उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी भूभागों में मानसून का व्यापक असर लगातार दिखाई दे रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र (आईएमडी) ने 20 अगस्त के लिए राज्य के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी जारी की है। प्रादेशिक मौसम तंत्र के अनुसार राजधानी देहरादून के साथ-साथ कुमाऊं के बागेश्वर और नैनीताल जिलों में तीव्र वर्षा के प्रबल आसार बने हुए हैं। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए देहरादून तथा बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट लागू किया गया है। इसके अतिरिक्त टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, चंपावत, पिथौरागढ़ एवं उधम सिंह नगर जिलों के लिए आपदा नियंत्रण एजेंसियों ने येलो अलर्ट प्रभावी रखा है। पहाड़ों पर हो रही निरंतर बारिश की वजह से स्थानीय नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा गहरा गया है और आम जनता की दैनिक आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।
पिथौरागढ़ में आपदा: धारचूला में बीआरओ का बैली ब्रिज बहने से सीमांत गांव कटे
सीमांत जिले पिथौरागढ़ में मानसूनी बारिश ने जनजीवन को भारी नुकसान पहुंचाया है। धारचूला तहसील के अंतर्गत कुलागाड़ क्षेत्र में अत्यधिक बारिश और पहाड़ों से आए भारी मलबे के भीषण दबाव के कारण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित बैली ब्रिज टूटकर बह गया है। यह पुल अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था, क्योंकि यह मुख्य मार्ग को भारत-चीन तथा भारत-नेपाल सीमा से जोड़ने का प्रमुख जरिया था।
बैली ब्रिज के ध्वस्त हो जाने के कारण सीमावर्ती व्यास घाटी, दारमा घाटी और चौदास घाटी का सड़क संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। मार्ग अवरुद्ध होने से इन तीनों घाटियों में निवास करने वाली हजारों की आबादी के सामने आवागमन का गंभीर संकट पैदा हो गया है। राशन आपूर्ति और आकस्मिक स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्थानीय निवासियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। सीमा सड़क संगठन के तकनीकी दस्ते और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी प्रभावित स्थान पर मुस्तैद हैं और यातायात को पुनः बहाल करने के लिए वैकल्पिक मार्ग के निर्माण कार्य में जुट गए हैं।
राजधानी देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश का खतरा
राजधानी देहरादून तथा इसके समीपवर्ती इलाकों में बादलों का कड़ा पहरा बना हुआ है। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 20 अगस्त को शहर और आसपास के इलाकों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश के दौर आ सकते हैं। लगातार होने वाली तेज वर्षा से शहरी क्षेत्र के निचले इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्या खड़ी होने की आशंका जताई गई है।
पहाड़ी ढलानों से होने वाले जल प्रवाह के कारण सहस्रधारा और मालदेवता जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने नागरिकों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से बरसाती नालों, रपटों तथा उफनती नदियों के निकट न जाएं। प्रशासन ने यात्रा पर निकलने से पहले आधिकारिक मौसम बुलेटिन और मार्ग की स्थिति की जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी है।
राज्यभर में अगले 5 दिनों का मौसम और आपदा तंत्र की 24 घंटे तैनाती
मौसम विज्ञान केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड भर में अगले 5 दिनों तक मानसून अत्यधिक सक्रिय रहने की संभावना है। 21 अगस्त से 25 अगस्त के बीच प्रदेश के लगभग सभी 13 जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा होने और अनेक स्थानों पर तीव्र गर्जना के साथ तेज बौछारें पड़ने का अनुमान लगाया गया है।
मानसून के इस उग्र रूप को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) ने पूरी प्रशासनिक मशीनरी को हाई अलर्ट पर रखा है। प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और जल पुलिस को 24 घंटे सतर्क रहने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। अति संवेदनशील तथा संवेदनशील क्षेत्रों में स्थापित बाढ़ चौकियों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है, ताकि किसी भी आकस्मिक भूस्खलन या जलभराव की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू किया जा सके।
उधम सिंह नगर: तराई इलाके में 5 दिन का अलर्ट और बाढ़ चौकियों पर सतर्कता
