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1.80 करोड़ की लागत से बनी हनुमान अंश ने 41 दिनों में बटोरे 300 करोड़, 3 महिला निर्माताओं का चमका सिताराबॉलीवुड
19 सित॰ 2026, 6:04 pm (39 दिन पहले)· 4

1.80 करोड़ की लागत से बनी हनुमान अंश ने 41 दिनों में बटोरे 300 करोड़, 3 महिला निर्माताओं का चमका सितारा

महज 1.8 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार हुई फिल्म हनुमान अंश ने सिनेमाघरों में 41 दिनों के भीतर 300 करोड़ रुपये का वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर लिया है। 60-60 लाख रुपये लगाने वाली तीन महिला निर्माताओं के दम पर बनी इस परियोजना की सफलता के बाद अब इसे ट्राइलॉजी में बदलने की तैयारी चल रही है।

कम बजट की स्वतंत्र सिनेमाई कहानियों ने जब भी अपनी सादगी और आस्था के बल पर दर्शकों के दिलों को छुआ है, बॉक्स ऑफिस पर अप्रत्याशित चमत्कार देखने को मिले हैं। ऐसा ही एक बड़ा करिश्मा हालिया रिलीज फिल्म हनुमान अंश के साथ हुआ है। महज 180 लाख रुपये यानी 1.8 करोड़ रुपये के बेहद मामूली खर्च में बनी इस फिल्म ने रिलीज के 41वें दिन वैश्विक स्तर पर 300 करोड़ रुपये की कमाई का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। बॉक्स ऑफिस पर मिली इस अप्रत्याशित सुनामी ने न सिर्फ उद्योग पंडितों को हैरान कर दिया है, बल्कि फिल्म से जुड़े हर एक सदस्य को मालामाल कर दिया है। इस अप्रत्याशित वित्तीय सफलता का सबसे बड़ा लाभ उन तीन महिला निर्माताओं को मिला है, जिन्होंने अपनी व्यक्तिगत जमापूंजी दांव पर लगाकर इस प्रोजेक्ट को साकार किया था।

तीन अलग पीढ़ियों की महिलाओं का साझा आर्थिक निवेश

हनुमान अंश के निर्माण की नींव तीन महिला निर्माताओं नम्रता सिंह, रागिनी सोना और अनुप्रिया नागर के आपसी भरोसे और आर्थिक सहयोग पर टिकी थी। फिल्म को पूरा करने के लिए इन तीनों ने बराबर-बराबर यानी 60-60 लाख रुपये का योगदान दिया। दिलचस्प बात यह है कि ये तीनों महिलाएं अलग-अलग पीढ़ियों से ताल्लुक रखती हैं और तीनों के जुड़ने का सफर भी एक-दूसरे से काफी जुदा रहा है। दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी ने भी इस फिल्म की सराहना करते हुए निर्माता अनुप्रिया नागर की भूमिका की प्रशंसा की थी, जिसके बाद सार्वजनिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया था।

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चर्चाओं के बीच यह भ्रम फैल गया था कि शायद अनुप्रिया नागर ने पूरी लागत अकेले वहन की है या उन्होंने ही इस फिल्म को क्यूरेट और लिखा है। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए अनुप्रिया नागर ने अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि वे तीनों महिला निर्माताओं में सबसे कम उम्र की हैं और कुल 1.8 करोड़ रुपये के बजट में उनका हिस्सा केवल एक तिहाई यानी 60 लाख रुपये रहा है। अनुप्रिया ने बताया कि वे इस प्रोजेक्ट से तब जुड़ीं जब मुख्य शूटिंग पूरी हो चुकी थी और निर्माताओं को पोस्ट-प्रोडक्शन कार्यों के लिए पैसों की तत्काल जरूरत थी।

नीम करौली बाबा से मिली प्रेरणा और ब्रिटेन की कमाई का निवेश

फिल्म में अपनी पूंजी लगाने के फैसले के पीछे के आध्यात्मिक संदर्भ को साझा करते हुए अनुप्रिया नागर ने बताया कि उन्हें यह आर्थिक योगदान देने का विचार नीम करौली बाबा से मिला। उनके मुताबिक, महाराज जी ने उनसे कहा था कि जब उन्होंने इतने वर्षों तक यूके में पार्ट-टाइम काम किया है, तो क्यों न वे इस फिल्म के माध्यम से खुद को पूरी तरह भक्ति भाव में समर्पित कर दें। इसी सलाह के बाद उन्होंने बिना किसी लंबे नफा-नुकसान के सीधे 60 लाख रुपये पोस्ट-प्रोडक्शन स्टेज पर लगा दिए।

फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने भी इस बात की पुष्टि की और कहा कि अनुप्रिया नागर ने ऐसे नाजुक मोड़ पर टीम की मदद की जब एडिटिंग और फिनिशिंग के लिए फंड की सख्त दरकार थी। निर्देशक ने यह भी साफ किया कि अनुप्रिया द्वारा कहानी लिखने या उसे क्यूरेट करने की बातें पूरी तरह निराधार और झूठी हैं, जिनका खुद अनुप्रिया ने भी खंडन किया है। विशाल चतुर्वेदी ने इस दौरान रागिनी सोना और नम्रता सिंह के शुरुआती संघर्ष को याद करते हुए कहा कि रागिनी सोना ने बिना किसी बड़ी सुरक्षा या गारंटी के अपनी पूंजी लगाई थी और नम्रता सिंह ने भी अपनी पूरी हिस्सेदारी के पैसे लगाए। विशाल ने बताया कि रागिनी सोना पुरानी निर्माता हैं और वे भी बचपन से नीम करौली बाबा से दिल से जुड़ी रही हैं।

