फिल्म निर्देशक नितेश तिवारी की आगामी भव्य गाथा रामायण: राइज ऑफ ए लेजेंड के नए गीत मंगल रंग के सार्वजनिक होते ही दर्शकों और संगीत प्रेमियों के बीच व्यापक चर्चा छिड़ गई है। जहां एक बड़े वर्ग ने इसके कर्णप्रिय सुरों की तारीफ की, वहीं कुछ श्रोताओं ने इसके विशेष अंदाज को लेकर सवाल खड़े किए। अब इस महाकाव्य परियोजना के प्रतिष्ठित संगीतकार एआर रहमान ने इन प्रतिक्रियाओं पर खुलकर अपना नजरिया सामने रखा है। उनका स्पष्ट मानना है कि किसी भी नए संगीतमय प्रयोग को पहली ही बार में हर व्यक्ति द्वारा स्वीकार कर लिया जाए, यह अनिवार्य नहीं है, क्योंकि किसी भी कलाकार के लिए हर एक श्रोता को एक साथ संतुष्ट कर पाना पूरी तरह असंभव होता है।
संगीत के प्रयोग और कव्वाली शैली पर उठे सवालों का जवाब
ट्रैक मंगल रंग के सामने आते ही सोशल मीडिया और चर्चाओं में श्रोताओं के विचार दो स्पष्ट हिस्सों में बंटे दिखाई दिए थे। कुछ लोगों ने रामायण जैसे पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भ वाले विषय में गीत के भीतर कव्वाली जैसी शैली की झलक पर असहमति जताई थी। इस तरह की आपत्तियों पर बात करते हुए एआर रहमान ने स्पष्ट किया कि इतने विशाल फलक वाले प्रोजेक्ट की धुनें किसी जल्दबाजी या तात्कालिक प्रभाव में तैयार नहीं होती हैं। संगीत निर्माण से जुड़ी टीम अंतिम निर्णय तक पहुंचने से पूर्व विभिन्न विचारों और धुनों पर महीनों तक अत्यंत बारीकी से काम करती है। हर रचना को परिपक्व होने और उसके वास्तविक भाव को सामने आने के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है।
रचनात्मक प्रक्रिया और खुद के सबसे कड़े आलोचक
अपनी रचनात्मक प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए एआर रहमान ने बताया कि वह बाहरी दुनिया की राय से पहले खुद अपने सबसे बड़े और सख्त आलोचक बनते हैं। उन्होंने साफ किया कि ऐसा कभी नहीं होता कि उनका अपना तैयार किया हुआ हर गाना उन्हें खुद पहली ही बार में मुकम्मल या पूरी तरह पसंद आ जाए। कई बार किसी विशेष धुन की असली मिठास और गहराई को श्रोताओं के दिल में उतरने के लिए लंबे समय की दरकार होती है।
इस स्थिति को एक बेहद व्यावहारिक मिसाल के जरिए स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह आचार जितना पुराना होता जाता है, उसका स्वाद उतना ही परिपक्व और बेहतर बनता है, ठीक वही बात संगीत के कुछ खास प्रयोगों के साथ भी लागू होती है। ऐसे गानों को अपनी पहचान और जगह बनाने के लिए थोड़ा वक्त दिया जाना जरूरी होता है।
रिएक्शन के हिसाब से दिशा बदलने के खिलाफ संदेश
संगीतकार का मानना है कि प्रत्येक श्रोता तुरंत इस बात की तह तक नहीं पहुंच सकता कि किसी गीत को एक विशिष्ट शैली या सांचे में क्यों ढाला गया है। लेकिन एक समर्पित संगीतकार के नाते आप हर किसी की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया या पसंद के मुताबिक अपनी रचनात्मक दृष्टि से समझौता नहीं कर सकते। इसी संदर्भ में स्टीव जॉब्स के एक प्रसिद्ध विचार का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति हर किसी को खुश रखने की इच्छा रखता है, तो उसे आइसक्रीम बेचनी चाहिए। मिश्रित समीक्षाओं के बावजूद गीत की लोकप्रियता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा और रिलीज के तुरंत बाद यह यूट्यूब के ट्रेंडिंग म्यूजिक चार्ट में शीर्ष स्थान यानी नंबर 1 पर पहुंच गया।
भव्य बजट और पांच भाषाओं में रिलीज की तैयारी
नितेश तिवारी के निर्देशन में आकार ले रही रामायण: राइज ऑफ ए लेजेंड भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे चर्चित और प्रतीक्षित परियोजनाओं में शामिल हो चुकी है। करीब 4,000 करोड़ रुपये के विशाल बजट से तैयार हो रही इस फिल्म में मुख्य पात्रों के चयन को लेकर भी भारी उत्साह है। फिल्म में रणबीर कपूर ने प्रभु राम और साई पल्लवी ने सीता का किरदार निभाया है, जबकि यश रावण की भूमिका में दिखाई देंगे। यह महत्वाकांक्षी सिनेमाई गाथा अपनी पहली कड़ी के रूप में इसी वर्ष 5 नवंबर को हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम सहित पांच भाषाओं में एक साथ बड़े पर्दे पर रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है।



















