सिनेमा जगत में आज रोमांस के बादशाह के रूप में अपनी मजबूत सल्तनत कायम करने वाले शाहरुख खान के करियर की नींव भारी त्याग और अप्रत्याशित फैसलों पर टिकी है. अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों में उन्होंने एक बहुत छोटे से टीवी रोल के लिए एक ऐसा व्यक्तिगत समझौता किया था, जो उनके दिल के बेहद करीब था. उस दौर में लंबे बाल शाहरुख की खास पहचान और पसंद हुआ करते थे, लेकिन कैमरे के सामने आने की चाहत इतनी गहरी थी कि उन्होंने निर्देशक की शर्त पर अपने इन पसंदीदा बालों की कुर्बानी दे दी. टेलीविजन की दुनिया से सिल्वर स्क्रीन तक की इस यात्रा में उन्होंने पारंपरिक नायक की छवि को तोड़ते हुए ऐसे रास्ते चुने, जिन पर उस जमाने के बड़े-बड़े सितारे चलने से कतराते थे. अब वही कलाकार करीब दो महीने बाद अपनी आगामी फिल्म 'किंग' के साथ बड़े पर्दे पर एक बार फिर जोरदार वापसी करने की तैयारी में है.
दिल्ली की गलियों से अभिनय की पाठशाला तक
शाहरुख खान का जन्म 2 नवंबर 1965 को दिल्ली में हुआ था. उनके भीतर का कलाकार औपचारिक पढ़ाई के साथ ही धीरे-धीरे आकार लेने लगा था. दिल्ली के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज से उन्होंने इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की. कॉलेज के उसी दौर में उनका झुकाव रंगमंच और अदाकारी की ओर तेजी से बढ़ा. उन्होंने बाकायदा थिएटर ग्रुप का हिस्सा बनकर अभिनय के तकनीकी पहलुओं को समझना शुरू किया और जाने-माने थिएटर निर्देशक बैरी जॉन के मार्गदर्शन में अपने हुनर को मांजा. इसके बाद उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया में मास कम्युनिकेशन की उच्च शिक्षा में दाखिला लिया. हालांकि अभिनय के प्रति उनका जुनून इतना गहरा था कि उन्होंने अपनी यह पढ़ाई बीच में ही अधूरी छोड़ दी और पूरी तरह कला को समर्पित हो गए.
माता-पिता का साया उठने के बाद मुंबई का रुख
निजी जिंदगी में एक गहरा आघात उस वक्त लगा जब शाहरुख के सिर से माता-पिता का साया उठ गया. इस पारिवारिक त्रासदी के बाद उन्होंने जिंदगी में कुछ असाधारण मुकाम हासिल करने का पक्का इरादा किया. साल 1991 में वह दिल्ली की जानी-पहचानी गलियों को अलविदा कहकर सपनों के शहर मुंबई पहुंच गए. मुंबई आने के बाद उन्होंने काम की तलाश में लगातार स्टूडियो और निर्माताओं के चक्कर लगाने शुरू किए. छोटे पर्दे से लेकर बड़े पर्दे तक, जहां भी संभावना दिखी, उन्होंने अपनी किस्मत आजमाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इसी संघर्ष के दौरान जाने-माने निर्देशक लेख टंडन की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने शाहरुख को अपने टेलीविजन शो 'दिल दरिया' में काम करने की पेशकश की.
जब निर्देशक की शर्त पर कटवाने पड़े लंबे बाल
'दिल दरिया' में काम मिलना जितना बड़ा मौका लग रहा था, उसके लिए उतनी ही कड़ी शर्त भी सामने आई. निर्देशक लेख टंडन ने साफ कर दिया कि अगर शाहरुख को इस धारावाहिक का हिस्सा बनना है, तो उन्हें अपने लंबे और बिखरे हुए बाल कटवाने पड़ेंगे. शाहरुख को अपने बालों से बेहद लगाव था और वे उन्हें किसी भी कीमत पर छोटा नहीं कराना चाहते थे. लेकिन अभिनय की दुनिया में दाखिल होने की दिली तमन्ना के आगे उनका यह व्यक्तिगत मोह छोटा पड़ गया. भारी मन और भरे दिल से उन्होंने निर्देशक की यह बात मान ली और बाल कटवा लिए. इस शो में उन्हें नंदू नाम का एक छोटा सा किरदार सौंपा गया था. हालांकि किस्मत का खेल ऐसा रहा कि 'दिल दरिया' की शूटिंग और पोस्ट-प्रोडक्शन का काम तय समय से काफी पिछड़ गया और धारावाहिक के प्रसारण में भारी देरी हो गई.
