राज्य सरकार द्वारा लागू की गई नई फिल्म प्रोत्साहन नीति के बाद बिहार बॉलीवुड और क्षेत्रीय सिनेमा जगत के लिए एक आकर्षण के केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है। इसी सिलसिले में प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता और निर्माता सुनील शेट्टी ने पटना पहुंचकर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से एक शिष्टाचार मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान राज्य में सिनेमा निर्माण की असीम संभावनाओं, नई शूटिंग लोकेशनों और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इस बातचीत के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं, जिसके तहत आगामी महीनों में राज्य की कई खूबसूरत वादियों में बड़े बजट की फिल्मों का सेट सजने की उम्मीद जताई जा रही है।
सुनील शेट्टी की मुलाकात और शूटिंग की योजना
पटना में हुई बैठक के उपरांत सुनील शेट्टी ने मीडिया को जानकारी दी कि उनकी आने वाली नई फिल्म का एक बड़ा हिस्सा बिहार में ही शूट किया जाएगा। योजना के मुताबिक लगभग 50 से 60 दिनों का लंबा शूटिंग शेड्यूल राज्य के विभिन्न जिलों में प्रस्तावित है, जो अक्टूबर के महीने से प्रारंभ हो सकता है। शूटिंग स्थलों का सही जायजा लेने और प्रारंभिक तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए बहुत जल्द एक विशेष प्रोडक्शन टीम राज्य के अलग-अलग इलाकों का दौरा शुरू करने वाली है।
सुनील शेट्टी ने बिहार के बुनियादी ढांचे और यहां की अनुपम प्राकृतिक छटा की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि जल्द ही राज्य के एक दर्जन से भी अधिक प्रमुख स्थानों पर बड़े पैमाने पर फिल्मों का निर्माण कार्य शुरू हो सकता है। दर्शकों के जुड़ाव पर बात करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि बिहार और उत्तर प्रदेश के सिनेमा प्रेमी दरअसल फिल्म उद्योग की मुख्य रीढ़ हैं। यदि कोई कहानी इन दो राज्यों के दर्शकों के दिलों को छू लेती है, तो उसका बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट होना तय माना जाता है। इसी भरोसे के साथ अब मुंबई के निर्माता और निर्देशक बिहार की ओर रुख कर रहे हैं।
पश्चिम चंपारण का वाल्मीकि नगर और एक्शन-थ्रिलर लोकेशन
फिल्म निर्माताओं की पसंद सूची में पश्चिम चंपारण जिले का नाम सबसे ऊपर उभरकर आया है। यहां स्थित वाल्मीकि नगर और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व अपनी सघन वन संपदा, बहती नदियों और मनोरम पहाड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। यह पूरा क्षेत्र एडवेंचर, एक्शन और सस्पेंस से भरपूर कहानियों की शूटिंग के लिए एक मुफीद मंच तैयार करता है। घने जंगलों और प्राकृतिक सन्नाटे के बीच आउटडोर सीन्स को शूट करने के लिए निर्देशकों को यहां एक बेहतरीन लोकेशन मिल रही है।
राजगीर और नालंदा का ऐतिहासिक तथा आधुनिक संगम
ऐतिहासिक और थ्रिलर सिनेमा के दृष्टिकोण से राजगीर और नालंदा जिले भी निर्देशकों की प्राथमिकता में शामिल हैं। राजगीर में स्थित प्रसिद्ध ग्लास ब्रिज, जू सफारी, नेचर सफारी और ऐतिहासिक गृधकूट पर्वत प्राकृतिक छटा के साथ-साथ आधुनिक निर्माण का भी शानदार उदाहरण पेश करते हैं। दूसरी ओर, विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय के प्राचीन अवशेष पीरियड ड्रामा, ऐतिहासिक गाथाओं और रहस्यमयी पटकथाओं के लिए एक सर्वथा उपयुक्त परिवेश प्रदान करते हैं। यह स्थान कहानी को एक पौराणिक और प्रामाणिक स्पर्श देने में सक्षम है।
कैमूर, रोहतास और नवादा की खूबसूरत प्राकृतिक वादियां
नई फिल्म नीति के प्रभावी होने से कैमूर, रोहतास और नवादा जिलों का आकर्षण भी तेजी से बढ़ा है। कैमूर की हरी-भरी पहाड़ियां जहां बैकड्रॉप को भव्यता देती हैं, वहीं रोहतास का प्रसिद्ध तुतला भवानी झरना अपने मनमोहक दृश्यों के लिए जाना जाता है। इसके अलावा नवादा का विख्यात ककोलत जलप्रपात अपनी प्राकृतिक ठंडक और सुंदरता से पर्यटकों के साथ-साथ निर्देशकों को भी लुभा रहा है। ये सभी स्थल गानों की शूटिंग, रोमांटिक सीन्स और एडवेंचरस आउटडोर सीक्वेंस के लिए अत्यधिक उपयुक्त माने जा रहे हैं। यही कारण है कि अब बॉलीवुड निर्माता दूसरे राज्यों में जाने के बजाय बिहार की इन सुरम्य वादियों को पहली प्राथमिकता दे रहे हैं।
किशनगंज के विशाल चाय बागान और मिनी दार्जिलिंग का रूप
बिहार के पूर्वोत्तर में स्थित किशनगंज जिला भी अपनी एक अनोखी पहचान के साथ फिल्म मेकर्स के लिए नया विकल्प बनकर उभरा है। नेपाल और पश्चिम बंगाल की सीमाओं से सटा किशनगंज का ठाकुरगंज, पोठिया और बेलवा इलाका मिनी दार्जिलिंग के नाम से जाना जाता है। इस क्षेत्र में लगभग 25 हजार हेक्टेयर से भी अधिक भूमि पर फैले हरे-भरे चाय के बागान हैं। खूबसूरत गीतों और रोमांटिक दृश्यों को फिल्माने के लिए अब फिल्मकार असम या दार्जिलिंग का रुख करने के स्थान पर बिहार के इस चाय बागान वाले इलाके को एक प्राथमिक और सुलभ विकल्प मान रहे हैं।



















