेट की बैठक में कुल 27 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें से एक प्रस्ताव सीधे तौर पर प्रदेश के पशुपालकों और डेयरी फार्मिंग से जुड़े किसानों की जेब से जुड़ा है। इस मंजूरी के साथ ही मुख्यमंत्री जोखिम पशुधन बीमा प्रबंधन योजना अब पूरे उत्तर प्रदेश में लागू हो गई है। कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह के मुताबिक इसी बैठक में पशुओं की नस्ल सुधारने, बीमा कवरेज बढ़ाने और देसी गोवंश को बढ़ावा देने से जुड़े कई और प्रस्तावों पर भी मुहर लगी।

पशु की मौत पर किसे कितना मुआवजा

प्रस्ताव पास होते ही योजना के तहत मुआवजे की रकम भी तय कर दी गई है। अगर किसी पशुपालक की मुर्रा भैंस दुर्घटना या बीमारी से मर जाती है, तो उसे 75 हज़ार रुपये का मुआवजा मिलेगा। देसी गाय की मौत पर 40 हज़ार रुपये, बकरी या भेड़ की मौत पर 6.5 हज़ार रुपये और घोड़े की मौत पर 60 हज़ार रुपये की भरपाई की जाएगी। यह पूरी रकम पशु की मौत के एक महीने के भीतर पशुपालक तक पहुंचा दी जाएगी। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि सड़क पर घूमने वाले छुट्टा पशुओं पर यह योजना लागू नहीं होगी, यानी मुआवजा सिर्फ पालतू और बीमित पशुओं की मौत पर ही मिलेगा।

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प्रीमियम में सरकार की कितनी हिस्सेदारी

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पशुपालक को बीमा प्रीमियम का बहुत छोटा हिस्सा ही अपनी जेब से भरना पड़ता है। कुल प्रीमियम का 85 फीसदी हिस्सा सरकार वहन करेगी, जिसमें 51 फीसदी केंद्र सरकार और 34 फीसदी राज्य सरकार का योगदान होगा। बाकी बचा 15 फीसदी हिस्सा ही लाभार्थी पशुपालक को देना होगा। पहले साल सामान्य वर्ग के पशुपालकों को प्रीमियम पर 50 फीसदी तक की सब्सिडी मिलती है, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को यह राहत 70 फीसदी तक बढ़ जाती है। दूसरे और तीसरे साल में भी अलग-अलग श्रेणी के पशुपालकों को उनकी श्रेणी के हिसाब से प्रीमियम पर सब्सिडी दी जाती रहेगी। पशुपालक चाहें तो एक साल या तीन साल की अवधि के लिए बीमा करा सकते हैं।

किन-किन पशुओं का हो सकता है बीमा

मुख्यमंत्री जोखिम पशुधन बीमा प्रबंधन योजना के दायरे में सिर्फ गाय-भैंस ही नहीं, बल्कि बकरी, भेड़, सूअर, घोड़ा, ऊंट, गधा, खच्चर और दूसरे पालतू पशु भी आते हैं। बीमा की रकम पशु के असल बाजार मूल्य के आधार पर तय होती है, ताकि पशुपालक को उसकी वास्तविक कीमत के करीब मुआवजा मिल सके। एक परिवार अधिकतम पांच बड़े पशुओं या पचास छोटे पशुओं यानी पांच कैटल यूनिट तक का ही बीमा करा सकता है। सरकार का तर्क है कि इस सीमा से योजना का फायदा ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुंचाया जा सकेगा।

कब मिलेगा क्लेम, कब कटेगा दावा

बीमारी, दुर्घटना, बिजली गिरने, आग या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से अगर पशु की मौत होती है, तो बीमा कंपनी नियमों के मुताबिक तय रकम पशुपालक को देगी। चोरी के बाद अगर यह साबित हो जाए कि पशु की मौत हो चुकी है, तो भी नियमानुसार क्लेम मिल सकता है। लेकिन अगर पशुपालक ने जानबूझकर पशु को नुकसान पहुंचाया हो, बीमा शुरू होने से पहले ही पशु बीमार था, बीमा कराते वक्त गलत जानकारी दी गई हो, पशु को पहले से कोई गंभीर बीमारी हो या बीमा की शर्तों का उल्लंघन हुआ हो, तो ऐसी स्थिति में मुआवजा नहीं मिलेगा।

पैसा सीधे बैंक खाते में

क्लेम मंजूर होने के बाद दावे की पूरी रकम सीधे लाभार्थी पशुपालक के बैंक खाते में भेजी जाती है, ताकि बिचौलियों का कोई झंझट न रहे। सरकार का कहना है कि इस योजना के पीछे मकसद पशुपालकों की कमाई को सुरक्षित रखना, पशुपालन के धंधे को बढ़ावा देना और पशु की अचानक मौत से होने वाले आर्थिक झटके की भरपाई करना है। कुल मिलाकर यह फैसला उन लाखों परिवारों के लिए राहत की खबर है जिनकी रोज़ी-रोटी दुधारू और पालतू पशुओं पर टिकी है।

सवाल-जवाब

यह कौन सी योजना है?
यह मुख्यमंत्री जोखिम पशुधन बीमा प्रबंधन योजना है, जिसे यूपी कैबिनेट ने सोमवार को हुई बैठक में पूरे राज्य में लागू करने की मंजूरी दी है।
मुर्रा भैंस की मौत पर कितना मुआवजा मिलेगा?
मुर्रा भैंस की दुर्घटना या बीमारी से मौत होने पर 75 हज़ार रुपये का मुआवजा मिलेगा।
देसी गाय, बकरी-भेड़ और घोड़े पर कितना मुआवजा तय है?
देसी गाय पर 40 हज़ार रुपये, बकरी-भेड़ पर 6.5 हज़ार रुपये और घोड़े पर 60 हज़ार रुपये का मुआवजा तय किया गया है।
मुआवजे की रकम कितने समय में मिलेगी?
पशु की मौत के एक महीने के भीतर पशुपालक को मुआवजे की पूरी रकम दिला दी जाएगी।
प्रीमियम में पशुपालक को खुद कितना पैसा देना होगा?
कुल प्रीमियम का सिर्फ 15 फीसदी हिस्सा ही पशुपालक को देना होगा, बाकी 85 फीसदी सरकार यानी 51 फीसदी केंद्र और 34 फीसदी राज्य वहन करेगी।
क्या छुट्टा पशुओं पर भी यह योजना लागू होगी?
नहीं, सड़क पर घूमने वाले छुट्टा पशुओं पर यह बीमा योजना लागू नहीं होगी।
एक परिवार अधिकतम कितने पशुओं का बीमा करा सकता है?
एक परिवार अधिकतम पांच बड़े पशु या पचास छोटे पशु यानी पांच कैटल यूनिट तक का बीमा करा सकता है।
क्लेम की रकम पशुपालक तक कैसे पहुंचेगी?
क्लेम मंजूर होने के बाद पूरी रकम सीधे पशुपालक के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
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