भारतीय सिनेमा के इतिहास में वर्ष 1975 की क्लासिक फिल्म शोले का नाम आते ही अमूमन दर्शकों के जेहन में जय और वीरू की मिसाली दोस्ती या फिर गब्बर सिंह का दहशतभरा खौफ उभरता है। हालांकि, इस ब्लॉकबस्टर फिल्म का रोमांटिक पहलू भी उतना ही शानदार और दिलचस्प रहा है। खासतौर पर धर्मेंद्र और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया प्रसिद्ध गीत 'कोई हसीना जब रूठ जाती है' एक ऐसा सदाबहार ट्रैक है, जो आज पांच दशक बीत जाने के बाद भी नई पीढ़ी के प्रेमियों के लिए उतना ही प्रासंगिक और मजेदार महसूस होता है।
वीरू और बसंती की चुलबुली केमिस्ट्री और मीठी नोकझोंक
इस यादगार गाने में वीरू (धर्मेंद्र) अपनी रूठी हुई बसंती (हेमा मालिनी) को मनाने की मजेदार कोशिश करते नजर आते हैं। ऑन-स्क्रीन दोनों कलाकारों के बीच की जबरदस्त केमिस्ट्री, शरारत और प्यार भरी नोकझोंक ने इस दृश्य को अमर बना दिया। जब भी किसी प्रेम कहानी में हल्की फुल्की नाराजगी या बहस का दौर आता है, तो यह गाना आज के कपल्स को भी अपनी ही कहानी जैसा रिलेटेबल फील देता है।
आर डी बर्मन का संगीत और आनंद बख्शी के जादू भरे बोल
इस क्लासिक नगमे की मिठास और ताज़गी के पीछे दिग्गज संगीतकार आर डी बर्मन की धुन और महान गीतकार आनंद बख्शी की कलम का बड़ा योगदान है। आर डी बर्मन की एनर्जी से भरी धुन ने गाने को एक अलग रफ्तार दी, जबकि आनंद बख्शी के सरल और दिल को छू लेने वाले शब्दों ने इसे हर उम्र के श्रोताओं का पसंदीदा बना दिया। यही वजह है कि पांच दशक का लंबा वक्त गुजर जाने के बावजूद पुराने दौर के इस रोमांटिक गीत की लोकप्रियता में जरा भी कमी नहीं आई है।



















