बिहार के भोजपुर जिले में रहने वाले 31 साल के एक दलित युवक का पिछले 10 महीने से कोई पता नहीं चल पाया है। गायब होने से पहले उसने घरवालों को फोन कर बताया था कि एक्साइज पुलिस उसे पीट रही है, और अब पटना हाईकोर्ट खुद जांच एजेंसी से सवाल पूछ रहा है कि आखिर मामला इतना धीमा क्यों चल रहा है।
आखिरी फोन कॉल में क्या कहा था सनोज ने
13 अगस्त 2025 को सनोज कुमार ने घर फोन कर बताया कि बिहिया के पास एक्साइज विभाग ने उसे हिरासत में ले लिया है। उसी कॉल में उसने कहा था, 'मुझे फोन मत करो, एक्साइज पुलिस मुझे पीट रही है.' इसके कुछ देर बाद उसका मोबाइल बंद हो गया और तब से वह कभी संपर्क में नहीं आया। परिवार के मुताबिक यही आखिरी बार था जब उन्होंने सनोज की आवाज सुनी थी।
पांच जिलों में भटकता रहा परिवार
सनोज के परिजनों का आरोप है कि हिरासत में ही उसकी हत्या कर दी गई और शव को ठिकाने लगा दिया गया। इसके बाद के महीनों में परिवार ने भोजपुर, पटना, बक्सर, छपरा और औरंगाबाद जिलों में जगह-जगह उसकी तलाश की। जहां भी कोई अज्ञात शव मिलने की खबर आती, परिवार के लोग वहां पहुंच जाते, इस उम्मीद में कि शायद कोई सुराग मिल जाए, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। थक हार कर परिवार ने न्याय की उम्मीद में राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दोनों का दरवाजा खटखटाया।
पटना हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को लगाई फटकार
आखिरकार सनोज के पिता ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की सुस्त रफ्तार पर तीखी नाराजगी जताई और टिप्पणी की कि हालात ऐसे दिख रहे हैं जैसे जांच एजेंसी खुद आरोपियों को बचाने में लगी हो। कोर्ट ने पुलिस को साफ निर्देश दिया कि वह जांच में तेजी लाए और पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से पड़ताल करे।
सीसीटीवी फुटेज ने खोली बयानों की पोल
जांच में यह बात सामने आई कि सनोज के मोबाइल की आखिरी लोकेशन जगदीशपुर एक्साइज थाने के आसपास दर्ज हुई थी। वहीं एक्साइज अधिकारियों के बयान बार-बार बदलते रहे। पहले उन्होंने सनोज को हिरासत में लेने से ही इनकार कर दिया, बाद में मान लिया कि उन्होंने तीन लोगों को पकड़ा था। एक मौके पर अधिकारियों ने दावा किया कि एक युवक चलती गाड़ी से कूदकर भाग गया था, लेकिन जब पटना हाईकोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज देखी, तो इस दावे पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए।
सात गिरफ्तार, फिर भी सनोज का कोई सुराग नहीं
जांच के बाद एक्साइज विभाग के दो एएसआई, तीन होमगार्ड जवान और दो निजी ड्राइवरों समेत कुल सात लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इनमें शामिल सभी सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निलंबित भी कर दिया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी जवाब का इंतजार कर रहा है, आखिर सनोज कुमार है कहां? इतनी गिरफ्तारियों के बावजूद 10 महीने बीत जाने पर भी उसका कोई सुराग नहीं मिल सका है।











