भारतीय सिनेमा में 1990 का दशक सुरीले संगीत और यादगार गानों के लिए जाना जाता है। साल 1995 में आई फिल्म अकेले हम अकेले तुम का रोमांटिक गाना 'दिल कहता है चल उनसे मिल' आज तीन दशक बीतने के बाद भी उतना ही नया और ताजा महसूस होता है। पर्दे पर आमिर खान और मनीषा कोइराला की खूबसूरत केमिस्ट्री और बैकग्राउंड में बजती सुरीली धुन ने इस गाने को हर वर्ग के श्रोताओं का पसंदीदा बना दिया।
संगीत की दुनिया के दिग्गजों का अद्भुत संगम
इस यादगार गीत की रचना में भारतीय संगीत उद्योग की दिग्गज हस्तियों का योगदान रहा। इस गाने के बोल प्रख्यात गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे, जो उनके करियर के अंतिम दौर की सबसे बेहतरीन रचनाओं में से एक माना जाता है। अनु मलिक के तैयार किए संगीत पर पार्श्व गायक कुमार सानू और अलका याग्निक की जुगलबंदी ने इसमें जान फूंक दी। इस गाने की गायकी और धुनों का तालमेल इतना सटीक था कि यह रिलीज होते ही चार्टबस्टर साबित हुआ।
मंसूर खान और आमिर खान की हिट जोड़ी
फिल्म अकेले हम अकेले तुम का निर्देशन मंसूर खान ने किया था। मंसूर खान और आमिर खान की जोड़ी ने इससे पहले हिंदी सिनेमा को कयामत से कयामत तक और जो जीता वही सिकंदर जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दी थीं। इस निर्देशक और अभिनेता की जोड़ी ने हमेशा ऐसा सिनेमा पेश किया जिसमें कहानियों के साथ संगीत का भी बहुत गहरा महत्व रहा, और यह गाना उसी सफल परंपरा का एक बेहतरीन उदाहरण है।
गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी की अनूठी विरासत
मजरूह सुल्तानपुरी का जीवन सिद्धांतों और बेहतरीन शायरी की एक मिसाल रहा। पेशे से हकीम रहे मजरूह सुल्तानपुरी अपनी बेबाक शायरी और स्वाभिमान के लिए जाने जाते थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीतियों पर लिखी अपनी राजनीतिक कविता के कारण उन्हें दो साल जेल में भी बिताने पड़े थे। इसके बावजूद उन्होंने अपने उसूलों से कभी समझौता नहीं किया। दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने वाले वे पहले गीतकार बने, और 'दिल कहता है चल उनसे मिल' जैसे अमर गानों के जरिए उनकी लेखनी की खुशबू आज भी बरकरार है।



















