बिहार में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बेहद बड़ी परियोजना पर काम शुरू हो चुका है। पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे (NH-139E) के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है और इसके लिए सर्वे का काम काफी तेजी से किया जा रहा है। इस एक्सप्रेसवे के तैयार होने से न केवल पटना और पूर्णिया के बीच की दूरी बेहद कम समय में तय की जा सकेगी, बल्कि पड़ोसी देशों नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं के करीब होने के कारण इसे रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि, इस बड़ी विकास योजना के बीच जमीन मालिकों और किसानों का विरोध भी सामने आ रहा है, जो कम मुआवजा मिलने की वजह से सरकार से नाराज हैं और सही दाम की मांग कर रहे हैं।
सड़क परियोजनाओं की रफ्तार और गजट प्रक्रिया
बिहार राज्य में सड़कों के नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए NHAI लगातार कई बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इसमें खगड़िया से लेकर पूर्णिया तक जाने वाले NH-31 को फोरलेन में बदलने का काम काफी तेजी से चल रहा है। इसके साथ ही पटना-पूर्णिया एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर भी प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। NHAI के पूर्णिया प्रक्षेत्र के परियोजना निदेशक प्रवीण कुमार कटियार ने इस संबंध में अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इस एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा सर्वेक्षण कार्य बहुत तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। परियोजना से संबंधित 3A गजट का प्रकाशन पहले ही किया जा चुका है। वर्तमान में जमीन की पैमाइश, भौतिक सत्यापन और सीमा तय करने के लिए पिलर लगाने का काम ग्राउंड पर किया जा रहा है। इसके तुरंत बाद प्रशासन की ओर से 3D गजट जारी किया जाएगा, जिसके आधार पर प्रभावित रैयतों और किसानों को जमीन का मुआवजा देने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी जाएगी।
एक्सप्रेसवे की खासियतें और कनेक्टिविटी योजनाएं
यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह से एक एक्सेस कंट्रोल हाईवे होगा, जिसे आधुनिक यातायात की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इस मार्ग पर गाड़ियों को अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की अनुमति होगी, जिससे सफर बहुत सुरक्षित और तेज हो जाएगा। पटना से पूर्णिया के पूरे मार्ग में वाहनों के चढ़ने और उतरने के लिए कुल 21 कनेक्टिविटी प्वाइंट निर्धारित किए गए हैं। इनमें से 8 कनेक्टिविटी प्वाइंट अकेले पूर्णिया जिले की सीमा के भीतर तैयार किए जाएंगे। इसके तहत सुखसेना और बनमनखी जैसे प्रमुख इलाकों में MDR यानी मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड के माध्यम से भी एक्सप्रेसवे को जोड़ा जाएगा, ताकि स्थानीय लोग भी इस तेज सड़क नेटवर्क का पूरा फायदा उठा सकें।
जमीन मुआवजे को लेकर बढ़ा आक्रोश
इस एक्सप्रेसवे के जरिए पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आने, नए उद्योग धंधे शुरू होने और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन इन सबके बीच जमीन की कीमतों को लेकर शुरू हुआ विवाद एक बड़ी चुनौती बन गया है। जिन किसानों की जमीन इस सड़क के निर्माण के लिए ली जा रही है, वे मुआवजे की सरकारी दरों से बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं। किसानों का पक्ष है कि बिहार में लंबे समय से साल 2014 की न्यूनतम मूल्यांकन दर यानी MVR ही लागू थी। अब जब सरकार ने इस दर में संशोधन किया है, तो ग्रामीण इलाकों की जमीन की दरों में महज 1.6 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी की गई है। किसानों का कहना है कि 2014 से लेकर अब तक खुले बाजार में जमीन की वास्तविक कीमतें 25 से 40 गुना तक बढ़ चुकी हैं। ऐसे में सरकारी नियमों के तहत तय किया गया मुआवजा बाजार भाव के मुकाबले काफी कम है, जो उनके साथ पूरी तरह से अन्याय है।
एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और एयरोसिटी का मास्टर प्लान
एक्सप्रेसवे के साथ-साथ इस इलाके के समग्र विकास को लेकर भी सरकार की बड़ी योजनाएं हैं। बिहार सरकार के भू-राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे राज्य के विकास के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। चूंकि पूर्णिया से हवाई सेवाएं शुरू हो चुकी हैं, इसलिए इस नए एक्सप्रेसवे की सीधी कनेक्टिविटी पूर्णिया एयरपोर्ट से भी सुनिश्चित की जाएगी। हवाई अड्डे तक जाने वाली इस संपर्क सड़क के किनारे एक आधुनिक एयरोसिटी का निर्माण किया जाएगा। इस एयरोसिटी में बड़े शॉपिंग मॉल, मनोरंजन पार्क, व्यावसायिक परिसर और आवासीय कॉलोनियां विकसित की जाएंगी। भू-राजस्व मंत्री के अनुसार, इन योजनाओं के पूरा होने के बाद पूर्णिया आने वाले समय में एक बड़े सैटेलाइट टाउनशिप के रूप में तब्दील हो जाएगा, जिससे पूरे सीमांचल क्षेत्र की आर्थिक सूरत बदल जाएगी।
यात्रा दूरी में कमी और रणनीतिक महत्व
वर्तमान समय में पूर्णिया से पटना जाने के लिए लोगों को काफी लंबी दूरी और समय तय करना पड़ता है। अगर कोई खगड़िया के रास्ते पटना जाता है, तो उसे करीब 310 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, जिसमें लगभग 7 घंटे लग जाते हैं। वहीं, अररिया और दरभंगा के रास्ते फोरलेन सड़क से जाने पर यह दूरी बढ़कर लगभग 360 किलोमीटर हो जाती है। नया एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी और समय दोनों ही काफी कम हो जाएंगे, जिससे आम जनता और माल ढुलाई करने वाले वाहनों को भारी राहत मिलेगी। इसके अलावा, बांग्लादेश और नेपाल की सीमाओं के बेहद नजदीक होने के कारण यह एक्सप्रेसवे सुरक्षा बलों के लिए भी रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। लेकिन इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए यह आवश्यक है कि किसानों की चिंताओं को दूर करते हुए उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।













