आभूषण निर्माण ब्रांड जीवा द्वारा रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में जारी किए गए एक प्रचार विज्ञापन को लेकर उपजा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सोशल मीडिया मंचों पर शुरू हुई यह बहस अब बॉलीवुड की चकाचौंध से निकलकर देश की मुख्यधारा की राजनीति और सांस्कृतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी की सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री कंगना रनौत ने एक प्रमुख राष्ट्रीय दूरदर्शन चैनल के विशेष साक्षात्कार कार्यक्रम में विस्तार से अपनी बात रखी है। कंगना रनौत ने स्पष्ट रूप से कहा कि विज्ञापन में अभिनेत्री कृति सेनन द्वारा पहने गए परिधान को लेकर उनकी असहमति केवल एक छोटा और सतही मुद्दा था, जबकि उनका वास्तविक विरोध व्यावसायिक प्रचार में भारतीय पारंपरिक मूल्यों, पारिवारिक संरचना और सनातन संस्कृति की रीढ़ समझे जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की पूरी तरह से की गई अनदेखी को लेकर है। इसके अलावा, कंगना रनौत ने इस विवाद में हस्तक्षेप करते हुए कृति सेनन का समर्थन करने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दृष्टिकोण और उनकी राजनीतिक मंशा पर भी तीखे सवाल दागे हैं।
डीडी न्यूज़ के साक्षात्कार में कंगना की आपत्तियां और सांस्कृतिक दृष्टिकोण
दूरदर्शन के समाचार चैनल डीडी न्यूज़ के बहुचर्चित कार्यक्रम 'डिकोड' में वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी के साथ बातचीत के दौरान कंगना रनौत ने इस विवाद से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर खुलकर अपने विचार रखे। जब सुधीर चौधरी ने उनसे प्रश्न किया कि क्या किसी व्यक्ति के कपड़ों के चुनाव पर किसी अन्य को आपत्ति जताने का अधिकार है, तो कंगना ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक समाज में किसी भी नागरिक को अपनी पसंद की पोशाक पहनने से रोकने का सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि कोई व्यक्ति क्या पहनता है, बल्कि मुख्य प्रश्न यह है कि किसी पवित्र और प्राचीन त्योहार को व्यावसायिक विज्ञापनों में किस रूप और परिवेश में प्रस्तुत किया जा रहा है।
साक्षात्कार के दौरान जब सुधीर चौधरी ने उनसे पूछा कि क्या कृति सेनन ईद जैसे अन्य धार्मिक त्योहारों के विज्ञापनों में भी इसी तरह की इंडो-वेस्टर्न या ब्रालेट पोशाक पहनकर दिखाई दे सकती हैं, तो कंगना रनौत ने विभिन्न धर्मों के रीति-रिवाजों और सामाजिक मर्यादाओं पर अपनी राय रखी। कंगना ने कहा कि हिंदू धर्म के पारिवारिक और भाई-बहन के रिश्तों में अत्यधिक गरिमा, पवित्रता और तय सीमाएं होती हैं। उन्होंने बल देकर कहा कि विज्ञापन में कृति का ब्रालेट पहनना सबसे बड़ी समस्या नहीं था। मुख्य समस्या यह है कि हम जिस सनातन परंपरा से आते हैं, उसमें त्योहार के समय घर का माहौल, माता-पिता का आशीर्वाद और पारंपरिक अनुष्ठान कहाँ गायब हो गए?
कंगना रनौत ने सवाल उठाया कि विज्ञापन के दृश्यों में हलवा-पूरी का पारंपरिक भोजन, ईश्वर की प्रतिमा, मस्तक पर लगाया जाने वाला अक्षत व रोली का टीका, धूप और दीप जैसी मूलभूत वस्तुएं क्यों नदारद थीं? उन्होंने इस तर्क को खारिज कर दिया कि विज्ञापनों में केवल आधुनिक एस्थेटिक्स या सौंदर्यबोध ही मायने रखता है। कंगना ने जोर देकर कहा कि बिना पवित्र टीके, रोली और वैदिक रीति-रिवाजों के रक्षाबंधन का त्योहार अपनी पहचान खो देता है। जब देश में सनातन परंपराओं को सहेजने और पुनर्जीवित करने के प्रयास हो रहे हैं, तब ऐसे विज्ञापनों के माध्यम से सांस्कृतिक मूल्यों की उपेक्षा करना अत्यंत चिंताजनक है। उनके अनुसार, त्योहार केवल एक औपचारिक रस्म नहीं होते, बल्कि वे किसी भी महान सभ्यता और संस्कृति की जीवंत पहचान होते हैं।
राहुल गांधी के बयान पर पलटवार और राजनीतिक बहस
इस विवाद ने उस समय बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया जब कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता राहुल गांधी ने कृति सेनन और महिलाओं के कपड़ों के चुनाव का समर्थन करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी ने सामाजिक माध्यमों पर एक संदेश साझा करते हुए तर्क दिया था कि महिलाएं क्या पहनती हैं, यह पूरी तरह से उनका व्यक्तिगत निर्णय और पसंद है। अपने संदेश को अधिक आक्रामक बनाने के लिए राहुल गांधी ने हैशटैग 'स्मैश द पेट्रियार्की' का उपयोग भी किया था।
