Kharif सीजन की जोखिमों से सुरक्षा के लिए बीमा है जरूरी
नागौर में मौसम के बदलते मिजाज के कारण Kharif फसलों की खेती हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। ऐसे संकट के समय किसानों को वित्तीय सुरक्षा देने के लिए PM Fasal Bima Yojana एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में सामने आती है। कृषि विशेषज्ञ Bajrang Singh के अनुसार, समय रहते फसलों का बीमा कराने और सभी जरूरी दस्तावेजों को दुरुस्त रखने से प्राकृतिक आपदाओं के दौरान होने वाले आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है।
गैर-ऋणी किसानों के लिए 31 जुलाई की समय सीमा
ऐसे किसान जिन्होंने बैंकों से KCC यानी फसली ऋण नहीं लिया है, वे अपनी फसलों के बीमा के लिए 31 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए वे नजदीकी ई-मित्र केंद्र, अधिकृत बैंक, वित्तीय संस्थान या सीधे आधिकारिक PM Fasal Bima Yojana पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं। वहीं, जिन किसानों के पास सक्रिय KCC खाता है, उनका बीमा बैंक द्वारा स्वतः कर दिया जाता है, लेकिन फिर भी उन्हें अपनी दर्ज जानकारियों की दोबारा जांच कर लेनी चाहिए।
29 जुलाई तक कराएं फसल विवरण में सुधार
अक्सर देखा गया है कि खेतों में बोई गई वास्तविक फसल और बीमा आवेदन पत्र में दर्ज फसल के नाम में अंतर होता है। इस विसंगति की वजह से बीमा क्लेम अटक जाता है। Bajrang Singh ने सलाह दी है कि यदि किसी कारण से आवेदन में गलत फसल दर्ज हो गई है, तो किसान 29 जुलाई तक उसमें आवश्यक संशोधन जरूर करा लें। साथ ही, किसानों के बैंक खाते सक्रिय होने चाहिए और उनका मोबाइल नंबर, Aadhaar कार्ड, Janaadhar लिंकिंग और गिरदावरी जैसे भूमि दस्तावेज बिल्कुल अपडेट होने चाहिए।
बीमा के दायरे में आने वाली फसलें और आपदाएं
PM Fasal Bima Yojana के अंतर्गत प्रतिकूल परिस्थितियों जैसे सूखा, अत्यधिक बारिश, बाढ़, ओलावृष्टि, आकाशीय बिजली, प्राकृतिक आग और कीटों के प्रकोप को शामिल किया गया है। खरीफ सीजन की कुल 23 प्रमुख फसलें जैसे बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ, ग्वार, उड़द, चंवला, अरहर, तिल, सोयाबीन, कपास, धान और मूंगफली इसके दायरे में आती हैं। इसके अतिरिक्त हरी मिर्च, प्याज, टमाटर, टिंडा, अरंडी, अनार, संतरा, खजूर, किन्नू और मेहंदी जैसी बागवानी फसलों को भी सुरक्षा कवच प्रदान किया जाता है।













