बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी थाना अंतर्गत रामचंद्रा गांव से एक विचलित कर देने वाला मामला प्रकाश में आया है, जहां एक विवाहित महिला की संदिग्ध मृत्यु के तीन दिन बाद उसके शव को कब्र खोदकर दोबारा बाहर निकालना पड़ा। न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति और भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच मृतका के अवशेषों को कब्र से निकाला गया और आगे की कानूनी जांच के लिए उन्हें एसकेएमसीएच (SKMCH) भेज दिया गया है।
घटना की पृष्ठभूमि और विवाद की शुरुआत
यह पूरा घटनाक्रम कुढ़नी थाना क्षेत्र के बसोली पंचायत के रामचंद्रा गांव का है। यहां रहने वाले मो रिजवान की पत्नी नजराना खातून की 2 जुलाई को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। नजराना के मायके वालों ने शुरुआत में ही अपने दामाद रिजवान और उसके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए थे। परिवार का कहना था कि रिजवान और उसके परिजनों द्वारा की गई मारपीट के कारण ही नजराना ने दम तोड़ा। हालांकि, घटना के तुरंत बाद दोनों पक्षों के बीच किसी प्रकार का आपसी समझौता हुआ, जिसके उपरांत शव को दफना दिया गया। लेकिन यह शांति अल्पकालिक रही और तीन दिन बाद स्थिति ने नया मोड़ ले लिया।
पति-पत्नी के बीच लंबे समय से तनाव का दावा
नजराना और रिजवान का निकाह वर्ष 2016 में हुआ था। मृतका के परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही रिजवान अक्सर उसे प्रताड़ित किया करता था। इस दंपति के तीन बच्चे भी हैं। घटना वाले दिन के बारे में जानकारी देते हुए परिजनों ने बताया कि नजराना का भाई दिन में अपनी बहन से मिलने गया था, लेकिन शाम होते-होते उन्हें उसकी मृत्यु की दुखद खबर मिल गई। ससुराल पक्ष ने इस मृत्यु का कारण हार्ट अटैक बताया था, जिसे लेकर मायके वालों को संदेह था।
शराब के सेवन और विवाद का खुलासा
परिजनों के अनुसार, रिजवान घटना के दिन घर में अपने दोस्तों के साथ शराब का सेवन कर रहा था। विवाद तब और गहरा गया जब पता चला कि उसने उसी कमरे में शराब पी थी, जहां पवित्र कुरान पढ़ी जाती है। जब नजराना ने इस कृत्य पर अपनी आपत्ति जताई, तो क्रोधित होकर रिजवान ने उसकी पिटाई कर दी, जिससे उसकी जान चली गई।
समझौते के उल्लंघन के बाद पुलिस कार्रवाई
शुरुआती दौर में इस विवाद को स्थानीय स्तर पर समझौते के माध्यम से सुलझाने की कोशिश की गई थी। उस वक्त यह तय हुआ था कि मृतका के तीनों बच्चों (दो बेटियों और एक बेटे) के भविष्य के लिए रिजवान की तरफ से कुछ राशि फिक्स कर दी जाएगी। इसी शर्त के आधार पर मायके पक्ष ने शव को सुपुर्द-ए-खाक करने दिया था। लेकिन तीन दिन बीत जाने के बाद भी जब रिजवान और उसके परिवार की तरफ से बच्चों के लिए आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु कोई पहल नहीं की गई, तो मृतका के परिजनों ने अपना इरादा बदल लिया। उन्होंने अंततः पति और ससुराल वालों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करवाकर मामले की विस्तृत जांच की मांग की, जिसके परिणामस्वरूप कानूनी प्रक्रिया के तहत कब्र से शव निकालकर पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया गया।











