फिल्म उद्योग में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वाले अभिनेता विक्रांत मैसी ने अपनी चर्चित फिल्म 12वीं फेल से जुड़े कई अनछुए पहलुओं को साझा किया है। शेखर सुमन के टॉक शो शेखर टुनाइट में बातचीत के दौरान उन्होंने निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा के साथ काम करने के दौरान मिले अनुभवों, ऑडिशन के क्षणों और शूटिंग के दौरान मिले अनोखे नकद इनामों की यादें ताजा कीं। विक्रांत ने बताया कि इस सिनेमाई सफर के दौरान उन्होंने निर्देशक से करीब ₹300 कमाए थे, जिसे वे मौद्रिक मूल्य से परे अपनी असली पूंजी और तारीफ मानते हैं।
प्रथम मुलाकात और टीवी अभिनेता होने पर उठते सवाल
विधु विनोद चोपड़ा के साथ विक्रांत मैसी का सफर एक दिलचस्प मोड़ से शुरू हुआ था। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत में फिल्म निर्माता राजकुमार हिरानी ने विक्रांत के नाम की सिफारिश विधु विनोद चोपड़ा से की थी। राजकुमार हिरानी ने विक्रांत की स्वतंत्र फिल्म ए डेथ इन द गंज और लोकप्रिय वेब सीरीज मिर्जापुर में उनके अभिनय को देखा था। जब विक्रांत पहली बार विधु विनोद चोपड़ा से मिलने पहुंचे, तो निर्देशक ने उनके काम की सराहना तो की, लेकिन साथ ही एक सीधी और स्पष्ट चुनौती भी सामने रख दी।
बातचीत के दौरान निर्देशक ने चुटकी लेते हुए कहा था कि मिर्जापुर ऐसा शो नहीं है जिसे वे एक एपिसोड से अधिक देख सकें। इसके बाद उन्होंने सवाल किया, "तुम एक टीवी एक्टर हो, लोग तुम्हें घर पर फ्री में देखते हैं, तो वे तुम्हें देखने के लिए थिएटर क्यों आएंगे?" विक्रांत ने इस तीखी टिप्पणी को नकारात्मक रूप में लेने के स्थान पर एक रचनात्मक सलाह के रूप में स्वीकार किया। उनका मानना था कि निर्देशक की बात में एक गहरा व्यावहारिक सच छिपा हुआ था, इसलिए उन्होंने अपनी क्षमता साबित करने और उनके साथ काम करने की इच्छा दोहराई।
ऑडिशन की मुद्रा और पटकथा निर्माण में भागीदारी
विक्रांत मैसी के चयन की प्रक्रिया भी काफी अनोखी रही। ऑडिशन के समय विक्रांत एक खास शारीरिक मुद्रा में बैठे हुए थे। दिलचस्प बात यह है कि यह वही मुद्रा थी जो बाद में दर्शकों को 12वीं फेल के मुख्य ओपनिंग शॉट में देखने को मिली। विक्रांत को उस विशेष स्थिति में बैठा देखकर विधु विनोद चोपड़ा अपनी जगह से उठे और तुरंत घोषणा कर दी कि वे इस अभिनेता को ही निर्देशित करना चाहते हैं।
विक्रांत ने इस पूरी परियोजना के लिए लगभग डेढ़ साल का समय समर्पित किया। आमतौर पर मुख्य अभिनेता शूटिंग शुरू होने से कुछ महीने पहले ही किसी प्रोजेक्ट से जुड़ते हैं, परंतु इस मामले में विधु विनोद चोपड़ा ने विक्रांत को शुरुआत से ही पटकथा और फिल्म विकास की पूरी प्रक्रिया में शामिल रखा। उनसे हर कदम पर उनकी राय पूछी जाती थी कि वे किसी विशेष दृश्य या संवाद के बारे में क्या सोचते हैं। इस अभूतपूर्व पहुंच ने विक्रांत को किरदार की गहराइयों को समझने का एक शानदार अवसर प्रदान किया।
₹300 का नकद इनाम और पिता समान संरक्षक का रिश्ता
सेट के माहौल और विधु विनोद चोपड़ा के सख्त अनुशासन पर बात करते हुए विक्रांत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि निर्देशक स्वभाव से कड़े माने जाते हैं, परंतु इस फिल्म के सफर में वे उनके लिए एक पिता की तरह बन गए। शूटिंग आरंभ होने से पूर्व उन्हें हल्की डांट जरूर पड़ी थी, परंतु एक बार जब कैमरे चलने लगे तो पूरी शूटिंग के दौरान उन्हें एक बार भी डांट का सामना नहीं करना पड़ा। इसके विपरीत, जब भी विक्रांत या कोई अन्य कलाकार बेहतरीन शॉट देता, तो निर्देशक प्रोत्साहन के रूप में ₹10 या ₹20 का नोट थमा दिया करते थे।
पूरी शूटिंग के दौरान विक्रांत ने ऐसे ही शानदार शॉट्स देकर कुल ₹300 जुटाए। विक्रांत के लिए यह ₹300 मात्र कागजी नोट नहीं थे, बल्कि एक महान निर्देशक द्वारा मिली सच्ची सराहना का प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि वह रिश्ता, वह अनुभव और मिली सीख ऐसी पूंजी है जिसे वे अपने पूरे जीवन में संजोकर रखेंगे।


















