बॉलीवुड के इतिहास में 10 सितंबर का दिन अभिनेता सलमान खान के चाहने वालों और फिल्म व्यापार के जानकारों के बीच एक खास अहमियत रखता है। कैलेंडर की इस एक ही तारीख ने अभिनेता की पेशेवर यात्रा में कई बड़े बदलाव देखे हैं। अलग-अलग दशकों में इसी तारीख पर रिलीज हुईं तीन अलग-अलग फिल्मों ने उनके करियर के अलग-अलग दौर को उजागर किया है। जहां शुरुआती दो प्रयासों को बॉक्स ऑफिस पर असफलता का मुंह देखना पड़ा, वहीं तीसरी फिल्म ने देश भर में ऐसा इतिहास रचा जिसने उनके करियर को एक नया मुकाम दिया।
हैलो ब्रदर और उम्मीदों का टूटना
दस सितंबर 1999 को सिनेमाघरों में आई फिल्म ‘हैलो ब्रदर’ में सलमान खान, उनके छोटे भाई अरबाज खान और अभिनेत्री रानी मुखर्जी मुख्य भूमिकाओं में थे। सोहेल खान के निर्देशन में बनी इस एक्शन-कॉमेडी फिल्म से फिल्म निर्माताओं को काफी उम्मीदें जुड़ी हुई थीं। इस कहानी में एक अनोखा पहलू दिखाया गया था जिसमें मुख्य किरदार की मौत के बाद उसका भूत बनता है और उसका दिल अरबाज खान के किरदार में ट्रांसप्लांट किया जाता है। फिल्म के गाने जैसे ‘हटा सावन की घटा’ और ‘चांदी की दाल पर’ तो बेहद लोकप्रिय हुए, लेकिन कमजोर पटकथा और बचकाने हास्य ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में नाकामयाब कर दिया। नतीजतन, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल साबित हुई।
दिल ने जिसे अपना कहा का निराशाजनक सफर
ठीक पांच साल बाद 10 सितंबर 2004 को सलमान खान एक बार फिर रोमांटिक-इमोशनल ड्रामा फिल्म ‘दिल ने जिसे अपना कहा’ के साथ पर्दे पर लौटे। अतुल अग्निहोत्री के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उनके साथ शीर्ष अभिनेत्रियां प्रीति जिंटा और भूमिका चावला नजर आईं। दिल के प्रत्यारोपण जैसे संवेदनशील विषय पर आधारित इस फिल्म में हिमेश रेशमिया और एआर रहमान के संगीत को दर्शकों ने सराहा भी। इसके बावजूद, फिल्म की बेहद सुस्त गति और अत्यधिक भावुक कहानी आम दर्शकों के दिलों तक नहीं पहुंच पाई। परिणामस्वरूप, अभिनेता को एक बार फिर इसी तारीख पर नाकामी का सामना करना पड़ा और दर्शक सिनेमाघरों से दूर ही रहे।
दबंग से आई बॉक्स ऑफिस पर सुनामी
दशक 2000 के अंतिम सालों में सलमान खान का फिल्मी करियर एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा था। हालांकि वर्ष 2009 में आई फिल्म ‘वांटेड’ ने कुछ राहत जरूर दी थी, लेकिन उन्हें एक ऐसी मेगा-ब्लॉकबस्टर की सख्त दरकार थी जो उन्हें प्रसिद्धि के शिखर पर पहुंचा सके। दस सितंबर 2010 को निर्देशक अभिनव कश्यप के निर्देशन में रिलीज हुई फिल्म ‘दबंग’ वही ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई। अभिनेता ने उत्तर प्रदेश के एक निडर, मस्तमौला और अनोखे देसी अंदाज वाले पुलिस अधिकारी ‘चुलबुल पांडे’ के किरदार को परदे पर ऐसे उतारा कि दर्शक दीर्घा में सीटियां और तालियां गूंज उठीं। इस फिल्म ने न सिर्फ उनके लड़खड़ाते करियर को संभाला बल्कि उनके स्टारडम को आसमान की बुलंदियों तक पहुंचा दिया।
रिकॉर्ड तोड़ कमाई और संस्कृति का हिस्सा बने डायलॉग
जब यह फिल्म सिनेमाघरों में उतरी तो इसने कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए और बॉक्स ऑफिस पर एक जबरदस्त सुनामी ला दी। इसी फिल्म से सोनाक्षी सिन्हा ने बॉलीवुड में कदम रखा, अरबाज खान ने निर्माण के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की और मलाइका अरोड़ा का लोकप्रिय गाना ‘मुन्नी बदनाम हुई’ हर जुबान पर चढ़ गया। फिल्म का जबरदस्त एक्शन, उनके दमदार संवाद और कॉलर के पीछे चश्मा लटकाने का उनका अनूठा स्टाइल पूरे देश में एक नया फैशन ट्रेंड बन गया। देश भर में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करते हुए इस फिल्म ने 140 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया और साल 2010 की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर बन गई। जो तारीख कभी अभिनेता के लिए निराशा का कारण बनी थी, उसी ने उनके करियर का सबसे सुनहरा अध्याय लिख दिया।

















