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अयोध्या फैसले के बाद मुस्लिम संपर्कों को संदेश भेजने वाले स्वरा भास्कर के वीडियो पर इंटरनेट पर छिड़ी तीखी बहसबॉलीवुड
19 सित॰ 2026, 6:28 pm (39 दिन पहले)· 1

अयोध्या फैसले के बाद मुस्लिम संपर्कों को संदेश भेजने वाले स्वरा भास्कर के वीडियो पर इंटरनेट पर छिड़ी तीखी बहस

अभिनेत्री स्वरा भास्कर का एक पुराना वीडियो सामने आने के बाद चर्चा तेज हो गई है, जिसमें वह वर्ष 2019 के राम जन्मभूमि फैसले पर असहमति जताते हुए अपनी संपर्क सूची के मुस्लिम परिचितों से माफी मांगने की बात कह रही हैं।

अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर अपने बयानों के कारण इंटरनेट पर तीव्र चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। सोशल मीडिया मंचों पर प्रसारित हो रहे एक वीडियो क्लिप में वह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2019 में राम जन्मभूमि विवाद पर दिए गए ऐतिहासिक निर्णय के प्रति अपना व्यक्तिगत दृष्टिकोण साझा करती नजर आ रही हैं। दशकों पुराने और संवेदनशील माने जाने वाले राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर आए अदालती नतीजे को लेकर उनकी इस पुरानी टिप्पणी के सामने आते ही उपयोगकर्ताओं के बीच परस्पर विरोधी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

फोन में मौजूद मुस्लिम संपर्कों से खेद जताने का दावा

प्रसारित फुटेज में स्वरा भास्कर इस बात का उल्लेख कर रही हैं कि जब राम जन्मभूमि विवाद पर अंतिम अदालती निर्णय घोषित हुआ था, तब वह मानसिक तौर पर काफी विचलित और निराश महसूस कर रही थीं। उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक हिंदू समुदाय के पक्ष में जमीन का मालिकाना हक जाने वाले इस निर्णय को वह स्वीकार नहीं कर पा रही थीं। अपनी इसी मनःस्थिति का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि एक हिंदू होने के नाते उन्होंने अपनी फोनबुक में दर्ज सभी मुस्लिम परिचितों को निजी संदेश भेजकर अपनी भावनाएं व्यक्त की थीं।

इन संदेशों को प्राप्त करने वालों में फिल्म जगत के प्रमुख कलाकारों आमिर खान, शाहरुख खान, सलमान खान के साथ-साथ फहाद अहमद का नाम भी शामिल था। स्वरा भास्कर के अनुसार, उन्होंने अपने संदेश में यह लिखा था कि वह शीर्ष अदालत के इस फैसले से किसी भी तरह सहमत नहीं हैं, उन्हें इस पर गहरा खेद है और वह व्यक्तिगत रूप से शर्मिंदगी महसूस कर रही हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी राय और कानूनी मर्यादा की जंग

इस वीडियो के पुनः चर्चा में आने के बाद ऑनलाइन मंचों पर दो ध्रुवों में बंटी राय देखने को मिल रही है। आलोचकों के एक बड़े वर्ग का कहना है कि देश की सबसे बड़ी न्यायिक संस्था के सर्वसम्मत फैसले पर इस तरह खुलेआम सवाल उठाना और उस पर शर्मिंदगी जताना भारतीय न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता का अपमान है। इस पक्ष का तर्क है कि अदालत ने तमाम ऐतिहासिक साक्ष्यों, पुरातात्विक रिपोर्टों और ठोस कानूनी आधारों की विस्तृत समीक्षा के उपरांत ही अपना फैसला सुनाया था, इसलिए इतने वर्ष बाद इस पर संशय पैदा करना अनुचित है।

इसके विपरीत, दूसरे पक्ष के समर्थकों का कहना है कि लोकतांत्रिक ढांचे में प्रत्येक नागरिक को अपनी व्यक्तिगत राय और असहमति प्रकट करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उनका मानना है कि किसी भी न्यायिक अथवा प्रशासनिक निर्णय पर अपनी व्यक्तिगत संवेदना या असंतोष व्यक्त करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है, भले ही वह विचार जनसामान्य या बहुसंख्यक दृष्टिकोण से मेल न खाता हो।

वर्ष 2019 के ऐतिहासिक अदालती फैसले की मुख्य बातें

अयोध्या विवाद में सर्वोच्च न्यायालय की पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने 9 नवंबर 2019 को अपना ऐतिहासिक और सर्वसम्मत निर्णय सुनाया था। शीर्ष अदालत ने विवादित 2.77 एकड़ भूमि का संपूर्ण स्वामित्व रामलला विराजमान को सौंपने का स्पष्ट आदेश जारी किया था। इसके साथ ही, अदालत ने मुस्लिम पक्ष की भरपाई के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही मस्जिद निर्माण हेतु 5 एकड़ वैकल्पिक भूमि आवंटित करने का भी सख्त निर्देश दिया था।

संविधान पीठ ने अपने समग्र फैसले में वर्ष 1949 में विवादित ढांचे के भीतर गुप्त रूप से मूर्तियां रखे जाने और 1992 में बाबरी मस्जिद को बलपूर्वक ध्वस्त किए जाने की घटनाओं को गंभीर गैर-कानूनी कृत्य करार दिया था। इसके बावजूद, कानूनी दस्तावेजों, निरंतर पूजा के अधिकारों और उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र विश्लेषण करते हुए अदालत ने विवादित भूमि पर रामलला के कानूनी हक को अंतिम रूप से मान्यता दी थी।

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सवाल-जवाब

स्वरा भास्कर का कौन सा बयान इस समय चर्चा में है?
स्वरा भास्कर का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह वर्ष 2019 के राम जन्मभूमि फैसले पर असहमति जताते हुए अपनी संपर्क सूची के मुस्लिम लोगों से माफी मांगने की बात कह रही हैं।
स्वरा भास्कर ने किन प्रमुख हस्तियों को संदेश भेजने का उल्लेख किया?
उन्होंने अपने बयान में आमिर खान, शाहरुख खान, सलमान खान और फहाद अहमद को संदेश भेजकर खेद और शर्मिंदगी व्यक्त करने की बात कही।
सोशल मीडिया पर स्वरा भास्कर के बयान पर क्या प्रतिक्रियाएं आ रही हैं?
एक वर्ग का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाना न्याय प्रणाली का अपमान है, जबकि दूसरा वर्ग इसे अभिव्यक्ति की आजादी के तहत निजी राय बता रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि मामले में क्या अंतिम फैसला सुनाया था?
अदालत ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को सौंपी थी और सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में मस्जिद के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन आवंटित करने का आदेश दिया था।
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला किस तारीख को आया था?
सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने 9 नवंबर 2019 को यह सर्वसम्मत फैसला सुनाया था।
शीर्ष अदालत ने 1949 और 1992 की घटनाओं के बारे में क्या टिप्पणी की थी?
अदालत ने 1949 में मूर्तियां रखे जाने और 1992 में बाबरी मस्जिद तोड़े जाने की घटनाओं को कानून का गंभीर उल्लंघन करार दिया था।
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