26 दिन की योजना और 22 दिनों में पूरी हुई अनुशासित शूटिंग

हनुमान अंश की यह भारी-भरकम वित्तीय कामयाबी केवल किस्मत की देन नहीं, बल्कि कड़े वित्तीय अनुशासन का नतीजा है। निर्माता रागिनी सोना का स्पष्ट मानना रहा है कि यदि कोई प्रोजेक्ट अपने तय बजट की सीमा लांघ जाता है, तो उसके लिए मुनाफा कमाना बेहद मुश्किल हो जाता है। उन्होंने निर्देशक विशाल चतुर्वेदी को हमेशा बजट के दायरे में रहकर काम करने की सलाह दी थी। इसके साथ ही, जहाँ खर्च करना बेहद अनिवार्य था, वहाँ उन्होंने निर्देशक को पूरी रचनात्मक स्वतंत्रता भी प्रदान की।

निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने सीमित संसाधनों के प्रबंधन का खुलासा करते हुए बताया कि टीम 26 दिनों के शेड्यूल और बजट के साथ शूटिंग करने उतरी थी। लेकिन सेट पर जैसे ही उन्हें यह अहसास हुआ कि तय बजट में पैसे कम पड़ सकते हैं, उन्होंने काम की गति बढ़ाई और महज 22 दिनों के भीतर ही पूरी शूटिंग समेट ली। पूरी शूटिंग असली लोकेशन्स पर की गई, जिसकी वजह से स्क्रीन पर एक स्वाभाविक सादगी दिखाई दी और इसी सादगी को आम दर्शकों ने हाथों-हाथ लिया।

ओटीटी की कतार और तीन फिल्मों की भव्य ट्राइलॉजी का रोडमैप

सिनेमाघरों में टिकट खिड़की पर 300 करोड़ रुपये का पहाड़ खड़ा करने के बाद अब हनुमान अंश के डिजिटल अधिकारों को लेकर भी होड़ मच गई है। निर्माता रागिनी सोना के अनुसार, फिल्म को खरीदने के लिए तीन प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने दिलचस्पी दिखाई है और अब उन्हें चारों तरफ से बड़े-बड़े ऑफर मिल रहे हैं। हालांकि, रागिनी सोना ने यह साफ किया कि इस फिल्म को कभी भी सीधे ओटीटी रिलीज के मकसद से नहीं बनाया गया था। निर्माताओं ने शुरुआत से ही सिनेपोलिस के साथ डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर के रूप में बातचीत रखी थी और वे इसे केवल बड़े पर्दे पर ही पेश करने को लेकर पूरी तरह स्पष्ट थे।

अब जब हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी ऐतिहासिक सफलता दर्ज कर दी है, तो इसके भविष्य की रूपरेखा भी तय कर ली गई है। को-प्रोड्यूसर नम्रता सिंह के अनुसार, मेकर्स इसे अब एक ट्राइलॉजी के रूप में आगे बढ़ाने जा रहे हैं। पहले से ही दो सीक्वल की रूपरेखा पर काम चल रहा है, और योजना यह है कि इस फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म कहानी को एक बड़े वैश्विक स्तर पर ले जाएगी। सीमित पूंजी, आस्था और अनुशासित निर्माण के साथ शुरू हुआ यह सफर अब भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े स्वतंत्र मुनाफे वाले प्रोजेक्ट्स में शुमार हो चुका है।

सवाल-जवाब

फिल्म हनुमान अंश का कुल निर्माण बजट कितना था?
फिल्म हनुमान अंश का कुल निर्माण बजट लगभग 180 लाख रुपये यानी 1.8 करोड़ रुपये था।
हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर 41 दिनों में कितनी कमाई की है?
फिल्म ने अपनी रिलीज के 41वें दिन वैश्विक स्तर पर 300 करोड़ रुपये का कलेक्शन पार कर लिया है।
इस फिल्म में तीनों महिला निर्माताओं ने कितना-कितना पैसा लगाया था?
नम्रता सिंह, रागिनी सोना और अनुप्रिया नागर ने फिल्म में बराबर-बराबर यानी 60-60 लाख रुपये का निवेश किया था।
अनुप्रिया नागर फिल्म के निर्माण में किस चरण पर शामिल हुई थीं?
अनुप्रिया नागर मुख्य शूटिंग पूरी होने के बाद पोस्ट-प्रोडक्शन और एडिटिंग के चरण में फिल्म से जुड़ी थीं।
क्या अनुप्रिया नागर ने फिल्म की कहानी लिखी या इसे क्यूरेट किया था?
नहीं, निर्देशक विशाल चतुर्वेदी और खुद अनुप्रिया नागर ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने कहानी नहीं लिखी और न ही इसे क्यूरेट किया।
फिल्म की शूटिंग कितने दिनों में पूरी की गई थी?
शुरुआत में 26 दिनों के बजट की योजना थी, लेकिन बजट की कमी को भांपते हुए शूटिंग को 22 दिनों में ही पूरा कर लिया गया।
क्या हनुमान अंश को सीधे ओटीटी पर रिलीज करने की योजना थी?
नहीं, निर्माता रागिनी सोना के अनुसार इसे शुरुआत से ही बड़े पर्दे के लिए बनाया गया था और सिनेपोलिस के साथ डिस्ट्रीब्यूशन साझेदारी की गई थी।
हनुमान अंश को लेकर भविष्य की क्या योजनाएं हैं?
निर्माता इसे अब एक ट्राइलॉजी के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं, जिसके तहत दो सीक्वल बनाने की तैयारी है और तीसरा भाग वैश्विक स्तर पर जाएगा।
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