बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के बीच छिड़ा पारिवारिक विवाद अब सार्वजनिक विमर्श में बदलता जा रहा है। अभिनेता के अपनी सह-कलाकार कोमल रानी स्वर्णकार के साथ कथित संबंधों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब अभिनेत्री और निर्देशक दिव्या खोसला कुमार खुलकर सामने आई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए सुनीता आहूजा का पक्ष लिया और अभिनेता के आचरण पर कड़े सवाल खड़े किए। बाद में सुनीता आहूजा ने भी इस संदेश को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर री-शेयर करके अपनी सहमति प्रकट की।
महिला अधिकारों और समाज के संघर्ष पर उठाई आवाज
दिव्या खोसला कुमार ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किए गए लंबे वक्तव्य में भारतीय समाज के भीतर महिलाओं की स्थिति और उनके मूल अधिकारों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पिछली पीढ़ियों की महिलाओं ने अपनी बेटियों को आत्मनिर्भर और शिक्षित बनाने के लिए दशकों तक संघर्ष किया, ताकि वे पुरुषों के अधीन रहने को मजबूर न हों। लेकिन वर्तमान में सोशल मीडिया पर जिस प्रकार का घटनाक्रम सामने आ रहा है, वह समाज को पुरानी रूढ़ियों की तरफ धकेलने जैसा है। धार्मिक स्थलों पर कथित संबंधों का सार्वजनिक प्रदर्शन करने और बहु-विवाह यानी पॉलीगेमी के चलन को बढ़ावा देने को उन्होंने बेहद आपत्तिजनक करार दिया।
गोविंदा के करियर और सुनीता के त्याग की चर्चा
अभिनेता के पुराने कद को याद करते हुए दिव्या ने कहा कि गोविंदा एक बेहद वरिष्ठ और सम्मानित कलाकार रहे हैं। नब्बे के दशक में दर्शक उनकी फिल्में देखकर बड़े हुए, जो उस दौर में व्यापक मनोरंजन का साधन थीं। उन्होंने यह भी साझा किया कि गोविंदा उनकी अपनी मां के पसंदीदा अभिनेता हुआ करते थे और देश भर में उनके लाखों प्रशंसक रहे हैं।
इसके साथ ही दिव्या ने सुनीता आहूजा के योगदान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि सुनीता ने एक समर्पित पत्नी के रूप में अपना पूरा जीवन परिवार को सौंप दिया, कभी अपने करियर की दिशा में नहीं सोचा और पूरी निष्ठा से बच्चों की परवरिश की। अभिनेता की शोहरत और कामयाबी के पीछे उनकी पत्नी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। दिव्या ने सवाल उठाया कि बाहर मिली सफलता का पूरा श्रेय केवल अभिनेता को नहीं दिया जा सकता, जबकि घर पर परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों को संभालने का काम मुख्य रूप से पत्नी ने किया।
मौन दर्शक बने रहने पर दिव्या ने उठाए सवाल
सुनीता आहूजा का खुलकर समर्थन करते हुए दिव्या ने पूछा कि जब एक महिला समाज के सामने अपनी व्यथा रख रही है, तब बाकी लोग केवल तमाशबीन क्यों बने हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई भी इस परिस्थिति में दखल नहीं देना चाहता, तो लोगों को यह सब एक दर्शक बनकर क्यों देखना चाहिए। सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की उपस्थितियों और बहु-विवाह की प्रवृत्ति को किसी भी रूप में बढ़ावा दिए जाने पर उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि ऐसी घटनाएं नई पीढ़ी को गलत दिशा में ले जाने का काम करती हैं और समाज को उस पुराने दौर की तरफ ले जाती हैं जिसे पीछे छोड़ने के लिए लंबा संघर्ष किया गया था।
सम्मान खोने और बुनियादी अधिकारों के संघर्ष पर खरी-खरी
अपने वक्तव्य के अंतिम हिस्से में दिव्या ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि यदि किसी का कोई निजी संबंध है भी, तो उसे इस प्रकार सार्वजनिक रूप से प्रचारित नहीं किया जाना चाहिए। पवित्र और धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल निजी संबंधों के प्रदर्शन के लिए किए जाने को उन्होंने अनुचित बताया।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि अपनी ही पत्नी पर गंभीर आरोप लगाना और उन्हें गलत ठहराने की कोशिश करना किसी कमजोर पुरुष की मानसिकता को दर्शाता है। सुनीता के बारे में बात करते हुए दिव्या ने कहा कि भले ही वे कॉन्वेंट की पढ़ी-लिखी न हों, लेकिन उनकी पीड़ा और उनके शब्द सीधे दिल को छूते हैं। उन्होंने दुख जताया कि जिस व्यक्ति के लिए एक महिला ने अपनी जिंदगी के कई दशक कुर्बान कर दिए, आज उसी महिला को एक पत्नी के तौर पर अपनी बुनियादी जरूरतों और सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अंत में दिव्या ने कहा कि गोविंदा भले ही एक लेजेंडरी कलाकार रहे हों, लेकिन इस आचरण के चलते उनकी नजर में अभिनेता ने अपना सम्मान खो दिया है।



