कुमाऊं मंडल के तराई और मैदानी जिले उधम सिंह नगर में पहाड़ों और मैदानी क्षेत्रों दोनों जगह हो रही बारिश को देखते हुए आगामी 5 दिनों के लिए येलो अलर्ट घोषित किया गया है। तराई के समतल भूभाग में बारिश के पानी के भराव और स्थानीय नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
संभावित खतरे से निपटने के लिए जिला आपदा प्रबंधन तंत्र को अलर्ट मोड पर रखा गया है। खटीमा, सितारगंज, काशीपुर और रुद्रपुर जैसे जलभराव के लिहाज से संवेदनशील कस्बों और गांवों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा जल पुलिस को नियमित गश्त बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासनिक टीमें जल निकासी के रास्तों को साफ रखने और प्रभावित इलाकों पर पैनी नजर रख रही हैं।
ऋषिकेश: बारिश रुकने से राहत, गंगा और चंद्रभागा नदी के जलस्तर पर सख्त निगरानी
तीर्थनगरी ऋषिकेश और इसके आसपास के भूभाग में बीती शाम से मूसलाधार बारिश का सिलसिला थम गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों को फौरी राहत मिली है। इसके बावजूद, ऊपरी पर्वतीय इलाकों में लगातार हो रही वर्षा के कारण चंद्रभागा नदी और अन्य स्थानीय बरसाती नालों में पानी का बहाव बेहद तेज बना हुआ है।
ऋषिकेश के प्रमुख त्रिवेणी घाट समेत अन्य गंगा घाटों पर नदी के जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन जल की धारा अभी भी काफी उग्र और वेगवती है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीमें घाटों पर निरंतर निगरानी रख रही हैं। त्रिवेणी घाट पर स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और कांवड़ियों से सुरक्षा नियमों का पालन करने तथा नदी के गहरे पानी में न जाने की बार-बार चेतावनी दी जा रही है।
चमोली: बद्रीनाथ हाईवे पर आवाजाही शुरू, नंदप्रयाग-नंदा नगर मार्ग पर पहाड़ी टूटी
गढ़वाल मंडल के चमोली जिले में मंगलवार दोपहर के बाद से बारिश का दौर रुकने से राहत मिली है। बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर भूस्खलन के बाद जमा हुए मलबे को लोक निर्माण विभाग और हाईवे टीमों ने साफ कर दिया है, जिससे इस मुख्य तीर्थयात्रा मार्ग पर वाहनों का परिचालन दोबारा सुचारू हो गया है। हाईवे खुलने से हजारों तीर्थयात्रियों ने राहत की सांस ली है।
दूसरी ओर, जिले का एक अन्य महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है। नंदप्रयाग से नंदा नगर (घाट) को जोड़ने वाली मुख्य मोटर सड़क पर मूसलाधार बारिश के चलते पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक दरक गया। इस कारण सड़क पर विशालकाय चट्टानें और मलबा आ गिरा, जिससे यह मार्ग पूरी तरह ठप हो गया है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की जेसीबी मशीनें और श्रमिक लगातार मलबा हटाने के काम में जुटे हुए हैं ताकि आवाजाही जल्द बहाल की जा सके।
बागेश्वर और नैनीताल: पहाड़ियों पर भूस्खलन का खतरा और घने कोहरे का अलर्ट
कुमाऊं क्षेत्र के पर्वतीय जिलों बागेश्वर और नैनीताल में मौसम विभाग ने भारी बारिश के साथ-साथ तीव्र आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई है। बागेश्वर जिले की भूस्खलन संभावित पहाड़ियों की स्थिति को देखते हुए तहसील स्तर के सभी अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
नैनीताल जिले में भीमताल, भवाली और नैनीताल नगर के आसपास के इलाकों में रुक-रुक कर भारी बारिश हो रही है। साथ ही, घने कोहरे के कारण दृश्यता (विजिबिलिटी) काफी कम हो गई है। पर्वतीय और घुमावदार सड़कों पर दुर्घटना की संभावना को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने वाहन चालकों को धीमी गति से और अत्यधिक सावधानीपूर्वक गाड़ी चलाने की सलाह दी है।
21 से 25 अगस्त का विस्तृत मौसम पूर्वानुमान
मौसम विज्ञान केंद्र (आईएमडी) द्वारा जारी विस्तृत बुलेटिन के अनुसार 21 अगस्त को टिहरी, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल और देहरादून जिलों में भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। 22 अगस्त को मानसूनी बादलों का प्रभाव और अधिक व्यापक हो जाएगा, जिससे चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, चंपावत और टिहरी सहित अधिकांश जिलों में आकाशीय बिजली चमकने और अति तीव्र बारिश के दौर आ सकते हैं। इसके बाद 23 अगस्त से 25 अगस्त तक पूरे उत्तराखंड राज्य में हल्की से मध्यम वर्षा का क्रम जारी रहेगा और कई क्षेत्रों में मेघगर्जन के साथ बौछारें पड़ती रहेंगी।




















