संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादियों को प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया में राजनीतिक चालबाजियों को तुरंत समाप्त करने का आह्वान किया है। सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत की कार्यवाहक राजदूत योजना पटेल ने स्पष्ट किया कि वैश्विक प्रतिबंध सूची में आतंकियों को शामिल करने या उनका नाम हटाने का निर्णय पूरी तरह से निष्पक्ष होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता का उपयोग किसी भी स्थिति में आतंकियों को बचाने या उन्हें गैर-वाजिब तरीके से सूची से बाहर निकालने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
प्रतिबंध प्रक्रिया में पारदर्शिता और सबूतों की अनिवार्यता
सुरक्षा परिषद की चर्चा के दौरान योजना पटेल ने रेखांकित किया कि आतंकवाद विरोधी तंत्र के तहत लिए जाने वाले निर्णय राजनीतिक हितों के बजाय ठोस साक्ष्यों, निष्पक्षता और पूर्ण पारदर्शिता पर आधारित होने चाहिए। भारत ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी व्यवस्था की साख को नुकसान पहुंचाने वाले राजनीतिक हस्तक्षेप पर तीव्र आपत्ति व्यक्त की। भारतीय पक्ष ने यह संदेश दिया कि सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों को वैश्विक आतंकी खतरों के खिलाफ जिम्मेदारी निभानी चाहिए, न कि अपनी स्थिति का फायदा उठाकर प्रतिबंधित तत्वों को संरक्षण देना चाहिए।
चीन द्वारा तकनीकी रोक के बार-बार इस्तेमाल पर निशाना
यद्यपि भारतीय वक्तव्य में सीधे तौर पर देशों के नाम लेकर संबोधन नहीं किया गया, लेकिन यह प्रहार मुख्य रूप से चीन और पाकिस्तान की गतिविधियों पर केंद्रित था। चीन लगातार तकनीकी रोक और आपत्तियों का सहारा लेकर यूएनएससी की 1267 प्रतिबंध समिति के तहत पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों पर बैन लगाने के प्रस्तावों को टालता रहा है। सुरक्षा परिषद के 15 सदस्य देशों में से चीन अक्सर अकेला ऐसा देश रहा है जो पाकिस्तान की सरजमीं से संचालित होने वाले आतंकी तत्वों के खिलाफ वैश्विक प्रस्तावों पर अड़ंगा लगाता आया है।
लश्कर और जैश जैसे आतंकी गुटों को संरक्षण देने का विरोध
चीन द्वारा रोके गए प्रस्तावों में मुख्य रूप से पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां चलाने वाले प्रमुख आतंकी संगठन शामिल हैं, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के साथ-साथ उनके सहयोगी और फ्रंट संगठन भी शामिल हैं। सुरक्षा परिषद का राजनीतिक ढांचा इस स्थिति को और गंभीर बनाता है, जहां चीन के पास वीटो अधिकार वाला स्थाई पद है, वहीं पाकिस्तान इस वर्ष के अंत तक अस्थाई सदस्य के रूप में परिषद में शामिल है। भारत के इस कड़े बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी कदमों को द्विपक्षीय राजनीतिक हितों की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा।




