राहुल गांधी की इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कंगना रनौत ने उन पर तंज कसा। कंगना ने ध्यान दिलाया कि राहुल गांधी द्वारा लिखे गए सामाजिक माध्यम के पूरे बयान में 'रक्षाबंधन' शब्द का एक बार भी उल्लेख नहीं किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की विचार प्रक्रिया मूल रूप से 'सनातन धर्म के सिद्धांतों के विरुद्ध' काम करती है। कंगना ने सवाल किया कि जब बात हिंदू पर्वों की आती है तो उसे लैंगिक समानता या पितृसत्ता के नाम पर मोड़ा जाता है, जबकि अन्य धर्मों की महिलाओं के पारंपरिक पहनावे पर इस प्रकार के राजनीतिक प्रयोग नहीं किए जाते।
जीवा के विज्ञापन की विषय-वस्तु, विवाद की उत्पत्ति और कृति सेनन की सफाई
इस संपूर्ण विवाद की शुरुआत आभूषण ब्रांड जीवा के उस रक्षाबंधन अभियानी विज्ञापन से हुई थी जिसमें बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन को मुख्य भूमिका में दर्शाया गया था। विज्ञापन में कृति सेनन को एक आधुनिक इंडो-वेस्टर्न पोशाक पहने दिखाया गया था, जिसमें आइवरी रंग का ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, एक पारदर्शी केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी। इस विज्ञापन की पटकथा में कृति सेनन को अपने सगे भाई को राखी बांधने के साथ-साथ अपने घर के पालतू कुत्ते की कलाई पर भी राखी बांधते हुए चित्रित किया गया था।
विज्ञापन के सार्वजनिक होते ही सामाजिक माध्यमों पर तीव्र आक्रोश देखने को मिला था। कंगना रनौत ने सबसे पहले अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इस विज्ञापन को 'जानबूझकर अजीब और परेशान करने वाला' करार दिया था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से पूछा था कि जब भारतीय वस्त्र परंपरा में सुंदर और गरिमापूर्ण कपड़ों के ढेरों विकल्प मौजूद हैं, तो कोई महिला अपने भाई को बिकिनी या अंडरगारमेंट्स जैसे कपड़ों में राखी बांधने का विचार कैसे कर सकती है? कंगना की इस सख्त टिप्पणी के बाद कृति सेनन ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी थी। कृति ने अपने पहनावे का बचाव करते हुए कहा था कि किसी भी व्यक्ति की संस्कृति और परंपराएं उसकी पोशाक की नेकलाइन से तय नहीं होतीं, बल्कि वे उसके दिल और विचारों में निहित होती हैं। हालांकि, कृति की इस सफाई के बाद भी इंटरनेट पर दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तीखी बहस जारी रही।
कंपनी द्वारा विज्ञापन वापस लिया जाना और ऑनलाइन प्रतिक्रियाएं
व्यावसायिक नुकसान और सामाजिक माध्यमों पर लगातार बढ़ते बहिष्कार के दबाव को देखते हुए जीवा कंपनी ने अंततः एक बड़ा कदम उठाया। कंपनी ने आधिकारिक घोषणा करते हुए इस रक्षाबंधन विज्ञापन को टीवी, यूट्यूब और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों से तुरंत प्रभाव से वापस ले लिया। कंपनी ने अपने जारी वक्तव्य में कहा कि वह भारत की समृद्ध संस्कृति, सनातन परंपराओं और सभी धार्मिक त्योहारों का दिल से सम्मान करती है।
कंपनी के प्रवक्ताओं ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनके विज्ञापन का एकमात्र उद्देश्य परिवार के साथ त्योहार मनाने की खुशियों में घर के मूक पालतू जानवरों को भी शामिल करना था। फिर भी, यदि इस विज्ञापन के किसी दृश्य या प्रस्तुतीकरण से समाज के किसी भी वर्ग, समुदाय या व्यक्ति की धार्मिक अथवा व्यक्तिगत भावनाएं आहत हुई हैं, तो ऐसा करना उनका उद्देश्य कभी नहीं था। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए विज्ञापन को पूरी तरह से हटा लिया गया है। इसी बीच, 26 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया मंच X पर 'ChekrishnaCk' नाम के उपयोगकर्ता ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि कृति सेनन का मामला अब समाप्त हो चुका है और इस विवाद के माध्यम से कंगना रनौत तथा सुधीर चौधरी दोबारा चर्चा में आने की कोशिश कर रहे हैं। उपयोगकर्ता ने कुलविंदर कौर द्वारा कंगना को थप्पड़ मारे जाने की पुरानी घटना का जिक्र करते हुए उन पर निशाना साधा।



















