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अविनाश वधावन के 57वें जन्मदिन पर जानिए इंजीनियरिंग और एमबीए छोड़कर कैसे बने थे 90 के दशक के स्टारबॉलीवुड
2 नव॰ 2026, 4:20 am (3 घंटे पहले)· 1

अविनाश वधावन के 57वें जन्मदिन पर जानिए इंजीनियरिंग और एमबीए छोड़कर कैसे बने थे 90 के दशक के स्टार

नब्बे के दशक में कई बड़ी हिट फिल्में देने वाले अभिनेता अविनाश वधावन ने मैनेजमेंट की पढ़ाई बीच में छोड़कर सिनेमा की दुनिया में कदम रखा था। अपने शुरुआती दौर में कई चर्चित फिल्मों के लिए पहली पसंद रहने के बाद व्यक्तिगत जीवन की उलझनों और गलत विकल्पों ने उनके सफर को काफी प्रभावित किया।

सिनेमा जगत में कुछ कलाकार ऐसे भी रहे हैं जिन्होंने शुरुआती दौर में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की, मगर बाद के वर्षों में वे मुख्यधारा के बड़े पर्दे से धीरे-धीरे ओझल हो गए। नब्बे के दशक के शुरुआती दौर में अभिनेता अविनाश वधावन को फिल्म उद्योग का अगला बड़ा चेहरा माना जा रहा था। उस दौर में उनके पास फिल्मों के अनगिनत प्रस्ताव आ रहे थे। कई बड़ी और ऐतिहासिक फिल्मों के लिए निर्माता-निर्देशकों की शुरुआती पसंद वही हुआ करते थे, जिन्हें बाद में शाहरुख खान, अजय देवगन और अक्षय कुमार जैसे कलाकारों ने पर्दे पर जीवंत किया। हालांकि कुछ गलत विकल्पों, समय की चूक और निजी जिंदगी की उठापटक ने उनके सुनहरे फिल्मी सफर का रुख पूरी तरह बदल दिया। दो नवंबर 1968 को जन्मे अभिनेता अपना 57वां जन्मदिन मना रहे हैं, और इस मौके पर उनका यह पूरा सफर फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

स्कॉलरशिप से लेकर विज्ञापनों तक का सफर

मुंबई में जन्मे अविनाश वधावन पढ़ाई-लिखाई के मामले में हमेशा अव्वल दर्जे पर रहे। कॉलेज के दिनों में अपनी अकादमिक उपलब्धियों के बल पर उन्होंने कई प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप हासिल की थीं। उन्होंने दिल्ली से इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की और फिर उच्च प्रबंधन शिक्षा के लिए एमबीए करने का इरादा बनाया। प्रतियोगी परीक्षा में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें आईआईएम लखनऊ में दाखिला मिल गया था। हालांकि उन्होंने जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से अपनी एमबीए की पढ़ाई आगे बढ़ाने का विकल्प चुना। इसी अध्ययन के दौरान एक जाने-माने फैशन डिजाइनर की नजर उन पर पड़ी और उन्हें मॉडलिंग का सीधा ऑफर मिल गया। मॉडलिंग जगत में कदम रखते ही उनकी मांग इतनी तेजी से बढ़ी कि उन्होंने महज एक साल के भीतर 67 विज्ञापनों और बड़े फैशन शोज में काम कर डाला। विज्ञापनों की व्यस्त दिनचर्या के चलते पढ़ाई जारी रखना बेहद मुश्किल हो गया, जिसके चलते दो सेमेस्टर पूरे करने के बाद उन्होंने एमबीए बीच में ही छोड़ दिया और पूर्णकालिक अभिनय की राह पकड़ ली।

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बॉक्स ऑफिस पर धमाका और लगातार प्रोजेक्ट्स

अस्सी के दशक के अंतिम वर्षों में फिल्मों में छोटी-बड़ी शुरुआत करने के बाद अविनाश वधावन को वास्तविक स्टारडम साल 1991 में आई फिल्म 'आई मिलन की रात' से हासिल हुआ। इस फिल्म ने टिकट खिड़की पर जबर्दस्त सफलता दर्ज की और इसके गानों के साथ-साथ अविनाश का नाम भी हर दर्शक की जुबान पर चढ़ गया। इसके बाद उन्होंने 'बलमा', 'जुनून', 'दिल की बाजी', 'गीत' और 'पापी गुड़िया' जैसी कई चर्चित फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं। उस समय के निर्माता उन्हें एक सुरक्षित और भरोसेमंद मुख्य अभिनेता मानते थे। इसी भरोसे के दम पर अगले चार से पांच वर्षों के भीतर उन्होंने करीब 17 से 18 नई फिल्में साइन कर ली थीं। वर्ष 1991 और 1992 के दौरान काम की संख्या और डायरेक्टर्स की पसंद के लिहाज से वह अजय देवगन, शाहरुख खान और अक्षय कुमार जैसे उभरते सितारों से भी आगे चल रहे थे।

