वैश्विक शेयर बाजार के सूचकांक तय करने वाली प्रमुख संस्था एमएससीआई ने अपने ग्लोबल इन्वेस्टेबल मार्केट इंडेक्स की पात्रता नियमों में बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है। इस नए परामर्श दस्तावेज के लागू होने से कॉरपोरेट खजाने में बिटकॉइन रखने वाली प्रमुख कंपनियों स्ट्रैटेजी और मेटाप्लैनेट को एमएससीआई के वैश्विक सूचकांकों से बाहर किया जा सकता है। इंडेक्स प्रदाता का यह कदम उन कंपनियों को लक्षित करता है जिन्हें वह गैर-परिचालन संस्थाओं के रूप में वर्गीकृत करता है, यानी ऐसी कंपनियां जो अपने मूल व्यवसाय से सीमित नकदी उत्पन्न करती हैं और मुख्य रूप से बैलेंस शीट पर रखी परिसंपत्तियों के मूल्य पर निर्भर रहती हैं।
पात्रता का नया ढांचा और मूल्यांकन के दो चरण
एमएससीआई द्वारा प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत कंपनियों की पात्रता जांचने के लिए दो स्तरीय प्रक्रिया तैयार की गई है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सूचकांक में शामिल कंपनियां वास्तविक व्यापारिक गतिविधियों से मूल्य बनाए।
- कोर स्क्रीन: यह पहला चरण है जहां यह जांचा जाएगा कि कंपनी के पास पर्याप्त परिचालन परिसंपत्तियां (ऑपरेटिंग एसेट्स) हैं या नहीं।
- एक्स्क्लूजन स्क्रीन: जो कंपनियां कोर स्क्रीन की शर्तों को पूरा करने में विफल रहेंगी, उनका मूल्यांकन पांच वित्तीय अनुपातों के आधार पर किया जाएगा।
एक्स्क्लूजन स्क्रीन में शामिल पांच प्रमुख मापदंड परिचालन परिसंपत्ति तीव्रता, व्यय तीव्रता, नकद प्रवाह, उचित मूल्य तीव्रता और पूंजी निर्भरता हैं। यदि कोई कंपनी इन पांच वित्तीय संकेतों में से कम से कम चार मापदंडों में विफल रहती है, तो उसे एमएससीआई सूचकांकों में शामिल होने के लिए अयोग्य माना जाएगा। इंडेक्स प्रदाता के अनुसार, यह ढांचा उन कंपनियों की पहचान करता है जो प्राथमिक रूप से गैर-परिचालन परिसंपत्तियों को इकट्ठा करके मूल्य बनाती हैं और अपने विकास के लिए बाहरी पूंजी या बाजार के उतार-चढ़ाव पर अत्यधिक निर्भर रहती हैं।
प्रभावित कंपनियां और सार्वजनिक वॉचलिस्ट के नियम
प्रस्ताव स्वीकृत होने की स्थिति में एमएससीआई ऑल कंट्री वर्ल्ड इंडेक्स इन्वेस्टेबल मार्केट इंडेक्स (एसीडब्ल्यूआई आईएमआई) से बाहर होने वाली तीन प्रमुख कंपनियां स्ट्रैटेजी, मेटाप्लैनेट और ब्रिटेन स्थित येलो केक शामिल हैं। हालांकि, सूचकांक में पहले से मौजूद कंपनियों के लिए एमएससीआई ने कुछ राहत भरे प्रावधान भी रखे हैं ताकि इंडेक्स में अचानक बड़ा फेरबदल न हो।
वर्तमान में सूचकांक का हिस्सा बनी कंपनियों को हटाने से पहले उन्हें लगातार दो वार्षिक रिपोर्टिंग अवधियों में इन वित्तीय परीक्षणों में विफल होना पड़ेगा। इसके अलावा, जिन कंपनियों ने केवल अपनी नवीनतम वित्तीय रिपोर्ट के आधार पर इन शर्तों का उल्लंघन किया है, उनके लिए एक सार्वजनिक वॉचलिस्ट बनाई जाएगी। एथेरियम खजाना रखने वाली कंपनी शार्पलिंक के साथ-साथ सेंटर लेबोरेटरीज और लिडिया होल्डिंग को इस प्रस्तावित वॉचलिस्ट में रखा गया है। यदि ये कंपनियां अगले वार्षिक समीक्षा में भी मापदंडों पर खरी नहीं उतरती हैं, तो उन्हें अंतिम रूप से हटा दिया जाएगा।
संस्थागत निवेश और क्रिप्टो बाजार पर संभावित असर
प्रमुख वैश्विक इक्विटी सूचकांकों में किसी कंपनी का शामिल होना या उससे बाहर होना बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि पैसिव फंड और बड़े संस्थागत निवेशक इन्हीं सूचकांकों को ट्रैक करके भारी मात्रा में पूंजी निवेश करते हैं। सूचकांक से बाहर किए जाने पर इन कंपनियों के शेयरों से बड़े पैमाने पर पैसिव फंड की निकासी हो सकती है, जिससे इनके शेयर मूल्यों और क्रिप्टो बाजार की धारणा पर सीधा असर पड़ सकता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब बिटकॉइन $62,841 के आसपास कारोबार कर रहा है और लघु अवधि में तकनीकी दबाव का सामना कर रहा है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक बाजारों में जोखिम की भावना बनी हुई है, जिससे क्रिप्टो संपत्तियों पर भी असर देखा जा रहा है। एमएससीआई द्वारा बिटकॉइन और अन्य डिजिटल परिसंपत्ति खजाने वाली कंपनियों के संबंध में यह दूसरी बड़ी चर्चा है, इससे पहले नवंबर में भी इस विषय पर गहन विचार-विमर्श हुआ था।
निर्णय की समयसीमा और आगे की राह
एमएससीआई ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परामर्श दस्तावेज केवल एक प्रस्ताव है और इस पर बाजार प्रतिभागियों से प्रतिक्रिया मांगी जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए निम्नलिखित समयसीमा निर्धारित की गई है
- 30 सितंबर: बाजार सहभागियों से सुझाव और प्रतिक्रिया प्राप्त करने की अंतिम तिथि।
- 16 अक्टूबर: परामर्श के आधार पर अंतिम निर्णय की घोषणा की संभावित तिथि।
- नवंबर: यदि प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो इसे नवंबर इंडेक्स समीक्षा के दौरान लागू किया जाएगा।
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब 30 सितंबर तक आने वाले फीडबैक पर टिकी है, जिसके बाद ही यह तय होगा कि कॉरपोरेट क्रिप्टो खजाने वाली इन दिग्गज कंपनियों का वैश्विक सूचकांकों में क्या भविष्य रहता है।


