'फौजी' का दिलचस्प ऑडिशन और टेलीविजन पर पहला धमाका
'दिल दरिया' के निर्माण में हो रही देरी के बीच शाहरुख खान के हाथ एक और बड़ा मौका लगा. उन्हें कर्नल राज कपूर के धारावाहिक 'फौजी' के लिए बुलावा आया. जब शाहरुख इस शो के ऑडिशन के लिए पहुंचे, तो शुरुआत में कर्नल राज कपूर को उनकी अभिनय क्षमता पर पूरा भरोसा नहीं जम पा रहा था. ऑडिशन के दौरान कर्नल राज कपूर की नजर शाहरुख के गालों पर पड़ने वाले डिंपल पर टिक गई. उन्हें यह विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ये गड्ढे असली हैं. स्थिति यह थी कि कर्नल राज कपूर ने बाकायदा अपने हाथ से छूकर यह तस्दीक की थी कि शाहरुख के डिंपल प्राकृतिक हैं या नहीं. 'फौजी' आखिरकार टीवी पर प्रसारित हुआ और चूंकि यह 'दिल दरिया' से पहले ऑन-एयर आ गया, इसलिए इसे ही आधिकारिक तौर पर शाहरुख का ऑन-स्क्रीन डेब्यू माना जाता है. इस शो की जबर्दस्त कामयाबी ने शाहरुख को घर-घर में एक लोकप्रिय चेहरा बना दिया. इसके फौरन बाद उन्हें अजीज मिर्जा के चर्चित धारावाहिक 'सर्कस' में भी अहम भूमिका निभाने का अवसर मिला.
टेलीविजन से फिल्मों का सफर और विलेन बनकर बादशाहत
टेलीविजन के पर्दे पर शाहरुख की लगातार बढ़ती लोकप्रियता ने बॉलीवुड के दिग्गजों का ध्यान खींचा. मशहूर अभिनेत्री हेमा मालिनी ने उनकी इस चमक को पहचाना और अपनी निर्देशित फिल्म 'दिल आशना है' में उन्हें बतौर लीड एक्टर काम करने का मौका दिया. हालांकि बड़े पर्दे पर उनकी पहली रिलीज फिल्म 'दीवाना' बनी. इस फिल्म में शाहरुख ने राजा सहाय का रोमांटिक किरदार निभाया था. 'दीवाना' की रिलीज ने टिकट खिड़की पर तहलका मचा दिया और शाहरुख रातोंरात एक सामान्य कलाकार से चमकते हुए सितारे और सुपरस्टार बन गए. लेकिन उनकी असली परीक्षा इसके बाद शुरू हुई. 90 के दशक में जब स्थापित सितारे खलनायक की भूमिकाओं से अपना करियर बर्बाद होने के डर से दूर भागते थे, तब शाहरुख ने जोखिम भरा रास्ता चुना. उन्होंने 'बाजीगर', 'डर' और 'अंजाम' जैसी फिल्मों में मुख्य नेगेटिव किरदार निभाए. खासकर 'बाजीगर' में उनके एंटी-हीरो अवतार को दर्शकों ने सिर आंखों पर बैठाया और इन किरदारों ने यह साबित कर दिया कि वे अभिनय के हर रंग में जान फूंकने का दम रखते हैं.
दो महीने बाद 'किंग' के साथ बड़े पर्दे पर हुंकार
दशकों के इस बेमिसाल सफर के बाद शाहरुख खान एक बार फिर अपनी नई फिल्म 'किंग' को लेकर जबर्दस्त चर्चा के केंद्र में हैं. बड़े पर्दे पर उनके खास अंदाज, बेजोड़ स्वैग और एक्शन को देखने के लिए दर्शकों की उत्सुकता चरम पर है. तकरीबन दो महीने के इंतजार के बाद यह बहुप्रतीक्षित फिल्म सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है. फिल्म प्रेमियों को उम्मीद है कि टिकट खिड़की पर यह फिल्म एक बार फिर कलेक्शन का बड़ा धमाका करेगी और शाहरुख की अदाकारी का जादू फिर से नए रिकॉर्ड कायम करेगा.


