हाथ से फिसलीं मील का पत्थर साबित हुईं फिल्में

अविनाश वधावन ने अपने करियर के सुनहरे दौर को याद करते हुए एक बातचीत में साझा किया था कि कई ऐतिहासिक प्रोजेक्ट्स उनके हाथ से फिसल गए। बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई फिल्म 'फूल और कांटे' का मुख्य किरदार सबसे पहले अविनाश को ही ऑफर किया गया था। इसी तरह कल्ट रोमांटिक फिल्म 'दीवाना' में भी उन्हें एक अहम रोल की पेशकश की गई थी, जिसे बाद में शाहरुख खान ने निभाया और स्टारडम की नई इबारत लिख दी। इसके अलावा यश चोपड़ा की फिल्म 'ये दिल्लगी' को लेकर एक महत्वपूर्ण मीटिंग तय थी, लेकिन अविनाश वहां तय वक्त पर नहीं पहुंच सके और देर से पहुंचे। इस एक लापरवाही का खामियाजा यह हुआ कि वह रोल सैफ अली खान की झोली में चला गया। ऐसे अहम मौकों के हाथ से निकलने का सीधा असर उनके आगे के करियर ग्राफ पर पड़ा।

पारिवारिक उथल-पुथल और विदेश में लंबा प्रवास

करियर के बिल्कुल शुरुआती पड़ाव पर ही अविनाश ने साल 1990 में छाया पारेख से शादी कर ली थी और बेहद कम उम्र में वह पिता भी बन गए। पारिवारिक जिम्मेदारियों और करियर के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं रहा और व्यक्तिगत तनाव उनके पेशेवर काम पर हावी होने लगा। छाया पारेख के साथ उनका यह वैवाहिक रिश्ता साल 2000 में कानूनी तलाक के साथ खत्म हो गया। इसके बाद साल 2003 में उन्होंने दूसरा विवाह किया। अपने साक्षात्कारों में उन्होंने स्वीकार किया कि घरेलू परेशानियों ने उनके काम की गति को धीमा कर दिया था। इसी दौरान वह एक फिल्म के फिल्मांकन के सिलसिले में विदेश गए थे, लेकिन तय समय से कहीं अधिक वक्त तक वहीं रुक गए। भारत से इतने लंबे समय तक बाहर रहने के कारण मुंबई के फिल्म निर्देशकों और निर्माताओं से उनका जीवंत संपर्क पूरी तरह टूट गया। जब तक वह वापस लौटे, तब तक हिंदी फिल्म उद्योग का ताना-बाना और समीकरण पूरी तरह बदल चुके थे। वर्तमान समय में अविनाश बड़े पर्दे की मुख्यधारा की फिल्मों में कम सक्रिय हैं, लेकिन वह टेलीविजन धारावाहिकों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के विभिन्न प्रोजेक्ट्स में नियमित तौर पर अपने अभिनय का हुनर दिखा रहे हैं।

सवाल-जवाब

अविनाश वधावन का जन्म कब और कहां हुआ था?
अविनाश वधावन का जन्म 2 नवंबर 1968 को मुंबई में हुआ था।
अभिनय में आने से पहले अविनाश वधावन क्या पढ़ाई कर रहे थे?
उन्होंने दिल्ली से इंजीनियरिंग की थी और बाद में जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट से एमबीए की पढ़ाई के दौरान दो सेमेस्टर बाद इसे छोड़ दिया था।
अविनाश वधावन को पहली बड़ी पहचान किस फिल्म से मिली?
उन्हें वास्तविक पहचान वर्ष 1991 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म 'आई मिलन की रात' से मिली थी।
कौन सी बड़ी फिल्में अविनाश वधावन के हाथ से निकल गई थीं?
'फूल और कांटे', 'दीवाना' और 'ये दिल्लगी' जैसी फिल्में पहले उन्हें ऑफर हुई थीं या उनके लिए बातचीत में थीं।
अविनाश वधावन वर्तमान समय में किस माध्यम में काम कर रहे हैं?
वह इन दिनों बड़े पर्दे के बजाय मुख्य रूप से टेलीविजन धारावाहिकों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के प्रोजेक्ट्स में अभिनय कर रहे हैं।
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टिप्पणियाँ 4

Tanvi Desai@tanvi-desai·53 मिनट पहले

इंजीनियरिंग और आईआईएम छोड़कर मॉडलिंग में जाना और फिर अचानक फिल्मों के शिखर से गायब हो जाना, अविनाश वधावन की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। क्या सोचकर उन्होंने उस दौर में इतने बड़े फैसले लिए होंगे?

Rohan Gupta@rohan-gupta·52 मिनट पहले

तनवी, आईआईएम की बात शायद थोड़ी बढ़ा-चढ़ाकर लिखी लगती है। जब मॉडलिंग का ऐसा चांस मिल जाए तो छोड़ना आम बात है।

Aisha Khan@aisha-khan·1 घंटे पहले

अविनाश वधावन को उन दिनों 'आई मिलन की रात' और 'बलमा' में देखकर लगता था कि वे लंबे समय तक राज करेंगे। एमबीए छोड़कर फिल्मों में आने का उनका यह किस्सा पढ़कर कॉलेज के दिनों की याद आ गई जब हम भी स्टार बनने के सपने देखते थे।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·1 घंटे पहले

आयशा जी, बात तो आपकी ठीक है पर मुझे थोड़ा शक है कि सिर्फ एमबीए छोड़ने या गलत फैसलों से ही उनका करियर रुका। उस दौर में किस्मत का खेल भी बड़ा होता है।

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