बिहार के पूर्णिया जिले से बीमा धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सड़क पर चलने वाली एक प्राइवेट बस का बीमा कथित तौर पर एक मोटरसाइकिल के नाम पर करवाया गया निकला। यह पूरा मामला तब खुला जब पिछले साल हुए एक बस हादसे में एक यात्री की जान चली गई और मुआवजे के दावों की जांच शुरू हुई। जांच में सामने आया कि जिस पॉलिसी को बस का बीमा बताया जा रहा था, वह असल में एक बजाज डिस्कवर मोटरसाइकिल के नाम पर जारी हुई थी। इसके बाद बीमा कंपनी ने करोड़ों रुपये की ठगी की आशंका जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
बायसी में हुआ था बस हादसा
यह मामला 30 जनवरी 2025 को पूर्णिया जिले के बायसी थाना क्षेत्र में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है। कृष्णारथ नाम की यह बस पटना से सिलीगुड़ी की ओर जा रही थी, तभी रास्ते में यह दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में यात्री संजय कुमार सरदा की मौत हो गई, जबकि नौ अन्य यात्री घायल हो गए। बस का रजिस्ट्रेशन नंबर BR-31-PA-1567 बताया गया है और इसकी मालकिन सुचिता चौधरी हैं। हादसे के बाद पीड़ितों और मृतक के परिजनों ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण यानी मैक्ट में मुआवजे के लिए याचिकाएं दाखिल कीं। इन याचिकाओं में दावा किया गया कि बस का बीमा बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी से करवाया गया था।
दस मामलों की जांच में खुली पोल
उत्तर दिनाजपुर के मैक्ट न्यायालय में इस हादसे से जुड़े कुल दस मोटर दुर्घटना दावा मामले दाखिल हुए थे। इन सभी मामलों की सुनवाई के दौरान जब बीमा कंपनी ने बस की पॉलिसी की पड़ताल शुरू की, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। पता चला कि जिस पॉलिसी नंबर का हवाला देकर बस का बीमा होने का दावा किया जा रहा था, वह पॉलिसी असल में संजीब रुईदास नाम के व्यक्ति की एक बजाज डिस्कवर मोटरसाइकिल के नाम पर जारी हुई थी, जबकि दुर्घटनाग्रस्त वाहन एक व्यावसायिक यात्री बस थी। कंपनी ने जब अपने डेटाबेस में इस पॉलिसी नंबर का मिलान किया, तो यह भी साफ हो गया कि उस बस के नाम पर कभी कोई अलग बीमा पॉलिसी जारी ही नहीं हुई थी। प्रारंभिक जांच में शक जताया गया कि व्यावसायिक बस की ज्यादा प्रीमियम राशि से बचने के लिए जानबूझकर सस्ती दोपहिया वाहन की पॉलिसी का सहारा लिया गया।
सेगमेंट मिसमैच और फर्जी पॉलिसी का मामला
बीमा कंपनी की आंतरिक जांच में तीन बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं। पहली, वाहन के सेगमेंट में मिसमैच, यानी बस के लिए मोटरसाइकिल की पॉलिसी का इस्तेमाल। दूसरी, कम प्रीमियम चुकाकर ज्यादा जोखिम वाले व्यावसायिक वाहन का बीमा कवर हासिल करने की कोशिश। और तीसरी, दुर्घटना के बाद मुआवजे के दावे के लिए एक ऐसी पॉलिसी का सहारा लेना, जो सिरे से बस के नाम पर मौजूद ही नहीं थी। इन सबूतों के आधार पर बीमा कंपनी को यह पूरा मामला बड़े स्तर की धोखाधड़ी जैसा लगा।
बस मालकिन और मोटरसाइकिल मालिक के खिलाफ एफआईआर
पर्याप्त सबूत हाथ लगने के बाद बीमा कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि ने बायसी थाने में शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में बस की मालकिन सुचिता चौधरी और मोटरसाइकिल के मालिक संजीब रुईदास, दोनों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है और अब इस पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस बोली, दस्तावेजों की हो रही पड़ताल
बायसी थाना प्रभारी ने बताया कि बीमा कंपनी की ओर से लिखित आवेदन मिला है और उसी के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल पुलिस बस और मोटरसाइकिल दोनों से जुड़े सभी दस्तावेज, रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड और बीमा पॉलिसी के कागजातों की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह फर्जीवाड़ा किस स्तर पर और किसकी मिलीभगत से किया गया।











