बोकारो जिले के गरीब और सीमांत किसानों को खेती-किसानी के कार्यों में मदद देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी कल्याणकारी योजना की शुरुआत की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत चलाई जा रही इस योजना में किसानों को खेती के लिए बैलों की जोड़ी बेहद मामूली कीमत पर उपलब्ध कराई जाएगी। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के किसानों को कृषि कार्य के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि वे बिना किसी वित्तीय बोझ के अपने खेतों की जुताई कर सकें।
90 फीसदी अनुदान और आवेदन की अंतिम तिथि
इस विशेष योजना के अंतर्गत राज्य सरकार बैलों की खरीद पर 90 प्रतिशत की भारी-भरकम सब्सिडी दे रही है। इसका मतलब यह है कि लाभार्थी किसान को कुल खर्च का केवल 10 फीसदी हिस्सा ही अपनी जेब से देना होगा, जो कि मात्र 4000 रुपये बनता है। जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ असीम कुमार सिंह ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना का लाभ उठाने के लिए इच्छुक किसान 20 जुलाई 2026 तक अपने आवेदन जमा कर सकते हैं। इसके तहत पशुपालकों और किसानों को पूरी तरह स्वस्थ और रोगमुक्त नर बछड़े प्रदान किए जाएंगे।
विभिन्न प्रखंडों के लिए निर्धारित लक्ष्य
इस योजना के सुचारू संचालन के लिए पूरे बोकारो जिले में कुल 69 जोड़ी बैल बांटने का लक्ष्य तय किया गया है। प्रशासन ने क्षेत्रवार संतुलन बनाए रखने के लिए अलग-अलग प्रखंडों के लिए कोटे निर्धारित किए हैं। इस आवंटन के अनुसार गोमिया प्रखंड में सबसे अधिक 14 जोड़ी बैल बांटे जाएंगे। इसके अलावा चास और चंदनक्यारी प्रखंडों के लिए 10-10 जोड़ी बैलों का लक्ष्य है। नावाडीह प्रखंड को 9 जोड़ी, पेटरवार को 7 जोड़ी तथा जरीडीह, बेरमो और चंद्रपुरा प्रखंडों को 5-5 जोड़ी बैल दिए जाएंगे। वहीं कसमार प्रखंड के हिस्से में 4 जोड़ी बैल आए हैं।
योजना के लिए जरूरी पात्रता और शर्तें
इस सरकारी सहायता का लाभ उठाने के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें तय की गई हैं। आवेदन करने वाला व्यक्ति बोकारो जिले का स्थायी निवासी होना चाहिए और उसके पास अपनी कृषि योग्य भूमि होनी जरूरी है। यह योजना मुख्य रूप से BPL (गरीबी रेखा से नीचे) श्रेणी के परिवारों के लिए तैयार की गई है। योजना के क्रियान्वयन में अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) और दिव्यांग श्रेणी के आवेदकों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी ताकि समाज के पिछड़े और कमजोर वर्गों को सीधा सहारा मिल सके।
आवेदन और चयन की पूरी प्रक्रिया
योजना का लाभ पाने के लिए सबसे पहले आवेदक का नाम उनकी स्थानीय ग्राम सभा द्वारा चयनित और अनुशंसित होना अनिवार्य है। इसके बाद इच्छुक किसान अपने नजदीकी प्रखंड पशुपालन कार्यालय या फिर मुख्य जिला पशुपालन कार्यालय से फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन फॉर्म के साथ कुछ जरूरी दस्तावेजों की फोटोकॉपी जमा करनी होगी, जिनमें स्थायी पते का प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और BPL नंबर (यदि लागू हो) शामिल हैं।
आवेदन जमा होने के बाद ग्राम सभा से स्वीकृत सूची को प्रखंड स्तरीय समिति के पास भेजा जाएगा, जो इसे जांचकर जिला मुख्यालय को अग्रसारित करेगी। अंतिम मंजूरी जिले के उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा दी जाएगी। इस समिति से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही अनुदान की राशि सीधे चयनित लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।









