1981 का बॉलीवुड एक ऐसी फिल्म का गवाह बना जिसने हिंदी सिनेमा की पूरी बिसात पलट दी. 'क्रांति' न केवल उस दौर की सबसे महंगी और महत्वाकांक्षी फिल्मों में से एक थी, बल्कि इसने अपने आठ बड़े सितारों की अभूतपूर्व मंडली और 19 से 20 करोड़ रुपये की बेमिसाल कमाई के साथ बॉक्स ऑफिस पर ऐसा इतिहास रचा, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है.
मनोज कुमार की दूरदर्शी और साहसी सोच
19वीं सदी में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ भारत के स्वाधीनता संग्राम और गहरी देशभक्ति पर केंद्रित इस फिल्म को मनोज कुमार ने खुद लिखा, निर्देशित किया और इसमें मुख्य भूमिका भी अदा की. उन्होंने पर्दे पर एक जुझारू क्रांतिकारी का किरदार 'भारत' के नाम से जिया. लेकिन 'क्रांति' को वाकई अलग और यादगार बनाया उसकी बेजोड़ स्टार-कास्ट ने, जो उस जमाने की सोच से कहीं आगे की थी. यह फिल्म सिर्फ एक देशभक्ति का जज्बा नहीं थी, बल्कि उस दौर के सबसे बड़े नामों को एक ही फ्रेम में उतारने का एक दुस्साहसिक प्रयोग भी था.
एक ही पर्दे पर आठ दिग्गज सितारे
'ट्रेजडी किंग' दिलीप कुमार करीब पांच साल के लंबे अंतराल के बाद 'क्रांति' से सिल्वर स्क्रीन पर वापस लौटे और उन्होंने फिल्म में एक दमदार और यादगार लीड रोल अदा किया. दर्शकों के लिए उन्हें इतने लंबे वक्त बाद पर्दे पर देखना रोंगटे खड़े कर देने वाला, जबरदस्त अनुभव था. शशि कपूर ने एक कठोर और वफादार राजा तथा सैन्य अधिकारी का किरदार जिया, जो आगे चलकर क्रांतिकारियों के साथ जुड़ जाता है. शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी बेबाक अदा, सख्त मिजाज और गूंजती हुई आवाज से एक शेरदिल विद्रोही को पर्दे पर जीवंत किया.
हेमा मालिनी फिल्म की मुख्य नायिका के रूप में दिलीप कुमार और मनोज कुमार के साथ उनके मिशन में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहीं. परवीन बॉबी ने अपनी ग्लैमरस और असरदार अदाकारी से फिल्म में एक अलग और चमकदार रंग भरा. सारिका का किरदार फिल्म की कहानी में बेहद गंभीर, संजीदा और जरूरी था. और फिर थीं निरूपा रॉय, बॉलीवुड की मशहूर 'मां', जिनके जबरदस्त और भावपूर्ण अभिनय ने सिनेमाघरों में बैठे हजारों दर्शकों की आंखें नम कर दीं. इन आठ प्रमुख सितारों के अलावा प्रेम चोपड़ा, मदन पुरी और टॉम ऑल्टर जैसे दमदार कलाकारों ने खलनायक की भूमिकाओं में खूब धाक जमाई.
3 करोड़ का जोखिम, 19-20 करोड़ का कमाल
1981 के लिहाज से 'क्रांति' का बजट करीब 3 करोड़ रुपये था, जिसे उस जमाने में बेहद बड़ा और जोखिम भरा निवेश माना गया था. शानदार सेट, असली जहाजों पर फिल्माए गए धमाकेदार एक्शन सीन और हजारों जूनियर कलाकारों की भागीदारी ने फिल्म को एक भव्य और विशाल स्वरूप दिया. जब यह फिल्म रिलीज हुई तो थिएटरों के बाहर मीलों लंबी कतारें लग गईं और देशभर के कई सिनेमाघर महीनों तक हाउसफुल रहे.
भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 'क्रांति' ने 3 करोड़ रुपये की नेट कमाई दर्ज की, जबकि इसकी कुल कमाई 19-20 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गई. यह 1981 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई. इसके ऐतिहासिक मुनाफे और अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए ट्रेड पंडितों ने इसे बेझिझक 'ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर' का दर्जा दे दिया.
वो संगीत जो 45 साल बाद भी जिंदा है
'क्रांति' की इस असाधारण सफलता की असली रीढ़ इसके संगीत में भी थी. 'जिंदगी की ना टूटे लड़ी' और 'चना जोर गरम' जैसे गाने 45 साल बाद भी हर किसी की जुबान पर ताजे हैं और दिलों में बसे हैं. दिलीप कुमार और मनोज कुमार के बीच के दृश्य आज भी हिंदी सिनेमा के इतिहास का अनमोल और अद्वितीय खजाना माने जाते हैं. फिल्म में जोरदार ड्रामा, साफ और असरदार संवाद अदायगी तथा अंग्रेज हुक्मरानों के खिलाफ जोशीले एक्शन का एकदम सही मेल था, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा. इसी अनूठे संयोजन ने 'क्रांति' को बॉलीवुड के अमर क्लासिक की फेहरिस्त में एक स्थायी और अटूट जगह दिलाई.













