एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में बदलती भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं और बढ़ते सुरक्षा दबावों के बीच चीनी वायु सेना और रॉयल थाई एयर फोर्स ने संयुक्त सैन्य अभ्यास फाल्कन स्ट्राइक-2026 का औपचारिक शुभारंभ कर दिया है। थाईलैंड के हवाई क्षेत्र में आयोजित इस उच्च स्तरीय वॉर-गेम में चीन ने अपनी उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकियों और आधुनिक लड़ाकू बेड़ों की ताकत का जोरदार प्रदर्शन किया है। इस अभ्यास के दौरान चीनी वायु सेना ने अपने 4.5वीं पीढ़ी के J-10C लड़ाकू विमानों की क्षमता को प्रमुखता से पेश किया, जबकि थाईलैंड ने अपने सबसे शक्तिशाली अमेरिकी निर्मित F-16 लड़ाकू विमानों को इस अभ्यास से पूरी तरह अलग रखा। थाई एयरफोंस का अपने F-16 जेट्स को हैंगर में ही सीमित रखने का फैसला वाशिंगटन से मिलने वाली कूटनीतिक चेतावनियों और संवेदनशील रक्षा तकनीक की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
फाल्कन स्ट्राइक-2026 में चीन की उन्नत हवाई शक्ति का प्रदर्शन
इस संयुक्त युद्धाभ्यास में चीन ने अपने आधुनिकतम लड़ाकू विमानों, हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणालियों (AWACS), ईंधन भरने वाले एरियल टैंकरों तथा जमीनी वायु रक्षा प्रणालियों का पूरा बेड़ा तैनात किया है। फाल्कन स्ट्राइक-2026 के माध्यम से दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने और अपने मुख्य हवाई दस्तों के बीच अंतर-संचालनीयता को परखने का प्रयास किया है। चीन के सरकारी मीडिया द्वारा जारी वीडियो फुटेज में चीनी और थाई फाइटर जेट्स को जटिल हवाई पैंतरेबाज़ी और संयुक्त सामरिक अभ्यासों में हिस्सा लेते हुए देखा जा सकता है।
चीन की ओर से इस अभ्यास में मुख्य रूप से 4.5वीं पीढ़ी का बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान J-10C शामिल हुआ है। इसके साथ ही J-10S ट्रेनर जेट और भारी परिवहन विमान Y-20 को भी थाईलैंड भेजा गया है। चीनी रक्षा विशेषज्ञों और एयरोस्पेस नॉलेज पत्रिका के संपादक-इन-चीफ वांग यानान के अनुसार, J-10C चीनी वायु सेना के अग्रिम बेड़े की रीढ़ की हड्डी है। विदेशी धरती पर इसकी सफल और बारंबार तैनाती यह साबित करती है कि यह विमान अत्यंत विपरीत और कठिन परिस्थितियों में भी अपनी परिचालन क्षमताओं को बनाए रखने में सक्षम है।
Y-20 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और लॉजिस्टिक्स क्षमता
अभ्यास का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू चीन का विशालकाय Y-20 परिवहन विमान रहा, जिसने लंबी दूरी की सैन्य आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स संचालन की क्षमता को प्रदर्शित किया। Y-20 विमान के माध्यम से जमीनी वायु रक्षा उपकरण, विमानन घटकों और तकनीकी सहायता दलों को बिना किसी मध्यवर्ती बाधा के सीधे चीन से थाईलैंड तक पहुंचाया गया। यह कदम दर्शाता है कि चीन अपनी सीमाओं से दूर किसी भी स्थान पर तेजी से सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति करने में महारत हासिल कर चुका है।
थाईलैंड द्वारा F-16 न उतारने के तीन प्रमुख कारण
इस पूरे सैन्याभ्यास में थाईलैंड के पास अमेरिका निर्मित शक्तिशाली F-16 लड़ाकू विमानों की मौजूदगी के बावजूद उन्हें मैदान में न उतारने का निर्णय चर्चा का केंद्र बना हुआ है। थाईलैंड ने चीनी बेड़े के साथ संयुक्त उड़ानों के लिए स्वीडन निर्मित आधुनिक JAS 39 ग्रिपेन फाइटर जेट और अल्फा जेट लाइट अटैक एयरक्राफ्ट को चुना। रक्षा विश्लेषक थाईलैंड के इस कदम के पीछे तीन मुख्य रणनीतिक और कूटनीतिक कारण मानते हैं।
पहला प्रमुख कारण अमेरिकी सरकार का कड़े रुख और उन्नत तकनीक के लीक होने का डर है। अमेरिका ने थाईलैंड पर सख्त शर्तें लागू की हैं कि चीनी बलों के साथ किसी भी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय अभ्यास में अमेरिकी सैन्य हार्डवेयर और सिग्नलों का इस्तेमाल न किया जाए। अमेरिका नहीं चाहता कि उसकी उन्नत रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर प्रणालियों की गोपनीय जानकारी चीनी खुफिया तंत्र के हाथ लगे।
दूसरा कारण F-35 स्टील्थ फाइटर डील के रद्द होने का पूर्व अनुभव है। थाईलैंड पूर्व में अमेरिका से पांचवीं पीढ़ी के F-35 लड़ाकू विमान खरीदने की प्रक्रिया में था, परंतु चीन के साथ थाईलैंड के बढ़ते रक्षा सहयोग को देखते हुए अमेरिका ने इस सौदे को खारिज कर दिया था। थाईलैंड अब वाशिंगटन के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण नहीं बनाना चाहता।
तीसरा कारण इलेक्ट्रॉनिक डेटा और सिग्नलों की सुरक्षा का खतरा है। यदि थाईलैंड के F-16 विमान चीन के J-10C और AWACS प्रणालियों के साथ सीधे आमने-सामने की उड़ानों में भाग लेते, तो चीन के उन्नत AESA रडार और सिग्नल इंटेलिजेंस उपकरण F-16 के फ्रीक्वेंसी पैटर्न और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर को कैप्चर कर सकते थे। इस जोखिम को टालने के लिए थाईलैंड ने F-16 को दूर रखने का व्यावहारिक निर्णय लिया।
ओवरसीज कॉम्बैट वैलिडेसन और रणनीतिक संदेश
सैन्य विश्लेषकों का आकलन है कि फाल्कन स्ट्राइक-2026 केवल नियमित प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चीन के विदेशी युद्ध सत्यापन मॉडल का एक हिस्सा है। लड़ाकू विमानों, AWACS प्रणालियों, हवा में ईंधन भरने वाले विमानों और भारी परिवहन जहाजों का एक साथ किसी अन्य देश में समन्वित संचालन यह साबित करता है कि चीनी वायु सेना अब अपनी राष्ट्रीय सीमाओं के बाहर भी बड़े पैमाने पर हवाई अभियानों को अंजाम देने में पूरी तरह सक्षम है।


















