सिनेमा हमेशा से समाज का एक ऐसा आईना रहा है जो उन आवाजों और दबी हुई सच्चाइयों को परदे पर उकेरता है जिन पर अमूमन लोग पर्दा डाल देते हैं। साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म लज्जा इसका एक बहुत बड़ा और प्रासंगिक उदाहरण है। सोमवार को इस बहुचर्चित फिल्म ने अपनी रिलीज के पूरे 25 साल पूरे कर लिए हैं। इस खास अवसर पर फिल्म से जुड़े तमाम कलाकारों और प्रशंसकों ने पुरानी यादों को ताजा किया है और सिनेमा के इस अहम मील के पत्थर को याद किया है।
जैकी श्रॉफ ने इंस्टाग्राम पर मनाया जश्न
फिल्म के अहम हिस्से रहे अभिनेता जैकी श्रॉफ ने इसके 25 साल पूरे होने पर जश्न मनाया है। अभिनेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के स्टोरीज सेक्शन पर फिल्म के विभिन्न क्लिप्स का एक शानदार मोंटाज वीडियो साझा किया। इस वीडियो के साथ उन्होंने फिल्म के सफर को याद करते हुए लिखा कि फिल्म लज्जा ने अपनी रिलीज के 25 साल पूरे कर लिए हैं। उनके इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर से इस क्लासिक फिल्म की चर्चा शुरू हो गई है और दर्शक पुरानी यादों में खो गए हैं।
किरदारों और कलाकारों की दमदार फेहरिस्त
इस फिल्म में जैकी श्रॉफ ने रघुनाथ यानी रघु नाम के किरदार को बखूबी निभाया था जो मुख्य किरदार वैदेही के पति की भूमिका में थे। फिल्म में उनका यह किरदार एक अमीर और एनआरआई पति का था जो बंद कमरों और दरवाजों के पीछे अपनी पत्नी के साथ अभद्र व्यवहार करता था और बेवफाई की हदें पार करता था। इस फिल्म के निर्देशक ने न केवल एक मजबूत और बेबाक कहानी चुनी बल्कि कलाकारों का चयन भी बेहद सोच-समझकर किया था जो कहानी के वजन को पूरी तरह से संभाल सके।
सितारों से सजी थी कलाकारों की महफिल
इस मल्टीस्टारर फिल्म में हिंदी सिनेमा के कई दिग्गज कलाकार एक साथ नजर आए थे। फिल्म में मनीषा कोइराला ने वैदेही का मुख्य किरदार निभाया था जबकि माधुरी दीक्षित ने जानकी की भूमिका को जीवंत किया था। इसके अलावा रेखा रामदुलारी के रूप में पर्दे पर उतरी थीं और महिमा चौधरी ने मैथिली का किरदार निभाया था। पुरुषों की बात करें तो अजय देवगन ने राजू की भूमिका अदा की थी और अनिल कपूर ने अपने खास अंदाज में बुल्ला का किरदार निभाया था जबकि जैकी श्रॉफ रघु के रूप में दिखे थे। इन तमाम कलाकारों की मौजूदगी ने कहानी में जान फूंक दी थी और इसके गानों तथा संगीत को भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिला था।
वैदेही की संघर्ष यात्रा और अन्य महिलाओं की दास्तान
फिल्म की पूरी पटकथा मुख्य रूप से वैदेही के इर्द-गिर्द घूमती है जो अमेरिका में अपने पति रघु के जुल्मों-सितम से तंग आ चुकी है। गर्भवती होने के बाद वह क्रूरता से भागकर वापस भारत लौटती है। अपनी इस देश वापसी और स्वतंत्रता की खोज की यात्रा के दौरान उसकी मुलाकात अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि की तीन अन्य महिलाओं से होती है। इन महिलाओं में मैथिली, जानकी और रामदुलारी शामिल होती हैं जो अपनी जिंदगी की अलग लड़ाइयां लड़ रही होती हैं।
पितृसत्ता और घरेलू हिंसा के खिलाफ बगावत
फिल्म में दिखाई गई ये सभी महिलाएं किसी न किसी रूप में पितृसत्तात्मक समाज के शिकंजे और घरेलू हिंसा का गंभीर शिकार होती हैं। इसके बावजूद वे समाज के सामने घुटने टेकने या हार मानने के बजाय अपने बुनियादी अधिकारों के लिए डटकर संघर्ष करती हैं। यह फिल्म समाज की परतें उधेड़कर महिलाओं की वास्तविक स्थिति, उनके शोषण और उनके साथ होने वाले अन्याय को अत्यंत गहराई से दिखाती है। यह कहानी और इसका संदेश दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ता है।
महिला सशक्तीकरण और समाज का कड़वा सच
लज्जा फिल्म केवल मनोरंजन का साधन नहीं थी बल्कि यह महिलाओं के हक में आवाज उठाने और नारी सशक्तीकरण का एक बहुत मजबूत संदेश देने का माध्यम थी। इस फिल्म का मुख्य उद्देश्य समाज के उस कड़वे और असहज सच को सबके सामने लाना था जहां आधुनिक युग में भी महिलाओं को बराबरी का दर्जा और पूरा सम्मान नहीं मिल पाता है। आज भी इस फिल्म के मुद्दे उतने ही प्रासंगिक हैं जितने कि रिलीज के वक्त थे।



















