भारतीय सिनेमा जगत में ऐसे कई कलाकार आए जिन्होंने अपनी शुरुआती फिल्मों से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। बड़े सितारों और बेहतरीन निर्देशकों के साथ काम करने के बाद भी कई बार किस्मत का पहिया ऐसा घूमता है कि कलाकार वक्त के थपेड़ों में कहीं खो जाता है। बॉलीवुड अभिनेता आनंद बलराज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आनंद बलराज ने हिंदी सिनेमा के कई सबसे बड़े नामों जैसे माधुरी दीक्षित, अनिल कपूर, संजय दत्त, शाहरुख खान और सलमान खान के साथ स्क्रीन साझा की। लेकिन लगातार मिली असफलताएं और जीवन में घटे एक दर्दनाक हादसे ने उनके बढ़ते कदमों को रोक दिया, जिसके कारण आज वह बड़े पर्दे और लाइमलाइट से कोसों दूर एक गुमनाम जिंदगी बिता रहे हैं।
शुरुआती सफलता और ब्लॉकबस्टर फिल्मों का सफर
आनंद बलराज के करियर की शुरुआत बेहद धमाकेदार रही थी। साल 1989 में जब दिग्गज फिल्म निर्माता सुभाष घई ने अपनी बहुप्रतीक्षित एक्शन-ड्रामा फिल्म 'राम लखन' बनाई, तो उन्होंने आनंद बलराज को भी एक महत्वपूर्ण अवसर दिया। इस ऐतिहासिक फिल्म में अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ, डिंपल कपाड़िया और माधुरी दीक्षित जैसे दिग्गज मुख्य भूमिकाओं में थे। इस बड़ी स्टार कास्ट के बीच आनंद बलराज ने 'देबू' नामक किरदार निभाया था। हालांकि उनका स्क्रीन टाइम बहुत अधिक नहीं था, लेकिन अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित के साथ उनकी मौजूदगी ने दर्शकों का ध्यान खींचा। 'राम लखन' बॉक्स ऑफिस पर उस साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शुमार हुई और इसने आनंद के लिए आगे की राह आसान कर दी।
सुभाष घई के साथ आनंद बलराज का जुड़ाव यहीं खत्म नहीं हुआ। साल 1993 में आई एक और ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर फिल्म 'खलनायक' में सुभाष घई ने उन्हें दोबारा मौका दिया। इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में संजय दत्त, जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। आनंद बलराज ने फिल्म में 'इंस्पेक्टर सुधाकर' की भूमिका निभाई थी। फिल्म के कई महत्वपूर्ण दृश्यों में उनकी सक्रियता देखी गई। 'खलनायक' ने न केवल टिकट खिड़की पर इतिहास रचा बल्कि बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित होकर आनंद बलराज के खाते में एक और बड़ी कामयाबी जोड़ दी।
शाहरुख खान और सलमान खान के साथ सुपरहिट फिल्में
सफलता का यह सिलसिला नब्बे के दशक के उत्तरार्ध में भी जारी रहा। साल 1997 में जब सुभाष घई ने शाहरुख खान, महिमा चौधरी और अमरीश पुरी को लेकर फिल्म 'परदेस' का निर्देशन किया, तो आनंद बलराज को एक बार फिर एक अहम भूमिका के लिए चुना गया। उन्होंने फिल्म में 'मनुचंद' का किरदार निभाया। रोमांस और पारिवारिक ड्रामा से भरपूर यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई और इसके गानों तथा किरदारों को दर्शकों ने खूब पसंद किया।
इसके ठीक एक साल बाद, यानी 1998 में आनंद बलराज अभिनेता सलमान खान, काजोल और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के साथ फिल्म 'प्यार किया तो डरना क्या' में दिखाई दिए। इस रोमांटिक कॉमेडी फिल्म में उन्होंने 'बालविंदर' नाम के किरदार को जीवंत किया। यह फिल्म भी दर्शकों को बेहद पसंद आई और बॉक्स ऑफिस पर इसे सुपरहिट का तमगा मिला। इस तरह अपने करियर के शुरुआती दशक में ही आनंद बलराज दो ब्लॉकबस्टर और दो सुपरहिट फिल्मों का हिस्सा बन चुके थे, जो किसी भी नए कलाकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
9 लगातार फ्लॉप फिल्में और करियर का पतन
शानदार शुरुआत के बावजूद आनंद बलराज फिल्म उद्योग में अपनी इस सफलता को लंबे समय तक बरकरार रखने में नाकामयाब रहे। उन्हें कई ऐसी फिल्मों में काम करना पड़ा जो दर्शकों को आकर्षित करने में पूरी तरह विफल रहीं। बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि उनके करियर की कुल 9 फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अत्यंत खराब प्रदर्शन करते हुए 'डिजास्टर' साबित हुईं। इन लगातार असफलताओं ने उनकी साख और करियर ग्राफ को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
उनकी इन असफल फिल्मों की सूची काफी लंबी है। साल 1995 में आई फिल्म 'साजन की बाहों में', 'डांस पार्टी', 'अनौखा अंदाज' और 'संगदिल सनम' बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह औंधे मुंह गिरीं। इसके बाद साल 1998 में आई 'हफ्ता वसूली', वर्ष 2001 में रिलीज हुई 'शिर्डी साईं बाबा', साल 2004 में आई 'हत्या - द मर्डर', साल 2005 में प्रदर्शित हुई फिल्म 'मुंबई गॉडफादर' और अंततः साल 2012 में आई 'दाल में कुछ काला है' जैसी फिल्में भी सिनेमाघरों में दर्शकों के लिए तरसती रहीं। ये सभी फिल्में आनंद बलराज के करियर को दोबारा पटरी पर लाने में नाकाम रहीं और उनके हिस्से में लगातार फ्लॉप फिल्मों का दाग लगता चला गया।
एक हादसा और गुमनामी का सफर
लगातार फ्लॉप हो रही फिल्मों के बीच आनंद बलराज के जीवन में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उनके बचे-खुचे करियर को पूरी तरह से समाप्त कर दिया। वह एक भयंकर दुर्घटना (एक्सीडेंट) का शिकार हो गए। इस हादसे के बाद उनके स्वास्थ्य और काम करने की क्षमता पर बेहद बुरा असर पड़ा, जिसके कारण उन्हें अभिनय की दुनिया से पूरी तरह दूरी बनानी पड़ी। फिल्म निर्माताओं ने भी धीरे-धीरे उनसे संपर्क करना बंद कर दिया। आज स्थिति यह है कि बड़े सितारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले आनंद बलराज पूरी तरह से गुमनाम हो चुके हैं और फिल्म इंडस्ट्री से गायब हैं।



















