भारतीय सिनेमा में अपनी संजीदा और प्रभावशाली अदाकारी के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता रणदीप हुड्डा हर किरदार में पूरी तरह ढल जाने के लिए जाने जाते हैं। चाहे पर्दे पर गंभीर भूमिकाएं निभानी हों या फिर किसी किरदार के लिए शारीरिक रूप से बड़ा बदलाव करना हो, रणदीप ने अपनी अभिनय क्षमता से दर्शकों को हमेशा प्रभावित किया है। हालांकि, सफलता का यह रास्ता उनके लिए आसान नहीं था। एक समय ऐसा भी था जब उन्हें फिल्मों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा और उन्होंने अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए कई साधारण काम किए।
हरियाणा में बीता बचपन और सिनेमा से शुरुआती लगाव
रणदीप हुड्डा का जन्म 20 अगस्त 1976 को हरियाणा के रोहतक जिले में हुआ था। उनके परिवार का माहौल काफी अलग था; उनके पिता पेशे से एक डॉक्टर थे और उनकी मां सामाजिक कार्यों से जुड़ी हुई थीं। माता-पिता के काम के सिलसिले में विदेश में रहने के कारण रणदीप का बचपन अपनी दादी की देखरेख में बीता। स्कूल के दिनों में जब उन्हें अंग्रेजी फिल्में दिखाई जाती थीं, तो वे खुद को उन फिल्मों के नायक के रूप में देखने लगते थे। बचपन से ही उनके मन में अभिनय के प्रति एक गहरा आकर्षण था। हालांकि, उनका परिवार चाहता था कि वे अपनी शिक्षा पूरी करें और किसी सुरक्षित करियर का चुनाव करें।
ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के साथ चलाई टैक्सी
उच्च शिक्षा हासिल करने के उद्देश्य से रणदीप हुड्डा ऑस्ट्रेलिया चले गए। वहां उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ अपने खर्चों को पूरा करने के लिए कई तरह की नौकरियां कीं। इसी दौरान उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की सड़कों पर टैक्सी चलाने का काम भी किया। एक बातचीत में उन्होंने याद किया था कि उनकी कैब में हर तरह के यात्री बैठते थे। इसी दौरान एक बार वेस्टइंडीज के महान क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स भी उनकी टैक्सी में सफर कर चुके थे। इन तमाम परिस्थितियों के बावजूद उनके भीतर छुपा अभिनेता हमेशा जिंदा रहा और आखिरकार वे अभिनय में अपनी किस्मत आजमाने के लिए भारत लौट आए।
'मानसून वेडिंग' से आगाज और थिएटर का सफर
भारत आने के बाद रणदीप को साल 2001 में प्रख्यात निर्देशक मीरा नायर की फिल्म 'मानसून वेडिंग' में काम करने का अवसर मिला। यह एक बड़ा ब्रेक साबित हो सकता था, लेकिन फिल्म की रिलीज के बाद भी उनके करियर को तुरंत वैसी रफ्तार नहीं मिली जिसकी उन्हें उम्मीद थी। रणदीप ने स्वीकार किया था कि उस दौर में उन्हें लगा कि उन्हें अभी अभिनय की बारीकियों को और गहराई से सीखने की जरूरत है। इसके बाद उन्होंने रंगमंच यानी थिएटर का रुख किया और दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करना शुरू किया। थिएटर में काम करते हुए उन्होंने अभिनय के गुर सीखे और अपने हुनर को निखारा।
राम गोपाल वर्मा का भरोसा और 3 साल का इंतजार
रणदीप के करियर में इसके बाद एक अनोखा मोड़ आया जब फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा ने उन्हें अपनी एक बड़ी फिल्म से लॉन्च करने का भरोसा दिया। बातचीत के दौरान जब राम गोपाल वर्मा ने उनसे पूछा कि उन्हें हर महीने अपने खर्च के लिए कितने पैसों की आवश्यकता होगी, तो रणदीप ने 35,000 रुपये प्रतिमाह का सुझाव दिया। इसके बाद रणदीप को लगभग तीन साल तक हर महीने 35,000 रुपये मिलते रहे। इस पूरे समय वे घर पर ही बैठकर उस फिल्म के शुरू होने का इंतजार करते रहे जिसमें उन्हें लॉन्च किया जाना था। हालांकि, समय बीतने के साथ वह प्रोजेक्ट उस तरह आगे नहीं बढ़ सका जैसी योजना बनाई गई थी।
बॉलीवुड में पहचान, हॉलीवुड का अनुभव और निर्देशन
लंबे इंतजार के बाद रणदीप को धीरे-धीरे अच्छी और मजबूत भूमिकाएं मिलनी शुरू हुईं। 'डी', 'रिस्क', 'वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई', 'साहेब बीवी और गैंगस्टर' तथा 'जन्नत 2' जैसी फिल्मों में काम करके उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। साल 2014 में आई फिल्म 'हाईवे' में उन्होंने महाबीर भाटी का किरदार निभाया, जिसकी समीक्षकों और दर्शकों ने जमकर तारीफ की। इसके बाद साल 2016 की फिल्म 'सरबजीत' में सरबजीत सिंह का किरदार निभाने के लिए उन्होंने शारीरिक स्तर पर कड़ा ट्रांसफॉर्मेशन किया, जो काफी चर्चा में रहा। आगे चलकर उन्होंने हॉलीवुड फिल्म 'एक्सट्रैक्शन' में क्रिस हेम्सवर्थ के साथ भी अभिनय किया। हाल ही में उन्होंने फिल्म 'स्वतंत्र वीर सावरकर' में मुख्य भूमिका निभाने के साथ-साथ निर्देशन का जिम्मा भी संभाला, जिससे एक निर्देशक के रूप में भी उनकी नई पहचान बनी।



















