दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद मास्को लौटते ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ अपने आक्रामक रुख को और तेज कर दिया है। इसी कड़ी में यूक्रेन-पोलैंड सीमा के पास एक बेहद डरावनी घटना सामने आई है, जहां ब्रिटिश पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और कई अन्य वरिष्ठ यूरोपीय नेताओं को ले जा रही एक विशेष ट्रेन रूसी ड्रोन हमले की चपेट में आने से बाल-बाल बची। यह हवाई हमला उसी रेल मार्ग पर हुआ जिससे कुछ ही मिनट पहले इन दिग्गजों की ट्रेन गुजरी थी। इस घटना ने पूरे यूरोपीय संघ और पश्चिमी देशों को गहरी चिंता में डाल दिया है क्योंकि युद्ध अब सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय नेताओं के बेहद करीब पहुंच गया है।
यह हाई-प्रोफाइल प्रतिनिधिमंडल कीव में आयोजित यालटा यूरोपियन स्ट्रेटेजी (YES) सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सा लेकर वापस लौट रहा था। यह बैठक 11-12 सितंबर 2026 को यूक्रेन की राजधानी कीव में आयोजित की गई थी। इस ट्रेन में पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री के अलावा स्वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री कार्ल बिल्ट और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के सुरक्षा सलाहकार गुंटर सॉटर सहित कई अन्य यूरोपीय राजनयिक भी सवार थे। यह सभी लोग यूक्रेन को यूरोपीय समर्थन जारी रखने के संकल्प के साथ पोलैंड के रास्ते अपने देश लौट रहे थे।
तड़के 5 बजे का आपातकालीन अलर्ट और दहशत का माहौल
पोलैंड की सीमा की तरफ बढ़ रही इस विशेष ट्रेन को तड़के लगभग 5:00 बजे अचानक रोक दिया गया क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों को इस मार्ग पर रूसी ड्रोन के सक्रिय होने की चेतावनी मिली थी। ट्रेन के अचानक रुकते ही उसमें सो रहे सभी यात्रियों को तुरंत जगाया गया। ट्रेन स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों ने यात्रियों को किसी भी अनहोनी के लिए तैयार रहने और जरूरत पड़ने पर तुरंत ट्रेन खाली करने का निर्देश दिया। ट्रेन के भीतर कुछ समय के लिए भारी तनाव और दहशत की स्थिति बन गई थी क्योंकि ड्रोन हमले की आशंका बेहद करीब थी। कुछ देर तक चले कड़े सुरक्षा निरीक्षण के बाद जब वायुक्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित घोषित कर दिया गया, तब जाकर ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति मिली।
चंद मिनटों का फासला और दूसरी यात्री ट्रेन पर हमला
हालांकि, इस वीआईपी ट्रेन के गुजरने के ठीक पीछे चल रही एक अन्य यात्री ट्रेन इतनी भाग्यशाली नहीं रही। कीव से वारसॉ की ओर जा रही इस दूसरी ट्रेन में लगभग 206 यात्री सवार थे और यह कुछ ही मिनटों के अंतराल पर उसी रेलवे ट्रैक पर आगे बढ़ रही थी। अचानक एक रूसी ड्रोन ने इस ट्रेन के लोकोमोटिव यानी इंजन को अपना निशाना बनाया। इस जोरदार धमाके में ट्रेन का इंजन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। यूक्रेनी रेलवे विभाग की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस हमले में कोई भी यात्री हताहत नहीं हुआ और सभी को सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना से साफ है कि रूसी ड्रोन हमले और बोरिस जॉनसन की ट्रेन के बीच का अंतर केवल कुछ ही मिनटों का था, जिसने इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है।
पोलैंड की सीमा पर बढ़ी सुरक्षा और लड़ाकू विमानों की तैनाती
यह भीषण हमला यूक्रेन के पश्चिमी हिस्से में पोलैंड की अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद करीब अंजाम दिया गया। इस हमले के बाद पोलैंड की ओर भी सुरक्षा प्रोटोकॉल को तुरंत सक्रिय कर दिया गया और देश में हाई-अलर्ट घोषित कर दिया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पोलिश वायुसेना ने सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए अपने लड़ाकू विमानों को तुरंत रवाना कर दिया। इसके अलावा, सीमा पर स्थित याहोदीन-दोरहुस्क क्षेत्र में भी कई अन्य ड्रोन हमलों की खबरें मिली हैं। इन हमलों में एक स्थानीय गैस स्टेशन और सीमा पर खड़े कई बड़े ट्रकों को भारी नुकसान पहुंचने की पुष्टि हुई है।
यूक्रेन के रसद मार्गों पर रूस का बढ़ता दबाव
इस ताजा हमले ने अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के बीच एक बड़ी बहस छेड़ दी है। क्या रूस अब जानबूझकर पश्चिमी यूक्रेन के उन रणनीतिक क्षेत्रों को निशाना बना रहा है जो यूरोप से आने वाली सहायता और कूटनीतिक आवाजाही के लिए मुख्य द्वार हैं? यूक्रेन का रेलवे नेटवर्क पहले से ही रूसी मिसाइलों और ड्रोनों के निशाने पर रहा है क्योंकि इसी मार्ग से यूक्रेन को पश्चिमी देशों से सैन्य सहायता और रसद की आपूर्ति होती है। हाल के हफ्तों में कई रेलवे डिपो, मरम्मत केंद्रों और मुख्य पटरियों पर हमले तेज हुए हैं। पश्चिमी यूक्रेन और पोलैंड सीमा के पास इस प्रकार के हमले दर्शाते हैं कि रूस अब यूक्रेन के बाहरी संपर्क मार्गों को पूरी तरह से काटना चाहता है ताकि यूरोपीय देशों से मिलने वाली मदद को रोका जा सके।



















