बिहार के मधुबनी में एक बड़ा भूमि घोटाला सामने आया है, जिसमें शहर के प्रमुख तिलक चौक पर स्थित एक सरकारी पोखर की करीब तीन एकड़ जमीन को निजी संपत्ति (रैयती) बताकर बेचने और उसकी जमाबंदी करने का मामला तूल पकड़ चुका है। इस गंभीर प्रकरण में प्रशासन ने अब कड़ी कार्रवाई करते हुए 47 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है। इस सूची में स्थानीय नगर निगम के मेयर और डिप्टी मेयर के परिजनों के नाम भी सामने आ रहे हैं, जिससे मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। अधिकारियों की मिलीभगत की भी गहराई से जांच की जा रही है।
2018 से 2022 के बीच हुआ जमीन का खेल
इस घोटाले की जड़ें वर्ष 2018 से 2022 के बीच की अवधि में छिपी हैं। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, रहिका अंचल के खाता संख्या-312 और खेसरा संख्या-89 की भूमि आधिकारिक रूप से सरकारी सैरात यानी तालाब के रूप में दर्ज है। आरोप है कि इस दौरान पदस्थ तत्कालीन अंचल अधिकारियों ने मिलीभगत करके सरकारी अभिलेखों में हेरफेर की। इस जमीन को निजी स्वामित्व वाली बताकर न केवल इसकी खरीद-बिक्री की गई, बल्कि आठ लोगों की जमाबंदी भी अवैध रूप से कर दी गई। कुल 47 लोगों ने इस अवधि के दौरान इस जमीन के लेनदेन में सक्रिय भूमिका निभाई।
करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा और निर्माण
दिसंबर 2022 में हुई एक आधिकारिक जांच ने इस सच पर मुहर लगा दी कि तिलक चौक स्थित यह जमीन सरकारी पोखर की ही है। इसके बाद, इस भूमि पर नई जमाबंदी के सभी आवेदनों को प्रशासनिक तौर पर रद्द कर दिया गया। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस ऐतिहासिक पोखर को मिट्टी भरकर समतल कर दिया गया और बाद में वहां ऊंची चारदीवारी खड़ी कर दी गई। वर्तमान में इस सरकारी जमीन के बड़े हिस्से पर मकान, दुकान और वाहन गैरेज तक बन चुके हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये में आंकी गई है। भू-माफिया और প্রভাবশালী व्यक्तियों के गठजोड़ के बिना इतनी बड़ी सरकारी संपत्ति का अतिक्रमण संभव नहीं था।
तालाबों पर अतिक्रमण का व्यापक खतरा
इस मामले ने एक बड़े खतरे की ओर इशारा किया है। मधुबनी जिले में मत्स्य विभाग के तहत कुल 4,774 तालाब पंजीकृत हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से लगभग 300 तालाब अतिक्रमणकारियों की जद में हैं। तिलक चौक पोखर का मामला उजागर होने के बाद अब अन्य जलस्रोतों की भी विस्तृत जांच की मांग तेज हो गई है। तालाब बचाओ अभियान से जुड़े सामाजिक संगठनों ने प्रशासन की इस हालिया कार्रवाई का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि यदि यह सख्ती जारी रही, तो जिले के अन्य तालाबों को भी भू-माफियाओं के चंगुल से छुड़ाया जा सकेगा।
जांच के दायरे में अधिकारी
पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका है। जिला मुख्यालय से लेकर रहिका अंचल तक, कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे विषय पर कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से कतरा रहा है। प्रशासन का कहना है कि यह मामला अभी जांच के दायरे में है और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है, इसलिए अधिक जानकारी साझा करना संभव नहीं है। दूसरी ओर, प्राथमिकी में नामजद 47 आरोपियों में से किसी की भी ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान नहीं आया है। प्रशासन का दावा है कि दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कठोरतम कदम उठाए जाएंगे।











