बिहार के पश्चिम चम्पारण जिले में रामनगर प्रखंड के बड़ा बेलवा गांव के पास एक बाघ ने बछड़े को अपना निवाला बना लिया, जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। घटना गुरुवार शाम की है, जब मसान नदी के किनारे स्थित सरेह में चर रहा एक बछड़ा अचानक गायब हो गया और तलाश करने पर उसका आधा खाया हुआ शव मिला। जंगल के इस सबसे बड़े शिकारी जानवर की आबादी वाले इलाके में मौजूदगी से ग्रामीणों के साथ-साथ वन कर्मियों की चिंता भी बढ़ गई है।
गन्ने के खेत में छिपा था बाघ
बड़ा बेलवा गांव के रहने वाले सुधीर यादव अपनी गाय और बछड़े को गुरुवार को मसान नदी के पास सरेह में चराने ले गए थे। इसी बीच पास के गन्ने के खेत में छिपे बाघ ने मौका पाकर बछड़े पर हमला कर दिया और उसे मार डाला। शाम को जब सुधीर यादव मवेशियों को लेकर घर लौटने लगे, तो बछड़ा उन्हें कहीं नजर नहीं आया। पहले उन्होंने खुद आसपास खोजबीन की, लेकिन जब कुछ पता नहीं चला तो कई अन्य ग्रामीण भी उनके साथ तलाश में जुट गए। थोड़ी देर बाद सरेह में बछड़े का शव मिला, जिसके इर्द-गिर्द बाघ के पंजों के ताजा निशान भी साफ दिखाई दे रहे थे। शव आधा ही बचा था, जिससे साफ हो गया कि बाघ उसे खाकर वहीं से निकल गया था।
रेंजर ने की बाघ के हमले की पुष्टि
घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद रघिया रेंज के रेंजर राजेश राम अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। चूंकि तब तक रात हो चुकी थी, इसलिए टीम ने उस वक्त कोई बड़ी तलाशी अभियान नहीं चलाया, लेकिन ग्रामीणों को घर से बाहर न निकलने और सतर्क रहने की हिदायत जरूर दी। रेंजर राजेश राम ने भी माना कि घटनास्थल पर मिले पगचिह्न बाघ के ही हैं, जिससे इलाके में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि हो गई।
अब तक नहीं मिला बाघ का सुराग
शुक्रवार सुबह से चिउंटाहा और रघिया रेंज के वनकर्मी लगातार बाघ के पगचिह्नों के सहारे उसकी लोकेशन का पता लगाने में जुटे हुए हैं। टीम यह जानने की कोशिश कर रही है कि हमले के बाद बाघ आखिर किस दिशा में गया, लेकिन अब तक कोई पुख्ता सुराग हाथ नहीं लगा है। इलाके में बाघ की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में भारी डर का माहौल बना हुआ है। खेती के इस अहम मौसम में भी किसान खेतों की तरफ जाने से कतरा रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपनी जान का खतरा सता रहा है, जिससे खेती के काम पर भी असर पड़ने का अंदेशा है।
वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे अकेले सरेह की तरफ बिल्कुल न जाएं। साथ ही ग्रामीणों को अपने मवेशियों पर पैनी नजर रखने और शाम ढलने के बाद खेतों की ओर न जाने की सलाह भी दी गई है, ताकि किसी और अनहोनी को टाला जा सके।



















